बालों की समस्याएं एवं होम्योपैथिक उपचार Hair Problems and Homeopathic Treatment In Hindi

Home Remedy for hair fall hindi

बालों की समस्याएं एवं होम्योपैथिक उपचार Hair Problems and Homeopathic Treatment in Hindi

स्वस्थ एवं घने बालों का आपकी सुन्दरता में महात्वपूर्ण योगदान होता है। बढ़ती आयु में बालों का गिरना एक आम समस्या है। अधिकांश लोगों का उनके जीवनकाल में इस समस्या से सामना जरूर होता है। रोजाना 20-40 बाल गिरना एक सामान्य प्रक्रिया है। लेकिन इससे अधिक मात्रा में बालों का गिरना एक चिंता का विषय है। इसे कतई नज़रअदांज नहीं करना चाहिए और इसका समाधान सही समय पर कर लेना चाहिए जिससे की गंजेपन जैसी गंभीर समस्याओं से बचा जा सके। होम्योपैथिक एक प्राकृतिक चिकित्सा है। होम्योपैथिक दवाओं के उपयोग से बालों की किसी भी समस्या को जड़ से खत्म किया जा सकता है। इस चिकित्सा पद्वति के कोई साइड इफेक्ट नहीं यह पूर्णतः सुरक्षित है। बालों की समस्या सामान्यतः 20 से 30 की आयु में शुरू होती है। सामान्यतः बालों में होने वाले रोग निम्न प्रकार हैंः-

पैटर्न बाल्डनेस या एंड्रोजेनेटिक एलोपेसिया

इस समस्या को एंड्रोजेनेटिक एलोपेसिया भी कहा जाता है। यह एक अनुवांशिक समस्या है। यह महिलाओं एवं पुरूषों दोनों में पाई जाती है।

टेस्टोस्टेरान नामक हार्मोन महिला एवं पुरूष दोनों में पाया जाता है। टेस्टोस्टेरान हार्मोन का कुछ मात्रा में डाई-हाइडो-टेस्टोस्टेरान में बदलना एक सामान्य प्रक्रिया है क्योंकि यह टेस्टोस्टेरान को असरदार बनाने में मदद करता है लेकिन जब किन्ही कारणों से टेस्टोस्टेरान हार्मोन अधिक मात्रा में डाई-हाइडो-टेस्टोस्टेरान में बदलने लगता है तो यह बालों के रोमकूपों को संकुचित करके उनपर विपरीत असर डालता है जिस कारण बाल कमजोर होकर गिरने लगते हैं।

पुरूषों में एंड्रोजेनेटिक एलोपेसिया को मेल पैटर्न बाल्डनेस कहा जाता है। पुरूषों में टेस्टोस्टेरान की मात्रा महिलाओं की अपेक्षा अधिक पाई जाती है क्योंकि यह हार्मोन पुरूषों में प्रजनन अंगों के विकास के लिये मुख्य जिम्मेवार होता है इसलिये पुरूषों में एंड्रोजेनिक एलोपेसिया महिलाओं से अधिक पाई जाती है। मेल पैटर्न बाल्डनेस में पुरूषों की हेयरलाइन पीछे हटती जाती है।

महिलाओं में एंड्रोजेनेटिक एलोपेसिया को फीमेल पैटर्न बाल्डनेस कहा जाता है। महिलाओं में टेस्टोस्टेरान की मात्रा पुरूषों की अपेक्षा बहुत कम पाई जाती है। एस्ट्रोजेन नामक हार्मोन महिलाओं में प्रजनन अंगों के विकास के लिये मुख्य अनिवार्य होता है। एस्टोजेन की उपस्थिति के कारण महिलाओं में एंड्रोजेनेटिक एलोपेसिया का असर कम होता है क्योंकि एस्ट्रोजेन हार्मोन टेस्टोस्टेरान के असर को संतुलित करता है।

एलोपेसिया एरेटा

इसको स्पाट-बैल्डनेस भी कहा जाता है। यह एक आटोइम्यून डिसआर्डर है। इस में शरीर की कोशिकाएं स्वयं ही अपने बालों के रोमकूपों को नष्ट करने लगती हैं। इसमें सिर में सिक्के के आकार में चकत्ते हो जाते हैं और उन चकत्तों में से बाल पूरी तरह से गिर जाते हैं। यह रोग सबसें ज्यादा सिर एवं दाढ़ी के बालों को प्रभावित करता है। मानसिक तनाव एवं अनुवांशिकता इसके मुख्य कारण हैं।

रूसी का होना

इस समस्या का मुख्य कारण सिर की त्वचा से मृत कोशिकाओं का झड़ना हैं। वैसे त्वचा की कोशिकाएँ के मृत होने पर एक छोटी मात्रा मे उनका गिरना सामान्य हैं लेकिन जब वे ज्यादा मात्रा में गिरने लगते हैं तब ये खतरे की घंटी होती हैं। रूसी के कई कारण हो सकते हैं, जैसे शुष्क त्वचा, अक्सर पर्याप्त सफाई नही रखना, शैंपू का ज्यादातर उपयोग, सोरायसिस, एक्जिमा, बालों की देखभाल के उत्पादों के प्रति संवेदनशीलता, या एक खमीर की तरह फंगस, सूखी त्वचा रूसी फ्लेकिंग का सबसे आम कारण है। यह निरंतर झड़ती सी रहती है, इसमें खुजली मचती है और इसके कारण बाल गंदे प्रतीत हैं। कई दिनों तक लगातार रुसी बने रहने से बालों की जड़ें कमजोर हो जाती है । सर्दी के मौसम इसका प्रभाव कुछ अधिक होता है।

टेलोजेन एफल्युवियम

टेलोजेन एफल्युवियम में बाल पतले होकर झड़ने लगते हैं ऐसा तनाव या हार्मोनल बदलावों के कारण होता है जो एक साथ टेलोजेन प्रवेश कराकर आपके बालों की भारी तादाद को नुकसान पहुंचाते हैं। इस प्रकार के गंजेपन के लिए डिलीवरी के बाद के पीरियड में होने वाले हार्मोनल बदलाव प्रमुख कारण हैं। इस प्रकार यह गंजापन महिलाओं में होने की संभावनाएं अधिक होती हैं।

टीनिया केपिटिस

सिर की त्वचा का रिंगवर्म फफूंद जैसी अनेक प्रकार की फंगस में से एक के द्वारा होता है जिसे डर्मेटोफाइट्स कहते हैं। टीनिया केपिटिस या रिंगवर्म, संक्रमित व्यक्ति या पशु की त्वचा के संपर्क द्वारा अत्यंत आसानी से फैल सकता है। टीनिया केपिटिस फफूंद (फंगस) द्वारा उत्पन्न संक्रमण है, जिसे सिर की त्वचा का रिंगवर्म भी कहा जाता है, यह अत्यंत संक्रामक होता है। अक्सर यह बच्चों को प्रभावित करता है और किशोरावस्था के दौरान चला जाता है। हालाँकि, यह किसी भी आयु में हो सकता है। इससे सिर की त्वचा शुष्क और पपड़ीदार होना। इसमें सिर की त्वचा पर दर्द, खुजली एवं लाल उभरे हुये बाल रहित निशान हो जाते हैं।

ट्रैक्शन एलोपेसिया

यह लंबे समय तक एक ही ढंग से बाल के खिंचे रहने के कारण होता है। जैसे, कोई खास तरह से हेयरस्टाइल या चोटी रखना। लेकिन हेयरस्टाइल बदल देने यानी बाल के खिंचाव को खत्म कर देने के बाद इसमें बालों का झड़ना रुक जाता है।

बालों की समस्याओं के कारण Balo Ki Problems Ka Karan

  • अनुवांशिक कारणों से।
  • केमिकल से बनी चीजों या कास्मेटिक का अधिक उपयोग करने से।
  • अति सक्रिय और कम सक्रिय थायराइड दोनों महिलाओं के बाल झड़ने का कारण बनती हैं।
  • मानसिक तनाव एवं आहार में अचानक बदलाव के कारण।
  • कई दवाओं के सेवन के दुष्प्रभाव के कारण भी बालों की समस्या उत्पन्न होती है। जैसेः स्टेराइड, गठिया, दिल के रोगों से जुड़ी दवाएं, बीपी की गोलियां, कंट्रासेप्टिव दवाएं या नींद की दवाओं के सेवन से भी बालों का झड़ना बढ़ जाता है।
  • बहुत लंबे समय तक तेज बुखार, टायफाइड या वायरल संक्रमण के कारण भी बाल अधिक झड़ते हैं।
  • गर्भावस्था एवं मेनोपाज में होने वाले हार्मोन के परिवर्तनों के कारण।
  • इंफेक्शन के कारण जैसेः रिंगवर्म।
  • किसी आटोइम्यून रोग, सर्जरी, कीमोथैरपी या रेडिएशन के कारण।

बाल झड़ने की समस्या से बचाव Baal Jhadne Ki Samasya Se Kaise Bache

  1. अपने बालों में गर्म पानी से न धुलें
  2. गीले बालों में कंद्यी या तेल का उपयोग न करें
  3. गीले बालों को तौलीये से रगड़कर न सुखायें
  4. तनावमुक्त जीवनशैली अपनायें
  5. स्वस्थ एवं सन्तुलित आहार लें
  6. केमिकल से बने उत्पादों का उपयोग न करें
  7. नियमित योगा या व्यायाम करें
  8. अधिक पानी का सेवन करें
  9. भरपूर नींद लें

बालों की समस्याओं का होम्योपैथिक उपचार Balo Ki Samasya Ka Homeopathic Upchar

  • बैसिलिनम- बाल चकत्ते बन -बनकर गिरते हों और सिर या ढाढ़ी-मूछों से भी गिरते हों तो इस दवा का प्रयोग लाभकर है।
  • सीपिया- यदि स्त्रियों के बाल माहवारी के समय या गर्भावस्ता में झड़ते हों तो यह दवा देनी चाहिये।
  • नाइट्रिक एसिड- यदि जननेन्द्रियों के बाल झरतें हों तो इसके प्रयोग से लाभ होता है।
  • विनका माइनर- इस दवा को लगातार कुछ दिनों तक लेने से रुसी समाप्त हो जाती है।
  • एसिड फाॅस- साधारणतः बिना किसी विशेष कारण के बाल झड़ने से लाभ करती है।
  • सेलेनियम- यह दवा भी बिना किसी विशेष कारण के बालों के झड़ने में लाभप्रद है।
  • वाइजबिडन- यदि बाल अत्यधिक गिरते हों और उनके गिरने का कोई भी कारण समझ में न आ सके ।
  • चायना- किसी भी कारण से शरीर से अत्यधिक मात्रा में रक्त या कोई अन्य श्राव निकल जाने के कारण बाल झड़ने लगे हों तो इस दवा के सेवन से लाभ होता है।
  • कार्बोवेज- यदि किसी लम्बी बीमारी के बाद या प्रसव आदि के बाद बाल झरते हों तो यह दवा देनी चाहिए।
  • लाइकोपोडियम- से पहले गंजापन और समय से पहले बाल सफेद होने पर।
  • नेट्रम मूर- अगर बाल बहुत ज्यादा कमजोर हो गए हैं जो की थोड़े से छूने मात्र से झड़ जाते हों।
  • सोराइनम- सिर में जगह-जगह पपड़ी सी जम जाती है, दाने निकलते हैं जिसमे खुजली होती है।
  • सल्फर- नहाने के बाद जिसके बाल ज्यादा झड़ते हों, तौलिये से सिर पोछने पर जब बाल ज्यादा गिरें।

(ध्यान दें-यह लेख केवल ज्ञान उद्देश्य के लिए है, यदि आप किसी भी प्रकार की बीमारी से पीड़ित हैं, तो हमारा अनुरोध है कि आप किसी भी अनुभवी चिकित्सक की देखरेख में अपना इलाज शुरू करें, क्योंकि चिकित्सक से परामर्श किए बिना दवा लेना रोग के उपचार में बाधा डालता है।)

 

Be the first to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published.


*