लहसुन खाने के फायदे Lahsun Khane Ke Fayde In Hindi

Lahsun Khane Ke Fayde In Hindi

लहसुन खाने के फायदे (Lahsun Khane Ke Fayde In Hindi Language)

लहसुन उपयोग सब्जियों को स्वादिष्ट और पौष्टिक बनाने में किया जाता है | इसमें प्रोटीन, एन्ज़ाइम, विटामिन बी, सैपोनिन, फ्लैवोनॉइड आदि पदार्थ पाये जाते हैं । इसमें पाए जाने वाले तत्वों में एक ऐलीसिन भी है जिसे एक अच्छे एंटी-ऑक्सीडेंट के रूप में जाना जाता है । लहसुन में औषधि गुण होने की वजह से इसे अनेक प्रकार की भयंकर बीमारियों में उपयोग किया जाता है |

लहसुन द्वारा रोगों का उपचार Lahsun Khane Ke Fayde In Hindi

पीलिया का उपचार 

गर्म दूध 100 ग्राम में लहसुन की 4-5 कलियाँ पीस मिला लें, इसे पीकर ऊपर से और दूध पी लें | ऐसा कुछ दिन करने से पीलिया का रोग दूर हो जाता है |

स्वप्नदोष का इलाज 

सोते समय रात को एक काली लहसुन चबाकर निगल जायें |

बन्ध्यत्व

शरदकाल में नियमित रूप से लहसुन 4-5 कली चबाकर गर्म दूध पीते रहने से महिला गर्भ धारण करने में सक्षम हो जाती है | पुरुषों में बल वीर्य की बृद्धि होती है |

नपुंसकता का उपचार 

1. जाड़े की ऋतु में प्रातकाल 5 कली लहसुन की चबाकर ऊपर से मीठा दूध पी लेने से सभी प्रकार की जन्म जात छोड़ कर नपुंसकता ठीक हो जाती है | वीर्य में गाढ़ापन आता है |

2. देशी घी में लहसुन लगभग 50 ग्राम को तलकर प्रतिदिन खाने से सैक्स-पावर (यौन शक्ति) बढ़ती है और नपुंसकता समाप्त हो जाती है |

3. 250 ग्राम लहसुन को पीसकर 750 ग्राम शुद्ध शहद में मिलावें और ढक्कनदार कांच की शीशी में भर कर एक माह के लिए गेंहूँ के ढेर या बोरे में दबा दें | बाद में 10 15 ग्राम की मात्रा में सुबह-सायं खाकर ऊपर से गर्म दूध पियें 40 दिन के सेवन से ही आशातीत बल-वीर्य की वृद्धि हो जायेगी तथा नपुंसकता जाती रहेगी |

मासिक-धर्म-विकार 

लहसुन 1 तोला और गाजर के बीज 6 माशे को कूटकर 500 ग्राम पानी में चौथाई रहने तक उबालें और आधा छटांक (30 ग्राम) पुराना गुड़ मिलाकर रोहिणी महिला को पिला दें, मासिक धर्म खुलकर हो जायेगा |

संतान्दाता योग

किसी गर्भाशय-दोष के कारण गर्भाधान न हो पा रहा हो तो मासिक के दिनों के उपरान्त लहसुन की कली व करंजा की छाल को पीसकर दही के साथ खाने से गर्भ ठहर जाता है |

लकवा (पेरालैसिस) का उपचार

25 ग्राम लहसुन की छिली हुई कलियों को बारीक पीसकर 500 ग्राम गाय के दूध में पकावें और आवश्यकतानुसार पिसी हुई मिश्री मिलाकर खीर की भांति गाढ़ा कर लें | ठंडा हो जाने पर रोगी व्यक्ति को खिलावें | लगभग 40 दिनों तक खिलाने से रोगमुक्त हुआ जा सकता है | लहसुन के तेल की मालिश भी साथ करने से आराम जल्द हो जाता है |

टी.बी. का उपचार 

क्षय से बचाव में लहसुन अमृत के समान कार्य करता है | 1. टी.बी. हो जाने पर लहसुन की कली दूध में उबाल कर पीयें | 2. लहसुन के रस में रुई की बत्ती बनाकर काफी दिनों तक सूंघते रहने से फेफड़ों में स्थित टी.बी. के रोगाणु नष्ट हो जाते हैं | 3. लहसुन के 5 ग्राम रस में 15 ग्राम ताजा पानी मिलाकर पीने से आँतों का क्षय ठीक हो जाता है |

प्लूरिसी रोग का उपचार

लहसुन की पिसी लुगदी को गेंहूँ के आटे में मिलाकर पुल्टिस बनाकर रोगी स्थान पर बांधने से प्लूरिसी के कारण छाती में होने वाली पीड़ा शान्त हो जाती है |

पेट का कैंसर का इलाज 

लहसुन की कलियाँ पानी में पीसकर पीते रहने से पेट का कैंसर नहीं हो पाता | यदि कैंसर हो चुका हो तो इसके पीने से ठीक हो जाता है |

बुढ़ापा दूर करने के लिए 

लहसुन का नियमित प्रयोग करने वाला व्यक्ति असमय में वृद्ध नहीं होता, लम्बी आयु तक स्फूर्त और स्वस्थ बना रहता है | वृद्धावस्था आने पर शरीर की धमनियां सिकुड़ने लगती हैं जो लहसुन के प्रयोग से सिकुड़ नहीं पाती | साथ ही सहजासन को प्रतिदिन 2 मिनट करते रहने से आयु भी बढ़ जाती है |

मलेरिया ज्वर का इलाज

जिस समय मलेरिया का बुखार आने वाला हो उससे पूर्व हाथ-पैरों के नाखूनों पर लहसुन के रस का लेप करें तथा एक चम्मच लहसुन का रस इतना ही तिल का तेल मिलाकर चाटें | ऐसा एक-एक घंटे पर ज्वर आने से पूर्व करते रहें | चार-पांच दिन तक ऐसा करने से मलेरिया का ज्वर ठीक हो जायेगा |

तीव्र ज्वर का उपचार

तीब्र बुखार होने पर लहसुन की कलियाँ कूट और उसमे थोड़ा सा पानी मिलाकर सूती कपड़े में पोटली बनाकर सुंघायें और रस पिलायें ज्वर शान्त हो जायेगा |

हार्ट अटैक (दिल का दौरा पड़ना) 

जैसे ही दिल का दौरा पड़ने लगे तुरंत लहसुन की 5-6 कलियाँ चबा लेनी चाहिए | ऐसा करने से दौरे का प्रभाव समाप्त हो जायेगा | तत्पश्चात दूध में लहसुन उबाल कर देते रहें | लहसुन वायु नाशक होने के कारण पेट से वायु निकाल देता है | जिससे ह्रदय पर वायु का दबाव कम हो जाता है |

ह्रदय रोग होने का कारण ह्रदय की धमनियों में जमा होने वाला ‘कोलेस्ट्रोल’ नामक पदार्थ है, जिससे धमनियां सिकुड़ कर बीमार हो जाती हैं | लहसुन धमनियों को सिकुड़ने से रोकता ही नहीं बल्कि सिकुड़ी हुई अवस्था धमनियों में जमे हुए केलोस्ट्रोल को निकालकर, उन्हें फिर से फैलाकर निरोग कर देता है |

पेट के कीड़े को मारे 

शहद व लहसुन की कली लेने से 2 माह में ही पेट के कीड़े मर जाते हैं |

गंजापन का इलाज

सिर के बाल रहित स्थान पर कुछ दिनों तक दिन में 2 बार लहसुन का रस लगायें और सूखने दें | ऐसा रोगदशानुसार 2-3 माह तक करने से गंजे स्थान पर केश उग आयेंगे |

जलोदर का उपचार 

लहसुन का रस पानी में मिलाकर कुछ दिनों तक पिलाने से पेट का पानी निकल जाता है | इसके सेवन से आँतों की टी.बी. भी ठीक हो जाती है |

खांसी का इलाज 

लहसुन के रस की कुछ बूंदें अनार के शर्बत में मिलाकर पीने से या लहसुन मुनक्का के साथ दिन में 3-4 बार चबाने से सभी प्रकार की खांसी में लाभ होता है | साथ में लहसुन की गांठ से पके सरसों के तेल की मालिश गले व सीने पर करने से शीघ्र आराम होता है | तेल, मिर्च, खटाई का सेवन वर्जित है |

काली खांसी का इलाज 

बच्चे की आयु और रोगदशानुसार 5-6 बादामगिरी रात को जल में भिगोकर व प्रातःकाल छीलकर, लहसुन की एक कली में मिला-पीसकर खिलायें | कुछ दिनों में भयंकरतम काली खांसी भी ठीक हो जायेगी |

पेट का दर्द ठीक करे 

नमक मिला लहसुन का रस पिलाने से पेट दर्द में आराम मिलता है |

डिप्थीरिया का उपचार 

लगभग 50 ग्राम लहसुन की कलियाँ 4 घंटे तक चूसें | साथ में लहसुन की कलियों का रस भी बार-बार लेते रहना अधिक लाभप्रद है |

विशेष – बच्चों को लहसुन का रस शर्बत में मिलाकर दें |

निमोनियां का उपचार

एक चम्मच लहसुन का रस थोड़े से गर्म पानी में मिला लें | इसे पीने से निमोनिया, सिर दर्द में लाभ होता है |

दंत-रोग में 

पायेरिया, मसूढ़ों में सूजन, दर्द एंव दांतों में बदबू आने पर प्रतिदिन 2 बार 10 ग्राम के लगभग शहद में 15-20 बूंद लहसुन का रस भली भांति मिलाकर चाटें | साथ ही निम्नलिखित मंजन भी करने से उक्त रोगों के अलावा दंत कृमि (दांतों में कीड़े लगना) आदि सामान्य दंत-रोगों से भी मुक्ति मिल जाती है |

मंजन में इस्तेमाल करे 

लहसुन पीसकर लगभग 50-60 ग्राम सरसों के तेल में डालकर लहसुन जल जाने तक गर्म करें | फिर तेल ठण्डा करके कपड़े से छाने | साथ ही लगभग 25-30 ग्राम जली अजवायन लेकर उसे तेल में डालकर लगभग 10-15 ग्राम सेंधानमक भी डाल दें | मंजन तैयार है |

मिर्गी का उपचार 

लहसुन की कलियाँ दूध में उबालकर रोग की दशा के अनुसार लम्बे समय तक रोगी को पिलाते रहने से मिर्गी-रोग दूर हो जाता है | बेहोशी दूर करने के लिए लहसुन कूटकर सुंघायें |

स्तनों का ढीले हो जाना 

प्रतिदिन लहसुन की 4-4 कलियाँ खाने से स्तन उभरकर तन जायेंगें |

लहसुन का बाह्य प्रयोग

मुत्रावरोध व मूत्राशय की दुर्बलता

अगर पेशाब रुक गया हो या रुक-रुक कर हो रहा हो तो इस रोग में लहसुन की पुल्टिस बांधें |

दर्द को ठीक करने के लिए 

वात, गठिया, संधि-स्थल आदि विविध प्रकार के दर्दों में लहसुन पीसकर तिल के तेल में मिलाकर गर्म करके मलना चाहिए |

हिस्टीरिया का उपचार 

हिस्टीरिया की बेहोशी में लहसुन का रस नासिका के छिद्रों में टपकाने से बेहोशी दूर हो जाती है |

चोट-मोंच को ठीक करे 

 लहसुन की पुल्टिस में नमक डालकर गर्म-गर्म बांधें |

विषैले कीट द्वारा काटना

कीट द्वारा दंशित स्थान पर लहसुन का रस मलें, इससे कीड़े के विष का प्रभाव नष्ट हो जायेगा |

व्रण

कटने के कारण घाव होने पर लहसुन का दबाकर निकाला गया रस घाव पर लगायें |

दाद

लहसुन जलाकर लहसुन की भस्म (राख) शहद में मिला लें, इसे दाद पर लगाने से दाद समाप्त हो जाता है |

खुजली

लहसुन सरसों के तेल में उबालकर रख लें | इस शोधित तेल की कुछ दिनों तक मालिश करने से रक्त शुद्ध होता है, खुजली जाती रहती है |

आधासीसी 

दर्द के स्थान पर पिसे हुए लहसुन का लेप करें और दर्द की ओर के नासा-छिद्र में 2 बूंद लहसुन का रस डालें |

लेप थोड़ी देर करके ही धो देवें क्योंकि लहसुन तीव्र ज्वलनशील और दाहक होता है |

जूं 

यदि सिर में जूं पड़ जायें, खुजली या खराश हो तो लहसुन को पीसकर नींबू के रस में मिलाकर, रात को सोते समय सिर पर मलकर प्रातः साबुन से धो डालें | लगभग एक सप्ताह के प्रयोग से रोग से मुक्ति मिल जाती है |

कान का दर्द, घाव

लहसुन को सरसों के तेल में उबालकर रख लें | इसकी कुछ बूंदें, कान में कुछ दिनों तक टपकाने से दर्द एंव जख्म ठीक हो जाते हैं |

बहरापन

बहरापन दूर करने के लिए तिल के तेल में लहसुन उबाल कर छान लें और ठण्डा करके 1-2 बूंद कान में टपकायें |

कान बहना 

लहसुन कली एक नग, सिंदूर 10 ग्राम को तिल के 50 ग्राम तेल में डालकर अग्नि पर लहसुन जलने तक पकाकर, छान कर रख लें |

इस तेल की 2-2 बूंदें कान में प्रतिदिन डालने से कान का बहना, आवाज होना, खुजली आदि रोग दूर हो जाते हैं |

टान्सिल, गला बैठना 

बारीक पिसा हुआ लहसुन जल में मिलाकर गरारे करने चाहिए |

लहसुन को रसायनों में प्रमुख स्थान प्राप्त है | इसका सेवन दमा, टी.बी., विविध कफ रोग, सिर-दर्द, संधि-स्थल के वातक-दर्द, अंतड़ियों की दुर्बलता, जीर्ण ज्वर, अफारा, कोढ़ (कुष्ठ), समस्त नेत्र-विकार, रक्त-मांस-वीर्य व शक्ति-हीनता को दूर करके शरीर में नवस्फूर्ति का संचार करता है | इसके नियमित उचित मात्रा में सेवन करने से वृद्धावस्था (बुढ़ापा) समीप नहीं आ पाता |

ह्रदय संबंधी समस्त रोग

दिल के धड़कन की अनियमितता, दौरा, पड़ना, नलिकाओं में रक्त-अवरोधन, गैस-ट्रबल, हार्ट-फेल होने की संभावना आदि में इसका सेवन करना अत्यन्त लाभप्रद रहता है |

अस्थि, हड्डी 

हड्डी संबंधी किसी भी व्याधि, हड्डी का स्थानच्युत होना, टूटना, बढना आदि में इसका सेवन करें |

सर्प से बचाव

जहां लहसुन होता है सर्प नहीं आ पाता |

नोट – 1. लहसुन खाने के बाद सुखा धनिया चबाने से लहसुन की तीखी गंध नहीं आ पाती |

2. लहसुन की लुगदी का रस प्रभावित अंगों पर 5-10 मिनट से अधिक नहीं लगाना चाहिए, क्योंकि यह तीव्र दाहक होता है | लेप अधिक समय तक रहने पर छाला हो सकता है, अतः थोड़ी देर बाद ही ठंडे पानी से धोकर तेल चुपड़ देना चाहिए |

3. कच्चा लहसुन चबाने से पूर्व थोड़ा पानी पीकर मुख तर कर लेना चाहिए | पिसा लहसुन मटर के दाने के बराबर मात्रा में खाकर ऊपर से पानी पी लेना चाहिए |

4. ऐलियम सैटाइवा (Allium Sativa) लहसुन से तैयार होमियोपैथीक औषध है |

5. सेवन-मात्रा एक माशा (लगभग एक ग्राम) तक है |

6. लहसुन के प्रयोग से शरीर में गर्मी बढ़ती प्रतीत हो तो सेवन छोड़ देना चाहिए |

7. गर्म वस्तु के सेवन से जिन व्यक्तियों का पित्त कुपित हो जाता हो, उन्हें लहसुन का प्रयोग निषिद्ध है |

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