हैज़ा उपचार में ना करे लापरवाही Haiza Upchar me Na Kare Laparwahi

वर्षा ऋतु में संक्रमित पदार्थों का सेवन कई बीमारियों को बुलावा देता है. दूषित जल या भोज्य पदार्थ ग्रहण करने से हमारे पाचन तंत्र पर विपरीत प्रभाव पड़ता है. यही कारण बनता है रोगों का. हैजा भी ऐसा ही एक रोग है जो दूषित जल या भोज्य पदार्थों से होने वाले संक्रमण का परिणाम है (Haiza Dushit Jal Ka hi Parinaam Hai).

बारिश के मौसम में एकत्रित पानी, गंदगी में अनेकों बैक्टीरिया को पनपते हैं. जब मक्खियां इन बैक्टीरिया को खाद्य व पेय पदार्थों पर छोड़ती है तो वे भी संक्रमित हो जाते हैं (Haiza Rog ko jyada Failane me Gharelu Makhi bhi jimmedar hai). ऐसे पदार्थ को जब मनुष्य ग्रहण करता है तब यह उसके शरीर में पहुंच जाते हैं. यही कारण होता है कॉलेरा रोग होने का. कॉलेरा एक प्रकार का बैक्टीरिया जनित रोग है जो ‘वाइब्रियो कॉलेरी’ नामक बैक्टीरिया से फैलता है. जिन स्थानों पर सफाई नहीं होती, गंदगी युक्त पानी एकत्रित हो, वहां इस बैक्टीरिया के पनपने का ज्यादा खतरा रहता है. गंदे व संक्रमित पानी में उगाई गई सब्जियों के सेवन से भी यह बैक्टीरिया मानव के शरीर में प्रवेश कर सकता है.

संक्रमण के लक्षण दिखने में कुछ घंटों से लेकर 2 दिन तक का समय लग सकता है. रोगी के पूर्णतः ठीक होने तक बैक्टीरिया उसके शरीर में मौजूद रहता है. इस रोग से बचाव के लिए टीकाकरण भी एक उपाय है. एक बार हैजा का टीका लगवाने पर करीब 6 महीनों के रोग से सुरक्षा मिलती है (Haiza ka Tika).

ज्यादातर हैज़ा की 3 अवस्थाएं होती है Jyadatar Haiza ki 3 Avasthaye hoti hai

  • आक्रमण अवस्था Attacking Position रोगी के द्वारा पतला मल त्याग करना, कमजोरी और हर थोड़े अंतराल पर उल्टी होना.
  • पूर्ण विकसित अवस्था Purn Viksit Awastha इस अवस्था में संक्रमण पूर्ण रूप से शरीर में विकसित हो चुका होता है. रोगी के शरीर में पानी की कमी के कारण उसे अधिक प्यास लगती है, उसके हाथ पैर में ऐंठन की अनुभूति होती है. साथ ही इसमें रोगी को बेचैनी होती है व उसकी आंखें भी अंदर की ओर धसने लगती हैं.
  • शीतांग अवस्था Sheetang Awastha जैसा कि नाम से ही प्रतीत होता है, इस अवस्था में रोगी का शरीर बर्फ के समान ठंडा पड़ जाता है व उसे बहुत पसीना आता है. अतिसार की तीव्रता और अधिक प्यास लगने से रोगी को बहुत उल्टी भी होती है.
  • प्रतिक्रिया अवस्था Pratikriya Awastha इस अवस्था में बैक्टीरिया कुछ समय के लिए निष्क्रिय रहता है फिर रोगी के शरीर का तापमान बढ़ने लगता है. मूत्रमार्ग में अवरोध के कारण रोगी मूत्रत्याग भी नहीं कर पाता. कभी-कभी रोगी को अधिक बार मूत्र त्याग भी करना पड़ जाता है.
  • परिणाम अवस्था Prinaam Awastha सही उपचार न मिलने पर निष्क्रिय बैक्टीरिया पुनः सक्रिय हो जाता है. रोगी प्रायः उल्टी-दस्त, पानी की कमी व अन्य समस्याओं से पीड़ित हो जाता है. इस अवस्था में अधिकतर रोगियों की मृत्यु हो जाती है.
cholera ke lakshan aur gharelu upchar

हैज़ा होने के लक्षण Haiza Hone ke Lakshan

  1. उल्टी होना Ulti Hona
  2. अतिसार या दस्त होना Dast Hona
  3. निर्जलीकरण, रोगी को अधिक प्यास लगना Pyas na Lagna
  4. रोगी के शरीर का तापमान असामान्य रहना, कभी शरीर बर्फ के समान ठंडा पड़ जाना तो कभी अचानक गरम हो जाना
  5. रोगी कम मूत्रत्याग न कर पाना Mutrtyag me Kami
  6. आंखें भीतर की ओर धंस जाना Aankhe Bhiter ki or Dhus Jana
  7. हाथ पैरों में अकड़न व ऐंठन, मांसपेशियों में दर्द होना
  8. बिना अधिक शारीरिक श्रम किए रोगी को कमजोरी महसूस होना
  9. पेट दर्द, बेचैनी व सिर दर्द Pet Dard, Bechaini aur Sar Dard

हैज़ा से छुटकारा पाने के घरेलु उपचार Haiza se Chhutkara Pane ke Gharelu Upchar

आज हैजा का रोग एक महामारी की तरह फैल रहा है. इससे रोग के कारण होने वाली मृत्यु दर को कम करने का एक ही उपाय है- समय पर उपचार. कुछ घरेलू व आयुर्वेदिक उपायों को अपनाकर प्रारंभिक चरण में ही इस रोग को रोका जा सकता है (Haiza ko Gharelu Ilaj se Roka ja sakta hai)

तरल पदार्थ का ज्यादा सेवन Taral padarth ka jyada seven हैजा में रोगी पतला मल त्याग करता है. इससे उसके शरीर में पानी की कमी हो जाती है. रोगी के शरीर मैं पानी की पूर्ति के लिए आवश्यक मात्रा में तरल पदार्थों का सेवन करना चाहिए. दिन में नियमित अंतराल पर रोगी को नींबू पानी व नारियल पानी पीते रहना चाहिए.

ओ.आर. एस. के घोल से उपचार O.R.S ke Ghol se Upchar शरीर में इलेक्ट्रोलाइट्स की पूर्ति करने में ओ.आर. एस. घोल सहायक होता है. एक कप पानी में आधा चम्मच शक्कर और आधा चम्मच नमक मिलाकर घोल तैयार कर लें. रोगी को दिन में 4-5 बार इसका सेवन कराने से डिहाइड्रेशन नहीं होता.

शहद है लाभदायक Shahad hai Labhdayak शहद के एंटीबैक्टीरियल गुण हैजा के रोगाणु से लड़ने में मदद करते हैं. एक गिलास पानी में एक चम्मच शहद, नींबू का रस व नमक मिलाकर पिएं. इससे शरीर कर रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होती है.

दही के फायदे Dahi ke Fayde पाचन संबंधी समस्याओं में दही रामबाण होता है. एक गिलास दही में मैथी व जीरा पाउडर डाल कर मिला लें. इसका सेवन करने से दस्त बंद होते हैं.

प्याज से उपचार Pyaj se Upchar प्याज में बैक्टीरिया से लड़ने के गुण होते हैं. प्याज और काली मिर्च का पेस्ट बना लें. एक हफ्ते तक दिन में 3 बार इसका सेवन करने से हैजा में फायदा होता है.

एनिमा से होगा फायदा Anima se Hoga Fayda हैजा में रोगी को एक गिलास पानी में एनिमा घोलकर पिलाने से लाभ होता है. साथ ही रोगी के पेट पर गीली मिट्टी की पट्टी रखने से बुखार भी उतरता है. रोगी को रोजाना गर्म पानी के गरारे करने चाहिए.

लौंग से हैज़ा का इलाज Long se Haiza ka Ilaj लौंग के तेल की 2-3 बूंद रोगी को देने से हैजा में फायदा होता है. पानी में लौंग उबाल लें. उसमें थोड़ा सेंधा नमक मिलाकर ठंडा कर ले. रोगी को दिन में 2-3 बार यह पानी देना लाभप्रद होता है.

हैज़ा से रोकथाम के उपाय Haiza se Roktham ke Upay

  • दूषित भोज्य व पेय पदार्थों का सेवन न करें.
  • शरीर में पानी की कमी न होने दें.
  • खाद्य पदार्थों को हमेशा ढक कर ही रखें.
  • अधिक गरिष्ठ भोजन करने से परहेज करें.
  • अपने आसपास के वातावरण को स्वच्छ रखें.

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