एग्जिमा का घरेलू उपचार Eczema Ka Gharelu Upchar

हर मौसम के अनुकूल हम त्वचा की पूर्ण रक्षा करते हैं. संवेदनशील होने के कारण इसे मौसमानुसार कई प्रकार के संक्रमणों का सामना करना पड़ जाता है. त्वचा के उत्तेजक, दीर्घकालीन विकारों में से एक है एग्जिमा. एलर्जी, कमजोर रोग प्रतिरोधक प्रणाली आदि एक्जिमा होने के मुख्य कारण होते हैं. यह रोग आपकी कोमल त्वचा को नुकसान पहुंचा सकता है, इसलिए जरूरी है कि इसका शीघ्र उपचार किया जाए (Eczema Rog Skin ko se Sambandhit rog hai).

कभी किसी मेकअप प्रोडक्ट की एलर्जी तो कभी संक्रमण ऐसे कई कारक होते हैं जो आपकी त्वचा के लिए घातक साबित हो सकते हैं. किसी व्यक्ति को उस चीज से एलर्जी के कारण एग्जिमा का संक्रमण हो सकता है तो वही ऐसा भी संभव है कि दूसरे व्यक्ति पर उस चीज का कोई प्रभाव न पड़े. एग्जिमा में त्वचा शुष्क हो जाती है (Eczema me Skin Shusk ho Jati hai).

इसमें त्वचा की ऊपरी सतह की नमी कम हो जाती है जिसके परिणामस्वरुप त्वचा की कोई सुरक्षा नहीं रहती है. इससे रोगाणुओं के लिए त्वचा के भीतर प्रवेश करना आसान हो जाता है. रोगाणुओं के त्वचा में प्रवेश करने से इन्फेक्शन का खतरा बढ़ जाता है. गंभीर अवस्था में त्वचा के प्रभावित हिस्से से रक्त स्त्राव भी हो सकता है. कुछ में पस का भी निर्माण हो जाता है (Eczema Skin ki Gambir Samsya hai).

एग्जिमा तीन प्रकार का होता है Eczema 3 Prakar ka hota hai

पहली अवस्था – तीव्र First Stage – Intense तीव्र अवस्था में एक्जिमा पादतल और हथेली को छोड़कर कहीं भी प्रकट हो सकता है. इसमें रोगी को बहुत खुजली होती है व प्रभावित स्थान में सूजन आ जाती है. रोगी की तवचा पर लालिमा आ जाती है. त्वचा पर हुए छालों से पस का स्त्राव होता है.

दूसरी अवस्था – मध्यम Second Stage – Medium मध्यम अवस्था में त्वचा के बाह्रा स्तर पर चकत्ते दिखाई देते हैं. इस अवस्था में प्रभावित स्थान पर लालिमा के साथ स्त्राव भी होता है. इसमें व्रण एक समूह के रूप में होते हैं. प्रारंभिक स्थिति में इसमें सूजन नहीं होती है परंतु स्पर्श करने पर रूखेपन की अनुभूति होती है. अत्यधिक स्त्राव की स्थिति को आद्र या वीपिंग एग्जिमा कहते हैं.

तीसरी अवस्था – जीर्ण Third Stage – Chronic होने के कारण धीरे धीरे अपनी ऊपरी सतह खोने लगती है. इस अवस्था को स्केली एक्जिमा कहते हैं. तवचा मे वित्तीय तत्व बढ़ने पर त्वचा की मोटाई बढ़ जाती है. समय रहते उपचार न करने पर जीर्ण एग्जिमा, चिरकालीन एग्जिमा में परिवर्तित हो जाता है.

एग्जिमा के क्या लक्षण होते है Eczema ke Kya Lakshan Hote hai

एग्जिमा अपने साथ कई लक्षण दर्शाता है. रोग की शुरुआत में ही इसके लक्षणों की पहचान होने से इसे रोका जा सकता है.

  • त्वचा की ऊपरी सतह पर व्रण का निर्माण होना
  • त्वचा पर खुजली और जलन होना
  • त्वचा की ऊपरी सतह पर रूखापन आ जाना, शुष्क हो जाना
  • व्रण से रक्त स्त्राव होना
  • समय रहते उपचार न करने पर पूरे शरीर पर चकत्ते उभर जाना
  • घाव से पस का स्त्राव होना
  • प्रभावित स्थान पर लालिमा आना

एग्जिमा के घरेलू उपचार Eczema ke Gharelu Upchar

एक्जिमा एक ऐसा रोग है जो किसी भी व्यक्ति के जीवन काल में एक से ज्यादा बार उसे पीड़ित कर सकता है. ऐसे में जरूरी है कि हम वह उपचार अपनाएं जिस का हमारे शरीर पर कोई नकारात्मक प्रभाव न पड़े.

एग्जिमा में चने के आटे के फायदे Eczema me Chane ke Aate ke Fayde कई बार हमें चेहरे पर उपयोग किए जाने वाले मेकअप प्रोडक्ट्स के कारण हुई एलर्जी से एग्जिमा होता है. इसके लिए चेहरे पर चने के आटे का उबटन लगाना फायदेमंद रहता है. प्रभावित स्थान पर चने के आटे का उबटन लगाने से सूजन और लालिमा में कमी आती हैं. Read More – गुड़ और चने का प्रयोग कर शरीर में खून बढ़ाएं

नीम से एग्जिमा का उपचार Neem se Eczema ka Upchar नीम में मौजूद गुण एक्जिमा के रोगाणुओं से लड़ने में समर्थ होते हैं. घाव पर नीम की पत्तियों का लेप लगाएं. सूखने पर इसे आराम से ठंडे पानी से धो ले. यह एक्जिमा में लाभप्रद होता है. शुष्क एवं आद्र एग्जिमा में नीम के पत्तों का लेप उपयोगी होता है. 50 ग्राम नीम के पत्ते और 50 ग्राम घी लेकर एक पात्र में गर्म कर ले. नीम के पत्ते काले होने तक गर्म करें. फिर मिश्रण को बारीक पीसकर लेप बना लें. ठंडा होने पर इसे प्रभावित स्थान पर लगाएं. यह त्वचा को नमी प्रदान कर राहत देता है. Read More – सेहत और सौंदर्य दोनों के लिए बहुत ही लाभदायक है नीम 

एग्जिमा में नींबू के लाभ Eczema me Nimbu ke Benefit नींबू आसानी से उपलब्ध होने वाली ऐसी औषधि है जो चर्म रोग में लाभदायक होती है. नींबू में नारियल का तेल मिलाकर लगाने से कुछ ही देर में खुजली में आराम मिलता है. Read More – नींबू खाने के फायदे

एग्जिमा का जैतून के तेल से इलाज Benefit ka jaitun ke Tel se Ilaj एक्जिमा से प्रभावित हिस्से पर रोगी को अत्यंत खुजली होती है. ऐसे में स्नान करने के तुरंत बाद जैतून का तेल लगाना प्रभावी उपचार होता है. शरीर पर जैतून का तेल लगाकर मालिश करने से रोगी को खुजली में राहत मिलती है.

खदरारिष्ट के फायदे khadirarishta ke Fayde आयुर्वेद की औषधियों में अनेकों रोगों से लड़ने के गुण होते हैं. एक्जिमा के उपचार में प्रयोग की जाने वाली आयुर्वेद की एक प्रभावी औषधि है खदरारिष्ट. 20 मिली. खदरारिष्ट को 20 मिली. पानी के साथ मिलाए. रोजाना भोजन के बाद दिन में 2 बार इसका सेवन करने से एक्जिमा में फायदा होता है.

एलोवेरा से एग्जिमा का उपचार Aloevera se Eczema ka Upchar एलोवेरा के प्रयोग से त्वचा चमकदार व मुलायम बनती हैं. एक्जिमा में खुजली वाली जगह एलोवेरा का जैल लगाएं. ऐसा 4-5 दिनों तक करने से राहत मिलती है. गंधक, सुहागा, सिंदूर मुरदाशंख एक एक भाग, कपूर आधा भाग, तिल तेल तथा मोम 10-10 भाग मिलाकर लेप लगाएं.

नारियल का तेल है गुणकारी Coconut ka Tel hai Gunkari नारियल का तेल त्वचा को नमी प्रदान करता है. त्वचा पर नारियल का तेल लगाने से त्वचा की शुष्की दूर होती है जिससे खुजली बंद करने में मदद मिलती है.

पंचवल्कल वृक्ष के पत्तों से इलाज Punchbalk Tree ke Patto se Ilaj एग्जिमा एक प्रकार का त्वचा रोग है अतः इसमें बाहृय चिकित्सा बहुत लाभप्रद सिद्ध होती है. जैसे प्रथम अवस्था में शीत रुक्ष गुण युक्त औषधि का लेप करना चाहिए जिसमें पंचवल्कल वृक्ष के पत्तों का लेप, पंचवल्कल अर्थात् आम, जामुन वट, पीपल आदि पेड़ के पत्तों को पीसकर लेप करें.

एग्जिमा में देसी घी है फायदेमंद Eczema me Desi Ghi Hai Faydemand अगर कभी रोगी को अचानक तीव्र खुजली होने लगे तो उस स्थान पर देसी घी लगाकर मालिश करें. घी से तुरंत ही खुजली से राहत पाने में मदद मिलती है.

खीरा है गुणकारी Khira hai Gunkari खीरा खाने में जितना स्वादिष्ट होता है उतना ही स्वास्थ्यवर्धक भी है. प्रभावित स्थान पर खीरे का रस लगाने से लाभ होता है.

एग्जिमा का चंदन से उपचार Eczema ka Chandan se Upchar चंदन का प्रयोग कई सौंदर्य प्रसाधनों में किया जाता है. यह त्वचा के लिए बहुत लाभकारी होता है. एक चम्मच चंदन के पेस्ट में एक चंदन कपूर मिलाकर लेप बना लें. इसे एक्जिमा से ग्रसित भाग पर लगाने से शीघ्र आराम मिलता है. यह जलन कम करने में भी सहायक होता है.

एक्जिमा जैसे रोग का समय रहते उपचार नहीं किया तो यह सामान्य रोग गंभीर व्याधि में परिवर्तित हो सकता है. आज के समय में चर्म रोग अधिक होते हैं, जिससे रोगी को परेशानी होती है. विभिन्न चिकित्सा पद्धति द्वारा उपचार लेने से भी कोई परिणाम नहीं मिलता है. ऐसी अवस्था को विचारकर आयुर्वेद के दृष्टिकोण से औषधि चिकित्सा, आहार-विहार पथ्य अपथ्य का पालन करने से एक्जिमा जैसा त्वचा रोग अवश्यमेव मिट जाता है.

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