कपालभाति प्राणायाम के फायदे Kapalbhati Pranayam Benefits in Hindi

Kapalbhati Pranayam Benefits in Hindi

कपालभाति के लाभ Kapalbhati Pranayam Ke Labh

“कपालभाति” यौगिक श्वसन की एक तकनीक है, जिसका वर्णन पारंपरिक योग ग्रंथों में किया गया है | इसका अभ्यास श्वसन दर में वृद्धि के साथ किया जाता है, जिसमें सक्रिय (स्वैच्छिक) प्रश्वास (पेट की मांसपेशियों के सकुंचन द्वारा) तथा निष्क्रिय (अनैच्छिक) श्वास लेना (पेट की मांसपेशियों की विश्रांति) सम्मिलित होता है |

कपालभाति के अभ्यास के लिए अभ्यासी को पद्मासन, सिद्धासन, सुखासन आदि में अपने रीढ़ व सिर को सीधा रखकर बैठना होता है | आंखें बंद रखकर अभ्यासी की जागरुकता श्वसन क्रिया पर होनी चाहिए |

पारंपरिक योग ग्रंथों में कपालभाति का अभ्यास करने वाले लोगों का विशेष वर्णन मिलता है | घेरंड संहिता में 3 प्रकार के कपालभाति अभ्यास का वर्णन है |

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वात क्रम

इस प्रक्रिया में बायीं नासिका से वायु अंदर ली जाती है और दायीं नासिका से बाहर की जाती है तथा पुनः दायीं नासिका से वायु अंदर ली जाती है व बायीं नासिका से बाहर की जाती है |

व्युत क्रम

व्युत क्रम कपालभाति का अभ्यास दोनों नासिका से पानी अंदर खींचकर तथा धीरे-धीरे मुंह से पानी का निष्कासन कर दिया जाता है |

भीत क्रम

भीत क्रम कपालभाति का अभ्यास मुंह से पानी लेकर दोनों नासिका से इसका निष्कासन कर किया जाता है | घेरंड संहिता के कपालभाति अभ्यास के कई लाभ हैं | शरीर लचीला व स्वस्थ बनता है तथा कफ विकार समाप्त हो जाते हैं, वह जो कपालभाति का अभ्यास करते हैं उनके पास वृद्धावस्था से संबंधित विकार नहीं आते | अन्य पारंपरिक योग ग्रंथ जैसे हठ योग प्रदीपिका में भी कपालभाति के यही लाभ वर्णित हैं | प्राचीन ग्रंथों में वर्णित इन लाभों को ध्यान में रखकर, आधुनिक उपकरणों की सहायता से कपालभाति पर वैज्ञानिक अनुसंधान की किए गये जिनके परिणाम इस प्रकार आये-

हृदय संबंधी प्रभाव

हम सभी जानते हैं कि हमारे हृदय के धड़कन की दर घटती-बढ़ती रहती है | जरूरत के हिसाब से यह तेज व धीमी होती है | उदाहरण के लिए ‘जब हम तीव्र गति से दौड़ते हैं तो हमारी हृदय गति भी काफी तीव्र हो जाती है, ऐसा इसलिए है क्योंकि मांसपेशियों की जरूरत को पूरा करने के लिए हृदय को शरीर के विभिन्न हिस्सों में अधिक रक्त भेजने की जरूरत होती है | दौड़ने के बाद जब हम विश्राम करते हैं, तो हमारे हृदय की गति दर धीरे-धीरे कम होकर सामान्य हो जाती है | स्वायत्ता तंत्रिका तंत्र ‘हृदय गति’ की दर बदलने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है, अनुकंपी तंत्रिका तंत्र की सक्रियता से हृदय गति बढ़ती है तथा परानुकंपी तंत्रिका तंत्र की सक्रियता से ह्रदय गति घटती है | हृदय गति परिवर्तनशीलता (HRV), ह्रदय पर स्वायत्त तंत्रिका तंत्र के प्रभाव की एक माप है |

हृदयगति परिवर्तनशीलता पर आधारित कपालभाति के प्रभाव का अध्ययन स्वस्थ कर्मियों पर किया गया, जिसमें पाया गया कि कपालभाति (श्वसन दर 60 प्रति मिनट) के अभ्यास के बाद कोई अनुकंपी सक्रियता नहीं थी, हृदय पर कोई तनाव नहीं था | बायो साइकोसोसियल मेडिसन, 2011, 5:4 के अनुसार परिणाम बताते हैं कि वह लोग जो बूढ़े हैं, उच्च रक्तचाप से पीड़ित हैं तथा उन्हें जो हृदय संबंधी बीमारियों के जोखिम में है | वे अपने हृदय को बिना दबाव दिए कपालभाति (श्वसन दर 60 प्रति मिनट) कर सकते हैं |

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ऊर्जा की खपत

मोटापा भारत में आम समस्या है | मोटापा का मुख्य कारण खाद्य पदार्थों द्वारा उर्जा लेने तथा शारीरिक या मानसिक स्थितियों के माध्यम से उर्जा कम करने के बीच असंतुलन का पैदा होना है | उर्जा व्यय में एक बहुत महत्वपूर्ण कारक है, ऑक्सीजन जो उर्जा के धन में विशेष मदद करता है |

जितना हम ऑक्सीजन खपत करते हैं, उतनी ही ज्यादा उर्जा (भोजन द्वारा ली गई) का दहन होता है | कपालभाति किस तरह ऊर्जा की खपत में मदद करता है इसे जानने के लिए स्वस्थ कर्मियों पर एक प्रयोग किया गया |

मेडिसन साइंस मॉनिटर बेसिक रिसर्च, 2015, 21:161-171 की रिपोर्ट के अनुसार यह पाया गया कि कपालभाति के दौरान 30% ऑक्सीजन की खपत बढ़ गई है | यह निष्कर्ष निकला कि कपालभाति का अभ्यास ऊर्जा की खपत 42% बढ़ा सकता है, इसलिए यह मोटापा घटाने में लाभकारी है |

मानसिक स्वास्थ्य

स्वस्थ व सुखी जीवन जीने के लिए अच्छा मानसिक स्वास्थ्य आवश्यक है | एक व्यक्ति जिसके ध्यान की क्षमता एंव स्मृति अच्छी है, वह जीवन में ज्यादा सफल हो सकता है उन कर्मियों की तुलना में जिनका ध्यान व स्मृति कमजोर है | एक उपकरण जिसका उपयोग अवध अवधान को मापने में किया जाता है, उसकी सहायता से ध्यान, अवधान पर कपालभाति का प्रभाव देखने के लिए एक अध्ययन किया गया |

‘इवोक्ड पोटेंशियल’ ध्यान मापने के लिए उपयोग में लिए जाने वाले उपकरणों में से एक है |

इस उपकरण में प्रतिभागी को कुछ विशेष ध्वनि पर ध्यान करने को कहा जाता है तथा उस ध्यान के कार्य के दौरान मस्तिष्क क्षेत्रों की सक्रियता को देखा जाता है | इस परीक्षण के दौरान जानकारी निकाली जाती है कि (1) तंत्रिका कोशिकाओं की दक्षता तथा (2) ध्यान कार्य के दौरान उपयोग में आने वाली तंत्रिका कोशिकाओं की मात्रा का स्वरूप क्या है | जर्नल ऑफ अल्टरनेटिव एंड कॉम्प्लीमेंटस मेडिसन, 2009, 15:281:285 के अनुसार यह पता चला कि जो कपालभाति का अभ्यास करते हैं, उनकी तंत्रिका कोशिकाओं की दक्षता बढ़ सकती है | अर्थात वह मानसिक कार्य तीव्र गति से कर सकते हैं, बनिस्पत जो कपालभाति का अभ्यास नहीं करते हैं |

अतः कपालभाति एक अच्छा अभ्यास है | पर जिन्हें मिर्गी (क्योंकि श्वसन दर होना इस दौरे का कारण हो सकता है), पेट की सर्जरी, हृदय रोग तथा अनियंत्रित उच्च रक्तचाप हो उन्हें यह अभ्यास सावधानी के साथ करना चाहिए |

सोर्से: योग सन्देश

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