करेला खाने के फायदे Karela Khane Ke Fayde In Hindi

करेला खाने के फायदे Karela Khane Ke Fayde In Hindi Language

करेला खाने के फायदे Karela Khane Ke Fayde In Hindi

करेला एक लता है जिसके फलों की सब्जी बनती है। यह खाने में कड़वा होता है। करेले में बहुत ही गुणकारी तत्व होते हैं जो हमारे शरीर को रोग मुक्त रखते है | करेला का प्रयोग औषधियां बनाने में भी होता है | निचे हम आपको बता रहें हैं कि करेला का सेवन किन-किन रोगों से निवारण के लिए किया जाता है |

गले की शोथ – सूखे हुए करेले को सिरके में पीसकर रोगी स्थान पर गर्म-गर्म लेप करें |

डायबिटीज – करेले के ताजा फलों का रस 15-20 ग्राम तथा करेले की सब्जी का प्रतिदिन सेवन करते रहने से मूत्र के मार्ग से शुगर या चीनी आनी कम हो जाती है और कुछ दिनों के बाद मधुमेह की व्याधिक से छुटकारा मिल जाता है | अथवा- करेले के टुकड़ों को छाया में सुखा कर और महीन चूर्ण बना कर राख लें | मात्रा 3-6 माशे तक, मधु या पानी के साथ सेवन करते रहने से भी डायबिटीज में धीरे-धीरे लाभ होने लगता है | यह प्रयोग रक्त विकार, खाज-खुजली, विचर्चिका आदि को भी नष्ट कर देता है |

पीलिया (Jaundice) – पीलिया के रोग को करेले को पानी में पीसकर दिन में दो बार सुबह-सायं पिलाते रहें |

संधिवात, गठिया रोग – करेले का रस गर्म करके लेप करें तथा खाने में सब्जी का प्रयोग करते रहने से संधि-स्थलों (जोड़ों) का दर्द दूर हो जाता है |

फोड़ों की सुजान व उष्णता – फोड़ों की सुजान व उष्णता पर भी करेले के रस का लेप लाभ करता है |

गर्भ-निरोध के लिए – रमणी महिला को करेले का रस पिलाते रहने से गर्भ स्थति नहीं हो पाती |

नेत्रों में फूली, माड़ा पड़ना – करेले के ताजा रस में काली मिर्च अंजन करने से नेत्रों का फुला व माड़ा समाप्त हो जाता है | किन्तु इस प्रयोग को करने से नेत्रों में जलन बहुत होती है |

लिवर, यकृत की गड़बड़ी – खान-पान की अतिशयता, अनियमितता आदि के कारण प्रायः बच्चों की पाचन क्रिया मंद पड़कर यकृत की गड़बड़ी हो जाती है | उन्हें 1-1 चम्मच करेले का रस पिलाते रहने से यकृत ठीक कार्यरत रहता है और बच्चों को भूख भी खूब लगती है | शरीर में स्फूर्ति रहती है, कब्ज मिटती है और यदि पेट में कीड़े पैदा हो गये हों तो वे भी समाप्त हो जाते हैं |

मुखपाक या छाले – करेले के रस में थोड़ी सी चाक की मिट्टी और थोड़ी सी देशी खांड मिलाकर रोगी को चटाते रहने से छाले ठीक हो जाते हैं |

खूनी बवासीर – करेले के रस में मीठा (शर्करा) मिलाकर रोग-लक्षणानुसार 1-1 चम्मच दिन में 2-3 बार पिलाते रहने से बवासीर से खून निकलना रुक जाता है और वह ठीक होने लगता है |

कामला – ताजा करेले के फल को पानी में पीस-छानकर रोगी को पिलाने से उसे कुछ दस्त हो जायेंगे, जिससे आराम मिलेगा |

करेले की सब्जी खाने से लकवा, दमा (Asthama), गैस बनना आदि रोगों में लाभ होता है, पाचन शक्ति क्षीण नहीं होती |

पथरी – पथरी होने पर प्रतिदिन 2 करेलों का रस निकाल कर पियें |

हैजा – 1/4 (एक चौथाई) कप करेले का रस, 25 ग्राम पानी व स्वादानुसार नमक मिलाकर थोड़ी-थोड़ी देर बाद पियें, हैजा में लाभ होगा |

तिल्ली – तिल्ली बढ़ने पर 25 ग्राम पानी में करेले का रस मिलाकर प्रतिदिन 3 बार पियें |

प्रतिदिन करेले का रस पीने से गैस बनना बंद हो जाती है व पाचन-शक्ति ठीक हो जाती है |

पेट में कीड़े पड़ने पर लगभग 25 ग्राम करेले का रस पीयें |

पैरों में जलन – पैरों में जलन होने पर करेले के पत्तों की मालिश करें |

प्रतिदिन कुछ दिनों तक 50-60 ग्राम करेले के रस का सेवन करें, शरीर का दूषित खून साफ़ हो जाएगा |

विशेष – करेले के कारण कोई विकार उत्पन्न होने पर, दही या नीबू का सेवन करें, विकार दूर हो जायेंगे |

स्तम्भन-शक्तिवर्द्धक योग – करेले के फल व पत्तियों के रस को आग्नि पर पकाकर गाढ़ा कर 3-3 माशे की गोलियां तैयार के रख लें | प्रथम, थोड़ा गौ दुग्ध पीकर ऊपर से 1 गोली निगल जायें और थोड़ी देर के बाद शहद चाट लें, यह अत्यन्त सेक्स पावर बढ़ाने वाला एंव बाजीकर प्रयोग है |

खसरा, चेचक – खसरा, चेचक से बचाव के लिए करेला की सब्जी नियमित खानी चाहिए | किन्तु इसके प्रभावोत्पादक कडुवे रस को किसी प्रकार भी दूर नहीं करना चाहिए |

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