नवजात शिशु को कैसे कपड़े पहनाने चाहिए ?

new born baby ke kapde

नवजात शिशु बहुत नाजुक होते हैं, इसलिए पहले दादी – नानी की हेल्प जरूरी होती थी. लेकिन आज अधिकतर परिवार अपने बड़ो से दूर रहते हैं और ऐसी स्थिति में उन्हें वह अनुभव का फायदा नहीं मिलता जो पहले महिलाओं को मिलता था. इसलिए आज इन सबके बारे जानकारी जरूर होनी चाहिए. आइये आज जानते हैं इसके बारे में कि शिशुओं को कैसे कपड़े पहनने चाहिए.

शिशुओं के बिछाने-ओढ़ने तथा पहनने के कपड़े सदा हल्के, कोमल, साफ और सुगन्धित होने चाहिये। उनको कभी तंग कपड़े न पहनाना चाहिये। इससे फेफड़े, हृदय और पाकाशय को हानि पहुँचती है, श्वास लेने में कष्ट होता है, भोजन ठीक से नहीं पचता और रक्त का संचार भी भली-भाँति नहीं हो सकता। साथ ही अत्यन्त ढीले कपड़े पहनाना भी अच्छा नहीं, क्योंकि इससे उनके हाथ-पाँव उलझ जाते है।

निद्रावस्था में शिशु के मुख को नहीं ढकना चाहिये, जिससे दुर्गन्धयुक्त वायु भीतर न रुक सके। कोट के बटन सोते समय खोल देने चाहिये और यदि गले में कोई रुमाल आदि बँधा हो तो उसको भी खोल देना चाहिये।

बच्चों को जाड़े के दिनों में गरम और काले रंग के कपड़े, गर्मी तथा बरसात में ढीले तथा श्वेत रंग के कपड़े और बसन्त-ऋतु में दोहरे अधरंगे हल्के रंग के कपड़े पहनायें। चटकीले और रंग-बिरंगे कपड़े पहनाने की आदत बच्चों को नहीं डालनी चाहिये।

छोटे बच्चों के ओढ़ने-बिछाने के कपड़े सदा साफ और नये होने चाहिये | यदि सदा नये कपड़े न मिल सकें तो मल-मूत्र लगे हुये कपड़ों को तुरन्त धोकर साफ करके सुखा दें और सूख जाने पर औषधियों की धूप देकर काम में लायें। बच्चों के गन्दे कपड़ों को बिना धोये नहीं बिछाना चाहिये। इससे अनेक रोग होने का डर रहता है।

शिशुओं के ओढ़ने-बिछाने के कपड़ों को सदा औषधियों की धूप देते रहना चाहिये। धुप बनाने की विधि यह है-

सरसों, अलसी, हींग, गूगल, वच, चोरक, क्षीरकाकोली, गोलोचन, बालछड़, अशोक की छाल, रोहिणी इन चीजों के साथ घी  मिलाकर काम में लायें। इस धूप से शिशु को संक्रामक व्याधि नहीं होती है।

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