मोतियाबिंद का घरेलू इलाज Motiyabind Ka Gharelu Upchar

Home Remedies for Cataracts

मोतियाबिंद एक आम समस्या बनता जा रहा है | अब तो युवा भी इस रोग के शिकार होने लगे हैं | अगर इस रोग का समय रहते इलाज न किया जाए तो रोगी अंधेपन का शिकार हो जाता है |

मोतियाबिंद होने का कारण

मोतियाबिंद रोग कई कारणों से होता है | जैसे –

  1. आंखों में लंबे समय तक सूजन बनी रहना,
  2. जन्म जात सूजन होना
  3. आंखों की संरचना में कोई कमी होना
  4. आंखों में चोट लग जाना
  5. चोट लगने पर लंबे समय तक घाव बने रहना
  6. दूर की चीजें धूमिल नजर आना या सब्जमोतिया होना
  7. आंख के पर्दे का किसी कारणवश अलग हो जाना
  8. कोई गंभीर दृष्टिदोष हो जाना
  9. लंबे समय तक तेज रोशनी या तेज गर्मी में कार्य करना
  10. डायबिटीज होना
  11. गठिया होना
  12. धमनी रोग होना
  13. गुर्दे में जलन का होना
  14. अत्यधिक कुनैन का सेवन
  15. खूनी बवासीर का रक्तस्राव अचानक बंद हो जाना

उपरोक्त सभी समस्याएं मोतियाबिंद को जन्म दे सकती हैं |

मोतियाबिंद कितने प्रकार का होता है

आमतौर पर मोतियाबिंद दो प्रकार का होता है – (1) कोमल ; (2) कठोर

कोमल मोतियाबिंद का रंग कुछ नीला सा होता है | यह बचपन से 30-35 वर्ष की उम्र तक हुआ करता है | कठोर मोतियाबिंद अक्सर अधिक उम्र वालों को होता है | इसमें आंख का रंग धुंधला सा व हलका पीला दिखाई देता है | यह धीरे-धीरे बढ़ता है और कुछ महीने से लेकर कुछ वर्षों में पूरी तरह विकसित हो जाता है | इसमें नजर धीरे-धीरे कमजोर पड़ने लगती है | आयुर्वेद के अनुसार मोतियाबिंद छह प्रकार का होता है –

  1. वाजत मोतियाबिंद
  2. कफज मोतियाबिंद
  3. पित्तज मोतियाबिंद
  4. सन्निपातज मोतियाबिंद
  5. रक्तज मोतियाबिंद
  6. परिम्लामिन मोतियाबिंद

मोतियाबिंद रोग के लक्षण

वातज मोतियाबिंद में रोगी को सभी चीजें चलती फिरती और मलिन सी दिखाई देती हैं | कफज मोतियाबिंद में चीजें चिकनी और सफ़ेद दिखाई देती हैं तथा आंखों में पानी से भरा रहता है |

पित्तज मोतियाबिंद में आग, सूर्य, चंद्रमा, आकाश, नक्षत्र, इंद्रधनुष आदि चमकदार चीजें नीलापन लिए चलती फिरती दिखाई पड़ती हैं | सन्निपातज मोतियाबिंद में रोगी की देखने की स्थिति विचित्र सी हो जाती है | चीजें तरह-तरह के आकार और अधिक या कम रंग वाली नजर आती हैं | सभी चीजें चमकीली दिखाई पड़ती हैं | रोगी को वातज, पित्तज, व कफज मोतियाबिंद के मिले-जुले लक्षण दिखाई पड़ते हैं |

रक्त मोतियाबिंद में सभी चीजें लाल, हरी, काली, पीली, सफेद नजर आती हैं | परिम्लामिन मोतियाबिंद में सभी ओर पीला-पीला नजर आता है | ऐसा लगता है जैसे कि पेड़ पौधों में आग लग गई हो | सभी चीजें ज्वाला से घिरी दिखाई पड़ती हैं | इसे मूर्छित हुए पित्त का मोतियाबिंद भी कहते हैं |

सभी प्रकार के मोतियाबिंद में आंखों के आसपास की स्थिति भी अलग-अलग होती है | वातज मोतियाबिंद में आंख की पुतली लालिमायुक्त चंचल और कठोर होती है | पित्तज मोतियाबिंद में आंख की पुतली कांसे के समान पीलापन लिए होती है | कफज मोतियाबिंद में आंख की पुतली सफेद और चिकनी होती है या संख की तरह सफेद खूंटो से युक्त व चंचल होती है | सन्निपात के मोतियाबिंद में आंख की पुतली मूंगे या पद्मम पत्र के समान तथा उक्त सभी के मिति लक्षणों वाली होती है | परिम्लामिन में आंख की पुतली भद्दे रंग के कांच के समान, पीली व लाल सी, मैली, रूखी और नीलापन लिए होती है |

मोतियाबिंद का आयुर्वेदिक इलाज

आयुर्वेद में मोतियाबिंद के अनेक सफल इलाज उपलब्ध हैं जिनमें से कुछ इस प्रकार हैं

आंखों में लगाने वाली औषधियां

  • मोतियाबिंद की शुरुआती अवस्था में भीमसेनी कपूर स्त्री के दूध में घिसकर रोजाना लगाने पर यह ठीक हो जाता है
  • हल्के बड़े मोती का चूरा 3 ग्राम और काला सुरमा 12 ग्राम लेकर खूब घोटे, जब अच्छी तरह घुट न जाए फिर एक साफ शीशी में रख लें और रोज सोते समय अंजन की तरह आंखों में लगाएं | इससे मोतियाबिंद अवश्य ही दूर हो जाता है
  • छोटी पीपल, लाहौरी नमक, समुद्री फेन और काली मिर्च सभी 10-10 ग्राम ले | इसे 200 ग्राम वाले काले सुरमा के साथ, 500 मिलीलीटर गुलाब जल या सौंफ अर्क में इस प्रकार घोटें कि सारा अर्क उसमे सोख ले | अब इसे रोजाना आंखों में लगाएं
  • 10 ग्राम गिलोय का रस, 1 ग्राम शहद, 1 ग्राम सेंधा नमक सभी को बारीक पीसकर रख लें | इसे रोजाना आंखों में अंजन की तरह प्रयोग करने से मोतियाबिंद दूर होता है |

मोतियाबिंद में उक्त में से कोई भी एक औषधि आंख में लगाने से सभी प्रकार का मोतियाबिंद धीरे-धीरे दूर होता है | सभी औषधियां उपयोगी हैं |

खाने वाली औषधियां

आंखों में लगने वाली औषधि के साथ-साथ जड़ी बूटियों का सेवन भी बेहद फायदेमंद साबित होता है |

500 ग्राम सूखे आंवले गुठली रहित, 500 ग्राम भृंगराज का संपूर्ण पौधा, सौ ग्राम बालहरीतकी, 200 ग्राम सूखे गोरखमुंडी पुष्प और 200 ग्राम सफेद पुनर्नवा की जड़ लेकर सभी औषधियों को खूब बारीक पीस लें | इस चूर्ण को अच्छे प्रकार से काले पत्थर के खरल में 250 मिलीलीटर अमर लता के रस और 100 मिलीलीटर मेहंदी के पत्तों के रस में अच्छी तरह मिला लें |

इसके बाद इसमें शुद्ध भल्लातक का कपड़छान चूर्ण 25 ग्राम मिलाकर कड़ाही में लगातार तब तक खरल करें, जब तक वह सूख न जाए | इसके बाद इसे छानकर कांच के बर्तन में सुरक्षित रख लें | इसे रोगी की शक्ति अवस्था के अनुसार 2 से 4 ग्राम की मात्रा में ताजा गोमूत्र से खाली पेट सुबह शाम सेवन कराएं |

फायदेमंद व्यायाम व योगासन

औषधीय प्रयोग करने के साथ-साथ रोज़ सुबह नियमित रूप से सूर्योदय से 2 घंटे पहले रोजाना क्रियाओं से निपटकर शीर्षासन और आंख का व्यायाम अवश्य करें |

आंख के व्यायाम के लिए पालथी मारकर पद्मासन में बैठे | सबसे पहले आंखों की पुतलियों को एक साथ दाएं-बाएं घुमा कर देखें फिर ऊपर नीचे देखें | इस प्रकार यह अभ्यास कम से कम 10 से 15 बार अवश्य करें | इसके बाद सिर को स्थिर रखते हुए दोनों आंखों की पुतलियों को एक गोलाई में पहले सीधे फिर उल्टे (पहले घड़ी की गति की दिशा में फिर विपरीत दिशा में) चारों ओर घुमाएं | इस प्रकार कम से कम 10 से 15 बार करें, इसके बाद शीर्षासन करें |

कुछ खास हिदायतें

मोतियाबिंद के रोगी को गेहूं की ताज़ी रोटी खानी चाहिए | गाय का दूध बगैर चीनी का ही पिएं | गाय के दूध से निकाला हुआ घी भी सेवन करें | आंवले के मौसम में आंवले के ताजा फलों का भी सेवन अवश्य करें | फलों में अंजीर और गूलर अवश्य खाएं |

सुबह शाम आंखों में ताजे पानी की छींटे मारे | मोतियाबिंद के रोगी को कम या बहुत तेज रोशनी में नहीं पढना चाहिए और रोशनी में इस प्रकार ना बैठे की रोशनी सीधी आंखों पर पड़े | पढ़ते-लिखते समय रोशनी बाईं ओर से आने दे |

वनस्पति घी, बाजार में मिलने वाले घटिया मिलावटी तेल, मांस, मछली, अंडा सेवन ना करें | मिर्च मसाला व खटाई का प्रयोग ना करें | कब्ज ना रहने दें, अधिक ठंडे व अधिक गर्म मौसम में बाहर ना निकले |

मोतियाबिंद का अन्य कारण व लक्षण Motiyabind Ke Anya Lakshan in Hindi

प्राय: वृद्धावस्था में मोतियाबिंद की शिकायत आम होती है। इस रोग में आंखों की पुतली के ऊपर एक हल्का सा जाला छा जाता है, जिसके कारण दिखाई देना कम या बंद हो जाता है। यह जाला धीरे-धीरे बढ़ता जाता है और आंखों की शक्ति लगातार क्षीण होती चली जाती है और व्यक्ति पूर्णत: अंधा हो जाता है। वृद्धावस्था में मोतियाबिंद बेहद खतरनाक रोग माना जाता है। इससे बचाव के लिए नियमित रूप से फलों का सेवन लाभप्रद रहता है।

मोतियाबिंद का अन्य घरेलू इलाज

नारियलः आखों के लिए नारियल बेहद लाभप्रद है। मोतियाबिंद होने पर नियमित कच्चे नारियल के सेवन से लाभ पहुंचता है। इसके अलावा नारियल की गिरी को चीनी में मिलाकर खाने से भी लाभ होता है।

सेवः प्रतिदिन एक गिलास सेव का रस पीने से मोतियाबिंद में काफी लाभ मिलता है तथा आंखों के अन्य विकार भी दूर हो जाते हैं।

बादामः रात में बादाम की गिरी भिगोकर प्रातः पीसकर पानी मिलाकर पीने से मोतियाबिंद में राहत मिलती है।

फलों का रसः शहद, अदरक, प्याज व नीबू का रस सम मात्रा में मिलाकर छान लें। इस रस को सुबह-शाम एक-एक बूंद आंखों में डालने से मोतियाबिंद दूर हो जाता है।

आंवला: प्रतिदिन शहद के साथ ताजा आंवले के सेवन से मोतियाबिंद में लाभ पहुंचता है।

Tags: Motiyabind Ka Desi Ilaj, Motiyabind Ke Lakshan in Hindi, Motiyabind Ke Karan, Motiyabind Ka Gharelu Upay and Upchar

Be the first to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published.


*