गाजर खाने के फायदे Gajar Khane Ke Fayde In Hindi

गाजर खाने के फायदे Gajar Khane Ke Fayde In Hindi Language

गाजर खाने के फायदे Gajar Khane Ke Fayde In Hindi Language

गाजर एक सब्जी है | गाजर का जड़ वाला भाग ही खाया जाता है जो हमेशा जमीन के निचे उगता है | यह कई रंगों में पाई जाती है | गाजर का जूस या कच्ची दोनों रूप में खाना लाभदायक है | गाजर के रस में विटामिन ‘ए’, ‘बी’, ‘सी’, ‘डी’, ‘ई’, ‘जी’, और ‘के’ पाये जाते हैं । गाजर औषधीय रूपी भी प्रयोग में लायी जाती है | यहां पर हम कुछ विभिन्न प्रकार के रोग व गाजर द्वारा उसके उपचार में बता रहें हैं |

टी.बी. – गाजर का रस 500 ग्राम में समान बकरी का दूध मिलाकर मंद अग्नि पर पकावें | दूध मात्रा बाख जाने पर ठण्डा कर दिन में 2-3 बार सेवन कराने से लाभ होता है |

तिल्ली – बढ़ने पर गाजर का अचार बनाकर खायें |

खून में लाल रंग के कणों की कमी – खून में लाल रंग के कणों की कमी होने पर पावभर गाजर के रस में पालक का रस मिला लें, उसे पियें |

त्वचा का सूखापन (Dryness) – त्वचा का सूखापन दूर करने के लिए गाजर खायें |

स्तनों में दूध की कमी – स्तनों में दूध की कमी होने पर गाजर का रस पियें |

साँस में दुर्गन्ध – साँस में दुर्गन्धआती हो तो गाजर का रस, खीर का रस एंव पालक का रस- तीनों 100-100 ग्राम लेकर आपस में मिला लें | इस मिश्रण को पीने से साँस से दुर्गन्ध आना दूर हो जाता है |

मोटापा – मोटापा घटाने के लिए गाजर का रस पीते रहें |

नासिका एंव कुष्ठ के रोगों में – पावभर गाजर का रस एंव इतना ही पालक का रस, दोनों लेकर मिश्रित कर लें, यह मिश्रण पीयें |

पीलिया – पीलिया के रोगियों के लिए गाजर का रस, गाजर का सूप पीना लाभदायक है |

दंतरोग – में लगभग 70-75 ग्राम गाजर का रस प्रतिदिन पीयें | याददाश्त बढ़ाने (याद रखने की शक्ति कम होने पर, जल्दी ही भूल जाते हों) के लिए प्रतिदिन सुबह के समय 5-6 बादाम खाकर 100-125 ग्राम गाजर का रस लगभग 500 मिलीलीटर (आधा लीटर या आधा किलो) गौ दुग्ध (गाय के दूध) में मिलायें एंव इसे पी जायें |

सीने में दर्द – सीने में दर्द होने पर कुछ गाजरें उबालें, फिर उनका रस निकाल लें |

यकृत, पित्त आदि के रोगों में – थोड़ी-थोड़ी देर के बाद गाजर खायें क्योंकि गाजर खाने से यकृत को बल मिलता है |

ह्रदय की धड़कन तेज हो जाने, खून गाढ़ा हो जाने पर गाजर खायें |

हृदय की कमजोरी में प्रतिदिन प्रातः-सायं गाजर का रस पीयें |

संग्रहणी, अपच के दस्त, दस्त – में गाजर खायें |

चिकनी चीजें न पचती हो तो लगभग 300 ग्राम गाजर का रस एंव 175 ग्राम पालक का रस, दोनों मिला लें, इसे पीना लाभप्रद है |

पेट के कीड़े – लगभग 100-125 ग्राम गाजर का रस प्रतिदिन सुबह के समय खाली पेट लगभग 15 दिनों तक पीयें, पेट के कीड़े निकल जायेंगे |

विशेष – गाजर का रस पीने के स्थान पर कच्ची गाजर भी खा सकते हैं |

बड़ी आंत में सूजन – लगभग 175 ग्राम गाजर का रस, लगभग 150 ग्राम चुकंदर का रस एंव लगभग 160 ग्राम खीरा का रस, तीनो को मिलाकर पीयें |

शोथ, गुर्दे के रोगों – गुर्दे के रोगों में 2 चम्मच गाजर के बीज लगभग 250 ग्राम (1 गिलास) जल में उबालें, उस जल को रोगी को पिलाना लाभप्रद है |

गठिया, संधिवात – गाजर का रस, ककड़ी का रस एंव चुकंदर का रस तीनों सममात्रा में लेकर परस्पर मिला लें, इसे पीने से गठिया में लाभ होता है | यदि ककड़ी व चुकंदर- दोनों में से यदि एक भी पदार्थ नहीं है तो जो वस्तु हो उसी के रस में केवल ककड़ी या चुकंदर का रस मिला सकते हैं या केवल गाजर का रस भी पी सकते हैं |

डायबिटीज (मधुमेह) – गाजर के रस में ½ मात्रा में पालक का रस मिलाकर पीने से मधुमेह रोग से मुक्ति संभव है |

दृष्टि-क्षीणता – 1. नेत्रों की ज्योति कम हो तो समान मात्रा में पालक व गाजर का रस मिलाकर रोगानुसार नियमित रूप से पीते रहें | 2. रक्त में लाल कणों की कमी भी समाप्त हो जाती है | 3. नाक व गले की समस्त व्याधियों से मुक्ति संभव हैं |

बच्चों के दांत निकलना – जब बच्चों के दांत निकल रहे हों तो उसे कच्ची गाजर को कूट-छानकर रस निकालकर पिलाते रहने से दूध आराम से पच जाता है और दांत भी आसानी से निकल आते हैं | बच्चा हष्ट पुष्ट भी बनता है |

हिचकी, हिक्का – गाजर की जड़ को माँ के दूध में पीसकर, कपड़े से छानकर नस्य देने से हिचकी रुक जाती है |

गर्भस्राव – जिस महिला का गर्भ स्थिर न रह पाता हो, उन्हें चाहिए की गाजर के रस में समान बकरी का दूध मिला, मंद अग्नि पर दूध मात्र बचने तक पकाकर गर्भावस्था के प्रथम माह से ही आठवें माह तक नियमित प्रतिदिन, दिन में दो बार पीती रहें, इससे गर्भ पूर्ण होगा | बच्चा स्वस्थ, हष्ट-पुष्ठ गौरांग तथा विभिन्न चर्मरोगों से रहित पैदा होगा |

दाद, उकवत आदि त्वचा रोग – गाजर को कद्दूकस से कसकर थोड़ा आग पर सेकें, नमक मिलाकर रोगी स्थान पर पुल्टिस जैसे बांध दें | साथ ही रोगी को केवल गाजर और दूध ही का सेवन कराया जाये तो शीघ्र लाभ होगा |

रक्त-प्रदर, रक्तातिसार – 1. गाजर का रस तथा बकरी के दूध का दही 200-200 ग्राम मिला, मथकर प्रातः अथवा रोग की तीव्रता में प्रातः सायं पिलाने से स्राव बंद हो जाता है | 2. रक्तातिसार में 100 ग्राम गाजर के रस में समान भाग बकरी का दूध मिलाकर दिन में दो बार पिलाने से भी लाभ होता है |

पथरी – 1. पथरी, मूत्राशय की सूजन या पथरी निकालने के लिए गाजर के रस में चुकंदर, खीरा या ककड़ी का रस आवश्यकतानुसार (समभाग) मिलाकर पीना चाहिए | 2. गठिया, संधिवात या कटिशूल (कमर का दर्द) आदि में भी उक्त योग हितकारी रहता है |

धातु-दौर्बल्यता – पेशाब में सफेदी जाने की स्थिति में दिन में 2-3 बार गाजर का रस रोग-स्थिति के अनुसार पीते रहने से वीर्य-शक्ति बढ़ जाती है तथा मूत्र-मार्ग से श्वेत पदार्थ निकलना रुक जाता है |

हृदय की कमजोरी, हृदय-दौर्बल्य, धड़कन – गाजर भूभल में भून व छीलकर रातभर खुली हवा या ओस में रख, प्रातः उसमें मिश्री तथा केवड़ा या गुलाब-अर्क मिलाकर सेवन करते रहें | अथवा कच्ची गाजर का 100 ग्राम रस प्रातः सायं लेना चाहिए |

आग से जलने पर – गाजर पीसकर लगा देने से दाहकता शान्त हो जाती है |

पित्तशोथ – फुंसियों से युक्त पित्तशोथ हो तो गाजर की पुल्टिस में नमक मिलाकर बांधें |

दूषित व्रण – गाजर उबाल, पुल्टिस बनाकर बांधें | साथ ही कच्ची गाजर भी सेवन कराते रहने से कीड़े नष्ट हो जाते हैं |

स्तम्भन-शक्ति – ‘सेक्स पावर’ की आशातीत वृद्धि के लिए गाजर के ताजे हरे पत्ते चबाकर खाने चाहिए | पत्तों की सब्जी भी स्वादिष्ट व मैथुन-शक्ति बढ़ाने वाली होती है |

मासिक धर्म रुक जाना – गाजर के बीज 5 ग्राम, जल 250 ग्राम में आधा रहने तक उबालें | अविशिष्ट जल में शक्कर मिलाकर रोगिणी को 2-3 दिन तक पिलावें | रुका हुआ मासिक धर्म अपने स्वाभाविक रूप से पुनः प्रारम्भ हो जायेगा |

विशेष – गाजर के बीज किसी भी ‘बीज भंडार’ से प्राप्त किए जा सकते हैं |

दुधारू गाय को कच्ची गाजर खिलाने से वह मोटी हो जायेगी और बहुत अधिक दूध देने लगेगी |

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