एडीज मच्छर की देन है – डेंगू Aedes Machhar ki Den hai – Dengue

बारिश की बूंदों की आहट के साथ ही तीक्ष्ण गर्मी से राहत मिलती है. मानसून के बाद मौसम जब फिर से करवट लेता है तो ठंडी हवाओं की मीठी चुभन लेकर आता है. परंतु बदलते मौसम के इन खुशनुमा पलो में छिपी है कई बीमारियां. इस बदलते मौसम में पनपता है एडीज मच्छर जो फैलाता है जानलेवा डेंगू बुखार है(Dengue fever is a deadly disease).

डेंगू संक्रामक रोग है जो एडीज इजिप्टी मच्छर के काटने से होने वाला वायरल इंफेक्शन है( Dengue viral डेंगू के मच्छर फैलने का मुख्य कारण होता है आपके घर आदि के आसपास जमा गंदा पानी. वक्त रहते अगर इस बीमारी का इलाज न किया जाए तो यह रोगी के लिए प्राण घातक साबित हो सकता है. डेंगू होने पर रक्त में प्लेटलेट्स की संख्या में कमी आ जाती हैं. रक्त में इनकी संख्या कम होने पर शरीर के अंदर ही खून बहने लग जाता है. व्यस्कों के मुकाबले बच्चों में यह रोग अधिक तीव्रता से फैलता है क्योंकि बच्चों की रोग प्रतिरोधक प्रणाली व्यस्को की तुलना में कमजोर होती है.

एडीज मच्छर के काटने पर डेंगू के लक्षण Aedes Machhar ke katne par Dengue ke Lakshan

डेंगू से बचाव के लिए सर्वप्रथम उसके लक्षणों के बारे में जानकारी होना जरूरी है (Dengue ke Lakshan ki Jaankari) . आमतौर पर इस बीमारी के लक्षण अन्य बीमारियों के समान होते हैं. इस कारण शुरुआत में डेंगू के संक्रमण को पहचानना मुश्किल हो जाता है

  • तेज बुखार का बार बार आना Tej Bukhar ka bar bar Aana
  • मांसपेशियों तथा जोड़ों में दर्द, पीठ, कमर, गर्दन की हड्डियों में दर्द Haddiyo me Dard
  • सिर में जोर का दर्द Sar me Jor ka Dard
  • उल्टी का बार बार आना Ulti ka Baar Baar Aana
  • जी घबराना Gee Ghabrana
  • आंखों में जलन होना Aankho me Jalan Hona
  • दस्त लगना Dast Aana
  • प्रकाश या रोशनी सहन न होना Prakash Sahan Na Hona
  • त्वचा पर लाल रंग के चकत्ते होना Skin pe Lal Rang ke Chaktey Hona
  • रोगी का शरीर ठंडा पड़ जाना Rogi ka Sharir Thunda Pad Jana
  • शरीर में कपकपी होना Sharir me Kapkapi Hona
  • कमजोरी का का अनुभव होना Kamjori ka Anubhav Hona
  • भूख न लगना Bhuk Na Lagna
  • अपज की समस्या Apaj ki Samsya
  • रक्तचाप का घट जाना Blood Pressure ka Ghat Jana
  • चक्कर का बार बार आना Chakker ka Bar Bar Aana

डेंगू की गंभीर स्थिति में अन्य घरेलु लक्षण Dengue ki Gambir Sthiti me Anya Lakshan

  • पेट में जोर का दर्द होना Pet me Jor ka Drad Hona
  • पेशीगुल Peshigul
  • लिवर में फ्लूइड्स जमा होना Liver me Fluid ka jama hona
  • रक्त में प्लेटलेट्स के स्तर में कमी आना Blood me Platelet ke Ster me Kami Aana
  • रक्त का बहना Blood Ka Bahna
  • त्वचा का रंग पीला हो जाना Skin ka Rang Peela ho Jana
  • नाड़ी का सुस्त पड़ जाना Naadi ka Sust Pad Jana
  • सांस लेने में दिक्कत Saans Lene Me Dikkat
  • बहुत जयादा प्यास लगना Bahut Jyada Pyas Lagna
  • रोगी का उदास हो जाना Rogi Ka Udas Ho Jana

एडीज मच्छर के काटने पर डेंगू के घरेलु उपचार Aedes Machar ke katne par Dengue ke Gharelu Upchar

डेंगू में उपद्रवों से उपचार  Dengue me Updravo  se Upchar रोग में उसके उपद्रव बड़े मारक होते हैं। अतः उपद्रव के साथ-साथ चिकित्सा न कि जाए तो रोगी की मृत्यु हो जाती है. अतः रोग की गंभीर स्थिति में निम्न लक्षणों पर निम्नलिखित चिकित्सा दे.

रक्त स्त्राव होने पर डेंगू  का उपचार  Blood ke Bahne Par  : डेंगू के चकत्तो, नाक, मुंह और मसूड़ों से रक्त आने पर व रक्त का अंत स्त्राव होने पर, प्लेटलेट्स के कम होने पर स्वर्णवसंतमालती रस, कहरवापिष्ट, अमृतासत्व प्रवालपिष्टी, स्फटिका भस्म, ताक्यादिलौह का प्रयोग गिलोय स्वरस और मधु से करें.

तीव्र बुखार होने पैर इलाज   Tej Bukhar Hone Par Ilaj   : जयमंगल रस, शीतोशु रस, हिंगुलेश्वर रस, गोदन्ती भस्म मधे से दे.

उल्टी तथा जी घबराने पर  Ulti Tatha Jee Ghabrana  : जहरमोरा पिष्टी, छर्दिरिपुरस, कपूर काचरी चूर्ण दे, बर्फ चूसाएं.

हिचकी अधिक आने पर  Hichki Adhik Aana : मयूरचंद्रिका भस्म, पिप्पली चूर्ण मधु से दे.

अनिद्रा ब्रह्रीवटी (बृहद), निद्रायोग तगरादिक्वाथ से दें, महानारायण तेल सिर में मले.

पीठ, कमर, गर्दन और जोड़ों में तेज दर्द होने पर उपचार Peeth, Kamer, Jodo Aur Garden me Tej Dard  :  वृहद वात  चिंतामणि रस, हिंगुलेश्वर रस, आमवात प्रभाथिनी वटी, विषमुष्टि वटी, महारास्नादी क्वाथ से दे. अन्य उपद्रवों की तात्कालिक चिकित्सा रोग लक्षणानुसार उपद्रवों के शमन तक करें.

डेंगू फीवर या दंडक ज्वर Degu Fever ya Dundak Jwer डेंगू को आयुर्वेद में दंडक ज्वर कहा गया है, अस्थि भंजन ज्वर भी इसी का नाम है :

अस्थि संधि रुजास्तीवा दंडाछतीकृता इव.

चिंर संधिरुजा सन्ति संज्ञेयो दंडक ज्वर सिन्धांत निदानम् ..

वात प्रधान होने के कारण वातज सन्निपात ज्वर व पेशियों, जोड़ो, हाथ, पैर, कमर की हड्डियों में तेज दर्द होने के कारण इसे हड्डी तोड़ बुखार भी कहते हैं.

रक्तष्टीवी सन्निपात : रक्त स्त्राव, ज्वर, डेंगू का गंभीर व घातक प्रकार है जिसमें त्वचा के चकत्तो, नाक, मुंह आदि से खून निकलने लगता है व आमाशय, अन्य मार्ग व गर्भाशय से अंदरुनी रक्त स्त्राव भी हो सकता है. खून के निकलने से प्लेटलेट्स की कमी होने लगती है जिससे रोगी की मृत्यु भी हो सकती है.

ज्वरहर स्वानुभूत पंच ब्रह्मास्त्र

  • सुदर्शनघन वटी (स्वानुभूत योग) से उपचार Sudarshanghan Vati Se Upchar    : महासुदर्शनघन 100 ग्राम, सौंठ 30 ग्राम, गोदंती भस्म 15 ग्राम, 10 ग्राम शुद्ध कुचला, 10 ग्राम शुद्ध स्फटिका, भावना हरसिंगार 200 मिलीग्राम की मात्रा में लें. इन सभी को मिलाकर गोली बना लें. दिन में 2-3 बार गोलियों का पानी के साथ सेवन करें. यह सभी प्रकार के ज्वरों में सुदर्शन चक्र की भांति ज्वर नाशक का कार्य करता है.
  • शीतांशु रस से इलाज   Shitansu Juice se Ilaj   : शु. मनशिला, शु. हड़ताल 120-120 ग्राम, सौंठ, मिर्च, पीपल 80-80 ग्राम, मोम स्वरस की भावना देकर गोली बना लें. दिन में 2 बार 1-1 गोली का सेवन करें. इसके सेवन से अधिक पसीना आता है जिससे बुखार का तापमान कम होता है. सुदर्शनघन वटी और शीतांशु रस दोनों की 1-1 गोली का सेवन करने से तत्काल ही सकारात्मक फल मिलता है.
  • ज्वर संहार से उपचार Jwer Sanhar se Upchar  ; गोदंती भस्म, शुभ्रा भस्म, अतीस, धतूरा बीज, गेरू, सोडा बाई कार्ब सब समभाग तुलसी पत्र स्वरस की भावना देकर गोलियां बना लें. दिन में दो बार 1-1 गोली ले. यह ज्वर में होने वाली बेचैनी से राहत देता है.
  • नीम ज्वरहर के फायदे Neem Jwerhar ke Fayde  : नीम पत्र 200 ग्राम, त्रिफला, त्रिकूट 60-60 ग्राम, काला नमक, सेंधा नमक, विड् नमक, संजीक्षार, भवक्षार 20-20 ग्राम, अजवाइन 100 ग्राम भावना गुरुची स्वरस गोलियां बना ले. इसका सेवन ज्वर की सभी अवस्था में लाभप्रद होता है. नीम के फायदे
  • स्वर्ण वसंत मालती रस से होता है फायदेमंद Swan Vasant Malti Rus se Hota hai fayda   : 1 गोली और ताम्यादि लौह 2 गोली, दिन के 2 बार दूध से दें. इससे प्लेटलेट्स शीघ्र बढ़ते हैं, कमजोरी दूर होती है व ज्वर के उपद्रवो से रक्षा मिलती हैं.

पथ्य क्या करे : में गिलोय स्वरस, अनार स्वरस, अंगूर, मौसमी, गो दुग्ध, अन्य दुग्ध सेवन करें. मच्छर नाशक स्प्रे व धूप का प्रयोग करें. माहेश्वर धूप गंधक, राल, लोबान, अजवाइन, नीम पत्र, गुग्गुल, कपूर का धूप देना उत्तम है. इससे शरीर, घर, वातावरण में कीटाणु नष्ट हो जाते हैं, स्वास्थ्य की सामूहिक रक्षा होती है. डेंगू एक खतरनाक रोग जरूर है परंतु यह लाइलाज नहीं है. इस बीमारी से बचने का तरीका सावधानियों का पालन करना है.

डेंगू के अन्य घरेलु आयुर्वेदिक उपचार Dengue ke Anya Gharelu Upay

पपीते की पत्तियों से उपचार Papitey ki Patiyo se Upchar : डेंगू के उपचार में पपीते की पत्तियां अत्यंत प्रभावशाली होती है. इसके लिए पहले पत्तों को साफ पानी से धो लें. फिर इन्हें पीस कर इनका जूस निकाल लें. दिन में 2 बार 10 मिली. की मात्रा में इसका सेवन करना लाभप्रद होता है. 5 से 12 साल की उम्र के बच्चो को दिन में 2 बार 2.5 मिली. की मात्रा में इस जूस का सेवन करना चाहिए. पपीता खाने के फायदे 

गिलोय से उपचार Giloy se Upchar : आयुर्वेद विशेषज्ञों के अनुसार गिलोय एक ऐसा रसायन है जो रक्तशोधक, ओजवर्धक, हृदयरोग नाशक और लीवर टॉनिक भी है. डेंगू में गिलोय रामबाण होता है. गिलोय के पत्तों के रस में तुलसी के पत्तों का रस मिला लें. डेंगू के शुरुआती चरण में इसका सेवन लाभदायक होता है. इससे शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है और रक्त में प्लेटलेट्स का स्तर भी बढ़ता है.

पपीते की पतियों से उपचार Papite ki Patiyo se Upchar : डेंगू के उपचार में पपीते की पत्तियां अत्यंत प्रभावशाली होती है. इसके लिए पहले पत्तों को साफ पानी से धो लें. फिर इन्हें पीस कर इनका जूस निकाल लें. दिन में 2 बार 10 मिली. की मात्रा में इसका सेवन करना लाभप्रद होता है. 5 से 12 साल की उम्र के बच्चो को दिन में 2 बार 2.5 मिली. की मात्रा में इस जूस का सेवन करना चाहिए. पपीता खाने के फायदे 

बकरी का दूध है लाभदायक Bakri ka Milk hai Labhdayak : अपने औषधीय गुणों के कारण डेंगू के उपचार में बकरी का दूध बहुत लाभ करता है. इसमें शरीर के लिए आवश्यक फोलिक एसिड मौजूद होता है. इसके सेवन से शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली मजबूत होती है जिससे डेंगू के संक्रमण से लड़ने में मदद मिलती हैं.

सेब का रस है फायदेमंद Apple juice hai Faydemand : यदि रोगी को बार बार उल्टी हो रही हो तो उसे सेब के रस में कुछ बूंदे नींबू के रस की मिलाकर पिला दे. इससे उल्टियां बंद हो जाएगी और रोगी को राहत मिलेगी. सेब खाने के फायदे

डेंगू में अनार का जूस के फायदे Dengue me Anar ke Juice ke Fayde : अनार के जूस से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होती है. इसके सेवन से शरीर में नए रक्त का निर्माण होता है और प्लेटलेट्स की संख्या भी बढ़ती है. डेंगू से पीड़ित व्यक्ति को रोजाना 2 बार अनार के रस का सेवन करना चाहिए. अनार खाने के 11 फायदे 

संतरा के गुण Santara ke Gun : डेंगू के रोगी को दिन में 2-3 संतरे के फलों का सेवन करना चाहिए. इससे शरीर को ऊर्जा मिलती है. यह पाचन क्रिया को मजबूत बनाता है. संतरे में मौजूद विटामिन की मदद से शरीर में एंटीबॉडी का भी निर्माण होता है जिससे डेंगू बुखार जल्दी ठीक होता है. संतरा खाने के फायदे

डेंगू बुखार होने पे रखे ये सावधानियां Dengue Bukhar Hone pe Rakhe ye Savdhaniya

कुछ सावधानियां रखने से डेंगू के संक्रमण से बचा जा सकता है.

  • घर में व आसपास गंदा पानी एकत्रित न होने दें व घर को साफ रखें.
  • यदि घर में बर्तनों में पानी भर कर रखा है तो उसे ढककर रखें. खुला न छोड़ें.
  • सोते समय मच्छरदानी का प्रयोग करें.
  • संतुलित आहार ले.
  • दूषित स्थानों पर मिल रहे भोज्य पदार्थों का सेवन न करें.
  • घर की खिड़की के पास में तुलसी का पौधा लगाना चाहिए. यह मच्छरों को पनपने से रोकता है.
  • आवश्यक मात्रा में तरल पदार्थों का सेवन करें.
  • ऐसे कपड़े पहने जो पूरे शरीर को ढक सके.
  • मॉस्क्यूटो रिपेलैंट क्रीम का इस्तेमाल करें.

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