52 जड़ी-बूटियों तथा औषधियों को पहचान करें

jadi booti ki pahchaan

ईश्वर ने जड़ी – बूटी के रूप में हमें बहुत बड़ा वरदान दिया है, जिसके लिए हमेशा सदा ऋणी होना होगा. ये औषधियां हमारे जीवन को स्वास्थवर्धक बनाये रखने के लिए बहुत उपयोगी हैं. लेकिन अकसर जानकारी के आभाव में हम इनका उपयोग नहीं कर पाते हैं.

यहाँ आपको हम कुछ जड़ी – बूटियों के बारे में बता रहें हैं जिससे आपको उन्हें पहचानने में आसानी होगी –

  1.  नखसी अथवा जदवार – यह एक पहाड़ी पेड़ की गाँठदार जड़ होती है |
  2. नारियल ( खोपरा ) – एक वृक्ष का फल है जिससे गरी निकलती है |
  3. नारियल दरियाई – यह एक वृक्ष का फल है जो टापू में पैदा होता है और हाथी दांत की तरह सफेद होता है |
  4. बचनाग – यह एक प्रकार का जहरीला पदार्थ है |
  5. पियाबाँस – एक वृक्ष है जिसके पत्ते लम्बे तथा फल पीले होते है |
  6. पीपल बड़ी – वृक्ष का फल है जिसकी वनावट शहतूत की तरह होती है |
  7. थूहर – एक पहाड़ी वृक्ष है | इसके पत्तों पर दानों तरफ धार होती है | दूसरी तरह के थूहर के पत्तों और शाखों पर भी कांटे होते है |
  8. पोतनी मिट्टी – यह मिट्टी सफेद और चिकनी होती है जो पोतने के काम में आती है |
  9. नगर मोथा – यह एक प्रकार की घास है जिसकी पत्ती पतली और लम्बी होती है | इसकी गाँठ गोली और खुशबूदार होती है |
  10. बथुआ – यह एक प्रकार की मुलायम घास है जो गेहूं आदि के खेतों में अपने आप उग आती है | इसकी पत्ती साग भाजी के काम में आती है और रक्तवर्धक होती है|
  11. पोई – यह एक प्रकार की बेल है, जिसके पत्ते पान के आकार के होते है | इसका फल मकोई के फल के बराबर होता है |
  12. मदार या आक – यह पेड़ रेतीली जमीन में होता है | उचाई चार-पांच फिट तक होती है, पत्ती महुये की पत्ती के बराबर होती है, टहनी और पत्ते से दूध निकलता है और इसमें सफेद फुल होते है तथा फल से रुई निकलती है |
  13. करील – यह एक कांटेदार जंगली वृक्ष है जिसका फल टेटी कहलाता है और उसका अचार भी डाला जाता है |
  14. कैथा – यह एक जंगली वृक्ष है जिसकी उँचाई काफी होती है तथा पत्ती सिरस की पत्ती की तरह होती है, इसका फल गोला और छोटे बेल के फल के बराबर होता है| ऊपर का छिलका बहुत मोटा और कठोर होता है |
  15. कुकरौंधा – यह एक बरसाती पौधा है जो दो-तीन इंच ऊँचा और छत्तेदार होता है |
  16. गुल्मुन्डी – यह पानी के पास उगने वाली एक बेल है जिसमे छोटे-छोटे फूल लगते है |
  17. कटेरी (यानी सत्यानासी) – यह एक जंगली वृक्ष है जिसके पेड़ में कांटे होते है, इसमें गोल और छोटे फल लगते है | यह पेड़ दो प्रकार का होता है, एक में नीला और दुसरे में पीला फूल लगता है |
  18. कचनार – एक पेड़ है, जिसका फूल हल्के गुलाबी रंग का होता है और उसकी सब्जी बनती है |
  19. गुवार पाठा – इसका पत्ता मोटा और चौड़ा होता है और पत्ते पर काँटे होते है |
  20. कुर्फा या ( नोनिया) – यह एक प्रकार की घास है जो अधिक नमी वाले स्थानों में होती है | इसका साग भी बनता है | इसका बीज बारीक और स्याह रंग का होता है |
  21. ऐलुआ – गुआर पाठे को निचोड़ कर रसौत की तरह बनाते है |
  22. कबाब चीनी (शीतल चीनी) – इसका दाना काली मिर्च की तरह होता है |
  23. कलमी शोरा –यह एक प्रकार का खार है जो आतिशबाजी और बारूद के काम आता है |
  24. आकाश बेल – यह एक प्रकार का खार है जो बेल होती है और पेंड़ो पर धागे की तरह फैलती है | यह बेल पेंड़ो को सुखा देती है | इसमे जड़ नहीं होती | इसे अमर बेल भी कहते है |
  25. झरबेरी – जंगली बैर के पेड़ को कहते है जिसमे झाड़ होता है |
  26. झाऊ – जो कहीं – कहीं  पर नदियों के कछारों में पाया जाता है | इसके झाड़ की टोकरियाँ भी बनती है |
  27. पवार के बीज – यह जंगल में पैदा होता है इसके दाने मोठ के दाने के बराबर होते है |
  28. तुरुम उटग – यह एक प्रकार का बीज है | इसका रंग नीला और आकार अलसी के बिज के बराबर होता है |
  29. बायविरंग – यह एक प्रकार का फल है जो काली मिर्च के बराबर होता है |
  30. अरण्ड – इसकी मीगी (अन्दर का भाग) सफ़ेद और चिकनी होती है | पत्ते बड़े और हाथ की शकल के होते है तथा फल में कांटे होते है | इससे तेल भी निकाला जाता है, जो अण्डी का तेल कहलाता है |
  31. असगंध – एक पहाड़ी जड़ है जो लसदार होती है |
  32. गूलर – एक वृक्ष का फल है जो अंजीर की तरह होता है | इसमें छोटे- छोटे बहुत से बीज होते है और इसके फल में भुनगे रहते है |
  33. कडुवी तूंबी – कडुवी लौकी जिसका गूदा कडुवा होता है | इसके गूदे को निकाल कर कमण्डल वगैरह बनाये जाते है |
  34. बिनौला – कपास के बीज को बिनौला कहते है |
  35. रेवन्द चीनी – यह एक पेड़ की जड़ है जो बूदार और कड़वी होती है |
  36. बीरबहोटी – एक लाल रंग का कीड़ा है जो बरसात में पैदा होता है | इसका आकार मक्खी से कुछ बड़ा होता है |
  37. महुआ – एक पेड़ का फूल है, जो प्राय: हिन्दुस्तान के सभी स्थानों में पाया जाता है | इससे शराब निकाली जाती है और बीज का तेल निकाला जाता है |
  38. रोगनेगुल  – तेल में गुलाब के फूल की पत्तियाँ डालकर चमेली के तेल की तरह तैयार किया जाता है |
  39. समाल –तीन – चार गज ऊँचा एक पेड़ होता है और उसके पत्ते जवासे की तरह होते है |
  40. बकाइन – एक वृक्ष है जिसके पत्ते नीम की तरह और कडुवे होते है |
  41. लसोड़ा – यह एक फल है जो गोल और लसदार होता है | इसका अचार भी बनाया जाता है |
  42. जँवार – इसे कही कही धमरा भी कहते है | यह स्याह रंग की एक घास है जो प्राय: सभी स्थानों में पाई जाती है |
  43. सिरस – एक लम्बा पेड़ होता है पत्तियाँ इमली की तरह होती है और बीज भूरे रंग का होता है |
  44. सहजन – एक वृक्ष है जिसके पत्ते छोटे और फ़लियाँ लम्बी होती है | फ़लीयों की सब्जी भी बनाई जाती है |
  45. हरसिंगार – इसे स्यारी भी कहते है | इसका फल छोटा होता है और पत्ते थोड़े छोटे – छोटे होते है | इसका फूल सफेद और खुशबूदार होता है |
  46. सीताफल (शरीफा) – वह एक मीठा फल होता है जो हरे और स्याह रंग का होता है | इसका छिलका गांठदार होता है और बीज काले रंग का होता है |
  47. वंशलोचन – इसे तबसीर भी कहते है | यह बाँस से निकलता है और बहुत सफेद रंग का होता है |
  48. चिरचिटा–एक घास है | इसके बीज काँटे दार होते है और चावल की तरह छोटे होते है |
  49. सांभर नमक – यह वह नमक है जो सांभर झील से निकलता है |
  50. सतावर – एक पहाड़ी जड़ है जो लसदार होती है |
  51. ढाक – इसे पलाश या छियुल भी कहते है इसके पेड़ ऊँचे होते है | पत्तियाँ चौड़ी गीली और एक डंठल में तीन-तीन होती है | इसकी पत्तियाँ पतली तथा दोने बनाने के काम आती है | फूल पीले रंग का होता है जो कपडें रंगने के काम में आता है |
  52. बनभोगी – यह एक घास है जिसकी पत्तियाँ जमीन से चिपकती रहती है |

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