लकवा यानी पक्षाघात (पैरालिसिस) के घरेलु उपचार, इलाज़ और परहेज

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आयुर्वेद के अनुसार शरीर का कोई अंग या आधा भाग जब निष्क्रिय हो जाता है तो उसे हम पक्षाघात या लकवा कहते हैं | यह एक गंभीर रोग है, जिसका सही समय पर इलाज ना होने पर यह लाइलाज हो जाता है |

लकवा रोग के कारण Lakwa Rog Ka Karan

अधिक मात्रा में वात उत्पन्न करने वाले पदार्थों, जैसे ज्यादा मात्रा में चावल, आलू, बेसन व तले हुए पदार्थ आदि के सेवन से पक्षाघात की संभावना बनी रहती है |

  1. मछली और दूध का सेवन करने से भी वात का प्रकोप शरीर की नाड़ियों और ग्रंथियों पर पड़ता है |
  2. अधिक संभोग या मैथुन से धातु क्षीण हो जाने और खून की कमी से भी यह रोग उत्पन्न होता है |
  3. शारीरिक क्षमता से अधिक व्यायाम या आसन आदि से भी संबंध अंगों पर पक्षाघात का असर होता है |
  4. ज्यादा उल्टी दस्त के कारण शारीरिक कमजोरी आने पर भी यह रोग हमला कर सकता है |
  5. मर्मस्थल या शरीर के नाजुक स्थानों पर आघात लगने से भी संबंधित हिस्से पर लकवा का प्रभाव पड़ता है |
  6. मानसिक कमजोरी एवं नाड़ियों की व मांस पेशियों की कमजोरी से भी भयंकर पक्षाघात हो सकता है |
  7. ब्लड प्रेशर अधिक बढ़ जाने से शरीर के किसी भी अंग पर लकवे का प्रभाव हो सकता है |
  8. अधिक मात्रा में शीतल पदार्थों का सेवन भी पक्षाघात को प्रेरित करता है |

लकवा के प्रकार Types of Paralysis In Hindi

1. संपूर्ण शरीर का लकवा Complete Body Paralysis 

इसमें पक्षाघात का असर संपूर्ण शरीर पर होता है | शरीर को बेहद विकृत अवस्था में यह रोग पहुंचता है, जिससे व्यक्ति संपूर्ण रूप से निष्क्रिय हो जाता है |

2. आधे शरीर का लकवा Paralysis on Half Body

इसमें रोगी का आधा शरीर या उसके एक भाग की विकृति दिखाई देती है | इसमें लकवे से प्रभावित हिस्सा ही निष्क्रिय होता है न कि पूरा शरीर |

मुंह का लकवा Mouth Paralysis

इसमें मुंह के प्रत्येक या कुछ अंगों पर लकवे का प्रभाव होता है |

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लकवा के लक्षण Laqwa Ke Lakshan 

यह रोग शरीर के प्रभावित हुए भाग की नाड़ियों व नसों को सुखाकर रक्त संचार बंद कर देता है | इससे संधियों के जोड़ों में तुरंत कमजोरी आ जाती है और शरीर के विशेष भाग को निष्क्रियता जकड़ लेती है और उस अंग विशेष को उठा सकने या किसी भी प्रकार के वजन को उठाने की क्षमता में रोगी में नष्ट हो जाती है |

मुंह के लकवे के लक्षण Muh ka lakwa ke Lakshan

  • बोलने की क्षमता ही नहीं रहना या साफ बोलने में रुकावट आना
  • आंख और नाक में विकृति आ जाना
  • दांतों में दर्द, गर्दन का टेढ़ा होना,
  • होठों का नीचे लटक जाना,
  • त्वचा का सुन्न हो जाना या संवेदनशील हो जाना
  • गर्दन में विकृति से सिर का हिलना

मुंह के लकवे के विशेष कारण Muh Ke Laqwa Ke Karan

  1. सुई चुभने से तकलीफ होना
  2. रोग प्रारंभ होने वाले भाग के गर्दन वाले हिस्से की ओर एवं उस ओर के जबड़े में अकड़न पैदा होना
  3. रोमांच होना और कपकपी होना
  4. आंखों में मैल जमना
  5. वायु का ऊपर की ओर चढ़ना
  6. त्वचा में सुन्नता आना या उसका संवेदनहीन होना

मुंह के पक्षाघात के विशेष कारण इस प्रकार हैं

  1. हमेशा ऊंचे-नीचे स्थान पर शरीर को टेढ़ा-मेढ़ा करके सोना
  2. कठिन और बेहद वायु वर्धक आहार का सेवन करना
  3. हमेशा ऊंची आवाज में बोलते रहना
  4. हमेशा जोर जोर से हंसना
  5. अधिक जम्हाई आना भी इसका लक्षण है
  6. सदा ही भारी वजन उठाने का कार्य करना

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Muh ka lakwa ka ilaj in hindi – मनमाने ढंग से दवा लेने से पहले तुरंत किसी योग्य चिकित्सक से इलाज करवाएं | क्योंकि इस रोग को हम आयुर्वेद की नजर से देख रहे हैं, इसलिए खान पान में परहेज की जानकारी हमें जरूर होनी चाहिए | सभी तरह के लकवे के प्रभाव आहार इस प्रकार लीजिए –

गेहूं, बाजरा, करेला, बैगन, परवल, लहसुन, घीया, तोरई का इस्तेमाल करें | फलों में अंगूर, अंजीर, फालसा, आम और पपीता सबसे अच्छा होता है | दूध का प्रयोग आवश्यक रूप से जरूर करें |

लकवा में क्या नहीं खाना चाहिए

बेसन, आलू, चावल, दही, छाछ, बर्फ आदि पदार्थ व ठंडी तासीर वाले पदार्थ दालें, तली चीजें और पेट में गैस उत्पन्न करने वाले फल – शाक आदि का प्रयोग कतई ना करें |

लकवे का इलाज Laqwa Ka ilaj

जैसा कि हम पहले बता चुके हैं कि किसी योग चिकित्सक की सलाह और परामर्श से ही इलाज करें | फिर भी जानकारी के लिए दो प्रकार की चिकित्सा यहां पर दी जा रही है –

बाहरी उपाय

इसमें नारायण तेल, महानारायण तेल, निर्गुंडी तेल, सरसों का तेल आदि का प्रयोग मालिश के रूप में करना चाहिए |

आंतरिक उपाय

इसमें सर्वप्रथम रोग के कारण की चिकित्सा हमें पहले करनी चाहिए | यदि रोगी को ब्लड प्रेशर की शिकायत हो तो सर्पगंधा और अश्वगंधा का इस्तेमाल उचित होता है | अन्य प्रयोगों में रास्नादि काढ़ा, महारास्नादि काढ़ा, चोपचीनी का चूर्ण और एरंड तेल का प्रतिदिन उपयोग करना चाहिए | प्रचलित औषधियों में योगराज गूगल, महायोगराज गूगल, त्रिफला मूल विशेष उपयोगी होता है |

मुंह के लकवे में उपाय Muh Ke Laqwa Ka Gharelu Upchar 

1. इस रोग में वायु को शांत करने वाली औषधियां प्रयोग में लानी चाहिए | योगराज गूगल की दो-दो गोली सुबह शाम रास्नादि काढ़ा के साथ सेवन करनी चाहिए | वागजान्कुश रस की छह से आठ रत्ती की मात्रा सुबह-शाम शहद से लेना लाभकारी होता है |

2. अन्य घरेलू उपाय – जिन कारणों से रोग पैदा हुआ है, पहले तो उन कारणों का ही निवारण करना चाहिए |

3. दूध में सोंठ को उबालकर पीने से और नारियल तेल गर्म पानी में मिलाकर कुल्ला करने से भी लाभ होता है | साथ ही इस रोग में वायु के पदार्थों का सेवन और खट्टे पदार्थों का सेवन बंद कर देना चाहिए |

मुंह के लकवे के लाइलाज होने के लक्षण

  • मुह, नाक और रोगी की आंखों से पानी आना
  • शरीर लगातार कांपना
  • आंखों की पलकों में कोई भी गति नहीं होना
  • रोगी में बोलने की शक्ति ना होना | 

यह सभी लक्षण इस बात की पुष्टि करते हैं कि रोग लाइलाज है | 

कभी-कभी शरीर के किसी भाग विशेष अंग में सुन्नता आ जाती है | दरअसल यह सुन्नता या संवेदनहीनता उस भाग अंग की त्वचा पर आती है | एलोपैथी में इसे स्नायु की कमजोरी माना जाता है | लेकिन आयुर्वेद की दृष्टि में यही वायु का दोष जन्म प्रकोप है | शरीर या उसके किसी भाग के सुन्न होने पर चोपचीनी चार भाग, पीपरामूल एक भाग लें और चूर्ण बनाकर रख लें | एक छोटा चम्मच सुबह-शाम दूध के साथ सेवन करें | कुछ ही दिनों में त्वचा में संवेदनशीलता लौटकर रोग नष्ट होने लगता है |

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