कनेर का रोगों में उपयोग फायदे और उपचार Kaner Ke Fayde Aur Upchaar Hindi Me

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कनेर का रोगों में उपयोग, फायदे और उपचार Kaner Ke Fayde Aur Upchaar Hindi Me

कनेर का पेड़ प्रायः सर्वत्र पाया जाता है। पूजा के लिए फूल हेतु इसे विशेष तौर पर घर, मंदिर और बगीचों में उगाया जाता है। सदाबहार रहने वाला इसका पेड़ झाड़ीदार और लगभग 10 फुट ऊंचा होता है। तने के दोनों ओर से तीन-तीन पत्तियां आमने-सामने की ओर निकलती हैं। पत्ते लंबाई में 4 से 6 इंच और चौड़ाई में 1 इंच, सिरे से नोकदार, नीचे से खुरदरे, सफेद घाटीदार और ऊपर से चिकने होते हैं। पुष्प छत्राकार, लगभग डेढ़ इंच व्यास के, सफेद, लाल, गुलाबी और पीले रंग में सुगंधित लगते हैं।

पुष्प विशेषकर गर्मी के मौसम में फूलते हैं। फलियां चपटी, गोलाकार 5 से 6 इंच लंबी होती हैं, जो विषैली होती हैं। वैसे कनेर के सभी अंग विषैले होते हैं, लेकिन जड़ की त्वचा (छाल) सर्वाधिक विषैली होती है। बीज एक गुच्छे में, रोम से आवृत भूरे रंग के होते हैं, जिन्हें कच्चा काटने पर दूध स्रवित होता है। पत्तों और डालियों को भी कुरेदने या तोड़ने से दूध निकलता है।

कनेर का विभिन्न भाषाओं में नाम

  • संस्कृत (Kaner In Sanskrit) – करवीर।
  • हिंदी (Kaner In Hindi) – कनेर।
  • मराठी (Kaner In Marathi) – कणहेर।
  • गुजराती (Kaner In Gujarati) – कणेर।
  • बंगाली (Kaner In Bengali) – करवी।
  • अंग्रेजी (Kaner In English) – ओलिएण्डर (Oleander)।
  • लैटिन (Kaner In Latin) – नेरियम ओडोरम (Nerium Odorum)।

कनेर के औषधीय गुण और फायदे Benefits Of Using Kaner

आयुर्वेदिक मतानुसार करस में कटु तिक्त,कषाय, गुण में लघु, तीक्क्ष्ण, रुक्ष, प्रकृति में गर्म, विपाक में कटु होता है। यह कुष्ठ, त्वचा रोगों, व्रण, कण्डू, कृमि रोग, ज्वर, पामा, उष्ण वात, पक्षाघात, उपदंश, कुते के विष पर, नेत्र रोगों में लाभप्रद होता है।

वैज्ञानिक मतानुसार कनेर के बीज की मज्जा में 57 प्रतिशत तेल होता है, जिसमें एक थिवेटिन नामक ग्लुकोसाइड पाया जाता है। जड़ में हृदय के लिए अत्यन्त विषैले नेरिओडोरेन और नेरिओडोरिन ग्लुकोसाइड्स पाए जाते हैं। अल्प मात्रा में मोम, नेरिन, उड़नशील तेल भी इसमें होते हैं।

कनेर के हानिकारक प्रभाव Kaner Ke Side Effects (Harmful Effects)

कनेर हृदय और श्वास की गति में अवरोध पैदा कर घातक प्रभाव दिखा सकता है, अतः इसके आंतरिक सेवन के प्रयोग में पूर्ण सावधानी रखना जरूरी है।

कनेर के विभिन्न रोगों में प्रयोग और घरेलु उपचार Use And Home Remedies In Different Diseases Of Kaner

1. घाव पर लगाये Kaner Ke Patte Ghaaw Par Lagaay

कनेर के सूखे हुए पत्तों का चूर्ण घाव पर लगाने से वह शीघ्र भरेगा।

2. फोड़े-फुंसी होने पर Phode-Funsi Hone Par :

कनेर के लाल फूलो को पीसकर लेप तैयार करे और इसे फोड़े-फुंसी पर दिन में 2-3 बार नियमित लगाएं। वे शीघ्र ही ठीक हो जाएंगे।

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 3. दाद होने पर Daad Hone Par

कनेर की जड़ को सिरके में पीसकर दाद पर 2-3 बार नियमित रूप से लगाने से रोग दूर होगा।

4. खुजली लगने पर Khujli Lagne Par

कनेर के पते, जड़, फूल और तने को समभाग में लेकर 100 ग्राम की मात्रा 500 मिलीलीटर सरसों के तेल में पकाएं। जब तल आधा बचा रह जाए, तो छानकर शीशी में भर लें। इसका प्रयोग करते रहने से सभी प्रकार की खुजली दूर होगी और अनेक प्रकार की त्वचा की बीमारियों में लाभ होगा।

5. कुत्ते के विष में Kutte Ke Vish Me

सफेद कनेर की जड़ की छाल का महीन चूर्ण 60 मिलीग्राम की मात्रा में 4 चम्मच दूध में मिलाकर दिन में दो बार एक हफ्ते तक पिलाएं।

6. कुष्ठ रोग में Kusth Rogon Me

कनेर के 100 ग्राम पत्तों को 2 लीटर पानी में उबालें। एक लीटर पानी बचने पर इसे छानकर एक बाल्टी पानी में मिलाकर नियमित रूप से कुछ माह नहाने और छने हुए पानी को दिन में एक बार 50 मिलीलीटर की मात्रा में नियमित पिलाने से कुष्ठ रोग में बहुत लाभ मिलेगा।

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7. बवासीर के मस्सो पर  Bavaseer Ke Masso Par

कनेर और नीम के पत्तों को बराबर की मात्रा में लेकर पीस लें। तैयार लेप को बवासीर के मस्सों पर 2-3 बार नियमित लगाएं।

8. नपुंसकता में Napusangta Me

सफेद कनेर की 10 ग्राम जड़ पीसकर 20 ग्राम वनस्पति घी में पकाएं। फिर ठंडा करके जमने पर इसे शिश्न पर सुबह-शाम मालिश करें।

9. अफीम की आदत  Afeem Ki Aadat

इसे छुड़ाने के लिए 100 मिलीग्राम की मात्रा में कनेर की जड़ का महीन 2 चम्मच चूर्ण दूध के साथ कुछ हफ्ते तक नियमित खिलाते रहने से अफीम की आदत छूट जाएगी।

10. कुष्ठ, पीठ का दर्द और शिश्न के नसों की कमजोरी  Kusth, Peeth Ka Dard Aur Sisahn Ke Naso Ki Kamjori

कनेर के 50 ग्राम ताजे फूलों को 100 ग्राम मीठे तेल में पीसकर, एक हफ्ते तक रख दें। फिर 200 ग्राम जैतून के तेल में मिलाकर कुष्ठ, सफेद दाग, पीठ का दर्द, बदन दर्द, शिश्न पर उभरी नसों की कमजोरी दूर करने के लिए 2-3 बार नियमित मालिश करें।

11. सर्प विष में Sarph Vish Me

कनेर के एक-दो पते पानी से धोकर चबाने को दें। दिन में 4-5 बार प्रयोग करने से वमन और दस्त लगकर विष निकल जाएगा।

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