डिप्रेशन से बचने के उपाय Depression Se Bachne Ke Upay In Hindi

depression ka desi ilaj in hindi

यह दौर बदलाव का है और वह भी बहुत तेज गति से | खास तौर से भारत में पिछले दो दशकों में ही आर्थिक उदारीकरण और ग्लोबलाइजेशन के असर के चलते रहन-सहन से लेकर सोचने-समझने के तौर-तरीके और सामाजिक मूल्यों-मान्यताओं तक में जो व्यापक परिवर्तन हुए हैं, वे किसी को हैरत में डाल देने के लिए काफी हैं | बदलाव की प्रक्रिया में जिन लोगों ने समय के साथ अपना कदमताल मिला लिया वे सफल हो गए, लेकिन जो इसमें विफल रहे उनके लिए मुश्किलें बढ़ गईं |

अब अवसरों की कमी, कड़ी प्रतिस्पर्धा और तेजी से बदलती स्थितियों के चलते आदमी कई बार अपने आप को असमंजस की स्थिति में फंसा पाता है | अब अगर वह कोशिश करके जैसे-तैसे इस प्रभाव से उबर जाता है तब तो ठीक, वरना धीरे-धीरे वह तनाव, हताशा और अंततः डिप्रेशन का शिकार होता चला जाता है |

इसमें कोई दो राय नहीं कि उपभोक्तावादी संस्कृति का प्रभाव बढ़ने के नाते भौतिकता की दौड़ में सफलता या विफलता ही किसी के सुख या दुख का आज सबसे बड़ा कारण है | लोगों के डिप्रेशन का शिकार होने का भी यह एक प्रमुख कारण है, लेकिन इसका यही एकमात्र कारण नहीं है | युवाओं के लिए किसी परीक्षा या प्रेम में विफलता, समाज में खुद को दूसरों की तुलना में कमजोर महसूस करना, अपने को समय के अनुरूप न ढाल पाना आदि भी इसकी वजहें हो सकती हैं |

डिप्रेशन एक ऐसी स्थिति है जिसका शुरुआती दौर में तो शरीर पर कोई असर नहीं दिखता, लेकिन धीरे-धीरे यह आदमी के पूरे व्यक्तित्व पर छा जाती है और उसे नष्ट कर देती है | फिर इसका असर शारीरिक स्वास्थ्य पर भी पड़ने लगता है और अंततः इसका शिकार व्यक्ति जीवन से निराश होकर आत्महत्या तक कर बैठता है | इसलिए यह जरूरी है कि पहले तो ऐसे उपाय अपनाए जाएं जिससे इसका शिकार ही न होना पड़े | इसके बावजूद अगर कभी हो ही जाएं तो इसके उपचार की प्रक्रिया तुरंत शुरू कर देनी चाहिए |

आइए जानें ऐसे उपाय जो आपको डिप्रेशन का शिकार होने से बचा सकते हैं |

व्यस्त रहें, मस्त रहें

जब भी आप किसी कारण से उदासी की ओर बढ़ें या आपको कोई नकारात्मक भावना घेर रही हो तो सबसे पहला काम यह करें कि उस विषय पर सोचना ही छोड़ दें | इसका सबसे बढ़िया तरीका यह है कि आप इतने व्यस्त हो जाएं कि उस तरफ ध्यान ही न जाए | लगातार ऐसी गतिविधियों में संलग्न रहें जो आपके लिए प्रेरणादायक साबित हों |

ऐसे काम करें जिनमें आपकी निजी दिलचस्पी हो | जिन्हें करने में आपको मजा आए | मसलन किताबें पढ़ना, संगीत सुनना, खेलकूद में शामिल होना, घुमक्कड़ी, लिखना या चित्रकारी करना आदि |

ऐसे सैकड़ों काम हैं जिनमें अगर एक बार आप खो जाएं तो फिर कितना समय बीत गया, इसका पता भी न चले | साथ ही इनमें एक बार मशगूल हो जाने के बाद नकारात्मक भावनाएं आपको छू भी न सकें |

जरुरत है तो सिर्फ एक बात की और, वह है अपनी रुचियों की ठीक-ठीक पहचान करने की | अपनी रुचियों को पहचानें और ऐसे काम बिलकुल न करें जिन्हें करना आप पसंद न करते हों | जब आप एक बार अपनी रूचि की सही पहचान कर लें तो फिर उसी दिशा के अनुरूप जीवन का लक्ष्य भी निर्धारित करें |

फिर इस बात का कोई मतलब नहीं रह जाएगा कि कोई स्थिति आपके लिए कितनी कठिन होती है | फिर मुश्किलें हल करने के तरीके भी आप खुद निकाल लेंगें | अच्छे-बुरे जैसे भी दिन आएंगे उन्हें आप झेलने में समर्थ होंगे और हर बाधा को पार भी कर लेंगे |

इसे भी पढ़ें – महिलाएं 40 के बाद डिप्रेशन का शिकार क्यों 

अंधेरे से बचें

यह तो आपने महसूस ही किया होगा कि प्रकाश की उपस्थिति में नींद आसानी से नहीं आती है | जबकि अंधेरे में इसके लिए कोई खास कोशिश नहीं करनी पड़ती है | ऐसा क्यों होता है, कभी सोचा है आपने | दरअसल इसकी वजह एक हार्मोन है | मेलाटोनिन नाम का यह हार्मोन हमें आलस्य, उदासी, चिड़चिड़ेपन, अनमनेपन या हताशा की ओर ले जाने के लिए जिम्मेदार होता है |

जब आप सामान्य स्थितियों में सोना चाहते हैं तब सबसे पहले तो यह आपके शरीर के तापमान को कम करता है | फिर यह आपको पहले सुस्ती, फिर शांति और इसके बाद नींद में ले जाता है, लेकिन जब आप चिंता या तनाव से ग्रस्त होते हैं तो यही मेलोटेनिन आपको निराशा की भावना से भरने लग जाता है |

जहां सामान्य स्थितियों में यह आपको शांति और राहत देता है, वहीं तनाव की स्थिति में यह आपके भीतर अनावश्यक रूप से बेचैनी, आशंकाएं, भय और हताशा उत्पन्न करता है |

इसलिए जब आप डिप्रेशन का शिकार खुद को महसूस कर रहें हों तो कभी भी अंधेरे में न रहें | पूरे प्रकाश में रहें | बल्कि कोशिश यह करें कि ऐसी जगह रहें जहां भरपूर प्राकृतिक प्रकाश हो | यानी घर में बैठे या लेटे रहने के बजाए बाहर निकल कर घूमें-टहलें |

अपने लिए समय निकालें

व्यस्त रहने का यह अर्थ बिल्कुल न लें कि आप अपने आपको भूल ही जाएं | अपने व्यावसायिक या पारिवारिक कामकाज करते हुए अपने स्वास्थ्य का भी पूरा ख्याल रखें | साथ ही अपने रचनात्मक शौक भी पूरे करते रहें | कभी मधुर संगीत सुनें या अपनी पसंद की किताबें पढ़ें | चाहें तो कहीं घूम आएं | या जो कुछ भी आपका शौक हो उसे पूरा करें |

हां, शौक पूरा करते समय यह ध्यान जरुर रखें कि आपका शौक रचनात्मक हो | कोई ऐसा शौक पूरा करने की कोशिश न करें, जो आपकी ऊर्जा को नकारात्मक दिशा दे |

नहाने में वक्त थोड़ा ज्यादा लगाएं | हो सके तो देर तक शावर के नीचे बैठें | इससे ताजगी मिलेगी | जरुरत महसूस हो तो थकान मिटाने के लिए मसाज भी करा सकते हैं | इससे आपको शारीरिक तनाव से मुक्ति मिलेगी और जब शरीर तनावमुक्त होगा तो मन के तनावमुक्त होने के मार्ग खुलेंगे | इसलिए डिप्रेशन को दूर भगाने के लिए मौज-मस्ती जरुरी है |

संतुलित आहार लें

डिप्रेशन अपने मूल रूप में मानसिक स्थिति है और मन बहुत हद तक आपके शरीर पर निर्भर है | शरीर स्वस्थ बना रहे, इसके लिए संतुलित आहार सबसे ज्यादा जरूरी है | ऐसी स्थिति में नशीले द्रव्य तो बिल्कुल ही न लें | बहुत ज्यादा मीठी चीजों से भी बचें | चीनी और कैफीन या एल्कोहल थोड़ी देर के लिए तो आपका ऊर्जा स्तर बढ़ाती जरुर हैं, लेकिन बाद में ये चीजें आपको तनाव और हताशा की ओर ले जाती हैं | इसलिए ऐसी चीजों से बचें |

मेलजोल बढाएं

यह तो आप जानते ही हैं कि अकेलापन अपने आपमें कई रोगों की जड़ है | अकेलापन दो स्थितियों में भाता है | एक तो तब, जबकि आप कोई ऐसा रचनात्मक कार्य करना चाहें जिसमें पूरी एकाग्रता और शांति की जरूरत हो और दूसरी तब, जब आप लोगों के सवालों से बचना चाहते हों | लेकिन दूसरी स्थिति में अकेले कभी न पड़ें | यह अकेलापन जिंदगी से पलायन तक के लिए मजबूर कर सकता है | जबकि अगर आप समाज में हों तो सवालों के अलावा आपको अपने कई तरह के संशय के जवाब भी मिल सकते हैं | इसलिए अकेले पड़ने से बचें | लोगों से मिले-जुलें और मस्त रहें |

Be the first to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published.


*