शिशु की बीमारियों की पहचान व घरेलू इलाज Bachcho Ki Bimari Ka ilaj Hindi

Dadi Maa Ke Nuskhe For Babies in hindi language.

माता-पिता के लिए अकसर यह पता लगाना मुश्किल हो जाता है कि उन का नन्हा कब बीमार पड़ गया | शिशु बेचारा तो अपनी तकलीफ बता नहीं पाता, इसलिए आप को ही बीमारी के लक्षणों की जानकारी हासिल कर उन पर नजर रखनी होगी, इसलिए अपने अंतर्ज्ञान पर भरोसा करना सीखें और जैसे ही आप को बच्चे की सेहत में कुछ गड़बड़ दिखने लगे, वैसे ही किसी डाक्टर से सलाह लेने में संकोच न करें |

यहां बच्चों की कुछ आम बीमारियों के बारे में जानकारी दी जा रही है तथा उन से निबटने का तरीका भी बताया जा रहा है:

1. सर्दी-जुकाम होने पर

सर्दीजुकाम के जानेपहचाने लक्षण गले में खराश और बहती नाक एक ऐसे वायरस के कारण पैदा होते हैं, जिस पर एंटीबायोटिक दवाओं का असर नहीं पड़ता, इसलिए जब तक स्वयं शरीर का प्रतिरक्षा तंत्र (डिफेंस मैकेनिज्म) उस वायरस का मुकाबला करने के योग्य नहीं बन जाता, तब तक दवाएं उस का कुछ नहीं बिगाड़ पातीं |

ऐसे में क्या करें

शिशुओं को सर्दीजुकाम से ज्यादा परेशानी वास्तव में नाक बंद होने से होती है, क्योंकि ऐसे में दूध पीते समय या सोते समय सांस लेना मुश्किल हो जाता है, इसलिए अपने डाक्टर से शिशु की बंद नाक खुलवाने का तरीका जान लें ताकि आप का शिशु कम से कम आसानी से सांस तो ले सके |

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2. दस्त होने पर

इन की निशानी बारबार पतला या बदरंग मल त्याग होना है | अगर इस के साथ उलटी, बुखार या भूख खत्म हो जाने की शिकायत भी हो तो इस से शरीर का पानी खत्म होने लगता है, जो जानलेवा भी सिद्ध हो सकता है |

क्या करें

तत्काल डाक्टर की सलाह लें | मगर इस बीच शिशु को डीहाइड्रेशन (शरीर में पानी की कमी) से बचाएं | इस के लिए उबाल कर ठंडे किए गए पानी में नमक और चीनी की 1-1 चुटकी मिला कर बनाया घोल शिशु को पिलाती रहें |

3. खांसी होने पर

खांसी के जरिए शिशु शरीर के भीतर होने वाली किसी भी प्रकार की चुभन या उत्तेजना को दूर करने की कोशिश करता है | खांसी सूखी भी हो सकती है और बलगम वाली भी |

क्या करें

सूखी खांसी को दबाने के लिए डाक्टर द्वारा बताई गई दवा की शीशी घर पर ही रखें, लेकिन बलगम वाली खांसी को दबाया नहीं जाना चाहिए, क्योंकि वह शिशु के फेफड़ों में अटके बलगम को बाहर निकालने का काम करती है | इस के लिए आप डाक्टर से पूछ कर एक्स्पैक्टोरेंट दवा दे सकती हैं ताकि बलगम तेजी से निकल कर खत्म हो जाए |

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4. बुखार होने पर

एक खास सीमा को पार करने के बाद बुखार 104-105 डिग्री फैरेनहाइट से आगे न बढ़ने पाए |

क्या करें

बुखार में तापमान घटाने का एक आसान तरीका है, शिशु के बदन को गीले स्पंज या कपड़े से पोंछना | इस के लिए शिशु को वाटरप्रूफ शीट के ऊपर तौलिया बिछा कर उस पर लिटा दें | फिर स्पंज या मुलायम कपड़े (फ्लैनल) को सामान्य तापमान वाले पानी में डुबो कर निचोड़ लें और उस से शिशु के मुंह, बदन तथा हाथपैरों को पोंछ दें |

हर 10 मिनट बाद तापमान जांचती रहें और जब वह 102 डिग्री तक आ जाए तो स्पंजिंग करना बंद कर दें | स्पंजिंग के लिए ठंडे पानी का इस्तेमाल न करें | स्पंजिंग के बाद शिशु को अच्छ तरह पोंछ लें | अगर बुखार फिर चढ़ता है, तो स्पंजिंग को दोहरा सकती हैं |

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