चौलाई खाने के फायदे Chaulai Khane Ke Fayde In Hindi

चौलाई खाने के फायदे Chaulai Khane Ke Fayde In Hindi Language

चौलाई खाने के फायदे (Chaulai Khane Ke Fayde In Hindi Language)

चौलाई पौधों की एक जाति है जो पूरे विश्व में पाई जाती है | चौलाई को सब्जी व साग के रूप में प्रयोग किया जाता है जो विटामिन से भरपूर होती है | चौलाई बहुत ही उपयोगी पत्तेदार सब्जी होती है । चौलाई के डंठल में प्रोटीन, खनिज, विटामिन ए, सी प्रचुर मात्रा में मिलते है । चौलाई का सेवन औषधि रूप में भी किया जाता है ये पेट के रोगों के लिए बहुत लाभकारी है | तो आइये जानते हैं कि चौलाई का उपयोग किन-किन रोगों के उपचार में किया जाता है |

नकसीर, नाक से रक्तस्राव – होने पर चौलाई के ताजा हरे पत्तों के साथ नीम की पत्तियों को पीसकर कनपटी पर लेप करना चाहिए |

सूजाक, मूत्रकृच्छ – 1. चौलाई के पत्तों का रस 20 ग्राम को 100 ग्राम ताजा जल में मिला, दिन में दो बार प्रातः सायं पिलाने से सूजाक में लाभ मिलता है | 2. पत्तों को गर्म पानी में भिगो, पीस छानकर पिलाने से मूत्रनली की जलन दूर हो जाती है |

यदि मूत्रकृच्छ का कारण पथरी हो तो उक्त रस में जबाखार दो ग्राम मिलाकर दिन में तीन बार पिलावें |

ज्वर– चौलाई को जल में उबालकर निचोड़ लें, फिर सेंधानमक, छोटी पीपल का चूर्ण व पिसी कालीमिर्च मिलाकर खिलाने से ज्वर उतर जाता है |

प्रसूता के रक्तस्राव – इसके पीने से गर्भिणी व प्रसूता के रक्तस्राव में भी लाभ हो जाता है | कुछ विद्वानों के मतानुसार-नारी के ऋतुकाल में चौलाई की मूल को चावलों की धोवन में पीसकर पिलाने से गर्भ स्थिर हो जाता है |

नासूर – चौलाई की जड़ पीसकर लगाने से रोग से मुक्ति मिल जाती है |

आग से जल जाने पर – चौलाई का रस निकालकर लेपन करने से आग से जल जाने के कारण हुए घाव में लाभ हो जाता है |

मकड़ी, लूता का विष – चौलाई के पत्तों के रस को घी के साथ मिलाकर लगाने से मकड़ी का विष उतर जाता है |

सर्प-विष – चौलाई की जड़ 20 ग्राम के साथ 5 ग्राम कालीमिर्च चावल के धोवन में पीसकर रोगी व्यक्ति को बार-बार पिलाने से सर्प का विष शान्त हो जाता है |

बिच्छू संखिया-विष – चौलाई की जड़ को पानी में पीसकर लेप करें तथा चौलाई के रस में शक्कर मिलाकर रोगी को पिलाना चाहिए |

पागल कुत्ते द्वारा काटा गया व्यक्ति – पागल हो जाये एंव दूसरों को काटने लगे तो कांटे वाली जंगली चौलाई की जड़ 50 से 150 ग्राम लेकर उसे पीस लें | उस चूर्ण को पानी में घोलकर थोड़ी-थोड़ी देर बाद पिलायें |

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