लाइफ स्टाइल संबंधी रोग, लक्षण और रोकथाम Life Style Sambandhi Rog, Lakshan Aur Roktham

अस्वस्थ जीवनशैली और खानपान की गलत आदतों के कारण होने वाली बीमारियों को जीवनशैली से जुड़ी बीमारियां कहा जाता है। ये बीमारियां न तो संक्रमण से फैलती हैं, न ही आनुवंशिक होती हैं, हां आनुवंशिक कारक इनमें प्रमुख भूमिका निभा सकते हैं। शारीरिक सक्रियता की कमी, तनाव के बढ़ते स्तर, अनिद्रा, जंक फूड के सेवन और गैजेट्स के बढ़ते चलन से जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। पहले इन बीमारियों को वयस्कों की बीमारी माना जाता था, लेकिन अब ये तेजी से युवाओं को ही नहीं, बच्चों को भी अपना शिकार बना रही हैं। अनुशासित जीवनशैली द्वारा न केवल इनसे बचा जा सकता है, बल्कि अगर आप अपनी खराब जीवनशैली और किन्हीं अन्य कारणों से इनकी चपेट में आ जाएं तो अपनी जीवनशैली में परिवर्तन लाकर इन्हें नियंत्रित भी किया जा सकता है। (Badalta Life Style Aur Bimariya)

जीवनशैली से जुड़ी बीमारियां Jivanshaili Se Judi Bimariya

खराब जीवनशैली विभिन्न कारकों के साथ मिलकर मोटापा, टाइप 2 मधुमेह, उच्च रक्तचाप, हृदय रोगों और कैंसर जैसी बीमारियों को जन्म देती है। आज धूम्रपान, शराब, कम शारीरिक गतिविधियों, खराब आहार की आदतों को एक फैशन स्टेटमेंट के रूप में आत्मसात कर लिया गया है लेकिन यह भूल जाते हैं कि इन आदतों ने हमें बीमारियों के भंवरजाल में ढकेल दिया है और अब चाहकर भी इससे निकलना मुश्किल हो गया है।(Jivan Shaili Me Sudhar Kiya Jaye to In Bimariyo se bacha Ja Sakta hai).

डायबिटीज और स्ट्रेस डिसऑर्डर जैसी बीमारियों से कोई अछूता नहीं है। ये जीवनशैली से जुड़ी बीमारियां सभी के शरीर में घर कर चुकी हैं। अंतर्राष्ट्रीय मधुमेह महासंघ के अनुसार, भारत में 2017 में लगभग 72,946,400 मधुमेह के मामले देखे गए हैं। वर्ष 2025 तक यह अनुमान लगाया जाता है कि मधुमेह से पीड़ित दुनिया के 30 करोड़ वयस्कों में से तीन-चौथाई गैर-औद्योगिक देशों में होंगे। एनसीबीआई की रिपोर्ट के अनुसार भारत और चीन जैसे देशों में मधुमेह पीड़ित लोगों की संख्या कुल जनसंख्या का एक तिहाई होगा।

क्लिनिकल न्यूट्रीनिस्ट, डाइटिशियन और हील योर बॉडी के संस्थापक रजत त्रेहन के मुताबिक हार्वर्ड टीएच चेन स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ के शोधकर्ताओं के नेतृत्व में किए गए अध्ययन में पाया गया कि मधुमेह और उच्च रक्तचाप की दर भारत में सभी भौगोलिक क्षेत्रों और सामाजिक-जनसांख्यिकीय समूहों के मध्यम आयु वर्ग के बुजुर्गो में काफी अधिक हैं।

हृदय रोग का खतरा Heart Attack Ka Khatra

कोई भी असामान्यता, जो हृदय की मांसपेशियों और रक्त नलिकाओं की दीवार को प्रभावित करती है, उसे हृदय रोग कहा जा सकता है। धूम्रपान, डाइबिटीज और कोलेस्ट्रॉल का उच्च स्तर इनका खतरा बढ़ा देता है। विश्व में हृदय रोग से पीड़ित लोगों में भारत का नंबर पहला है। हमारे देश में 5 करोड़ लोग हृदय रोगों से पीड़ित हैं। इनसे मरने वाले 30-40 प्रतिशत लोग 34 से 64 आयु वर्ग के होते हैं(Day By Day Heart attack Ka Khatra Badta Ja raha hai).

हृदय रोग शुरुआती लक्षण Heart Attack Ke Shuruvati Lakshan

  1. छाती में बेचैनी और भारीपन महसूस होना। 
  2. छाती में दर्द के साथ सांस फूलना। 
  3. अत्यधिक पसीना आना।
  4. लगातार चक्कर आना, थकान या कमजोरी। 

लक्षणों की अनदेखी करने का परिणाम Lakshano Ki Andekhi Karne Ke Parinam

जब एक बार दिल बीमार हो जाता है तो उसकी कार्यप्रणाली लगातार कम होती जाती है और वह उतना रक्त पंप नहीं कर पाता, जितनी हमारे शरीर को आवश्यकता होती है। एक स्थिति ऐसी आती है, जब यह काम करना लगभग बंद कर देता है। जब हृदय पूरी तरह खराब हो चुका हो, तब उसे प्रत्यारोपित कराना ही एकमात्र विकल्प होता है, लेकिन सबसे बड़ी समस्या यह है कि हृदय मिलना अत्यंत कठिन है।

रोकथाम के उपाय Roktham Ke Upay

  1. अपना रक्तदाब नियंत्रित रखें। 
  2. अपना भार औसत रखें।
  3. संतुलित और पोषक भोजन का सेवन करें।
  4. अपने भोजन में नमक की मात्रा कम करें।
  5. धूम्रपान और शराब का सेवन बंद करें।
  6. तनाव न लें।

टाइप 2 डाइबिटीज होने का खतरा Type 2 Diabetes Hone Ka Khatra

डाइबिटीज तब होती है, जब अग्नाशय पर्याप्त मात्रा में इंसुलिन नहीं बना पाता या जब शरीर प्रभावकारी तरीके से अपने द्वारा स्रावित उस इंसुलिन का उपयोग नहीं कर पाता। इंसुलिन एक हार्मोन है, जो रक्त की शर्करा को नियंत्रित रखता है। अनियंत्रित डाइबिटीज के कारण रक्त में शर्करा का स्तर काफी बढ़ जाता है, जिसे हाइपरग्लाइसेमिया कहते हैं।    

टाइप 2 डाइबिटीज के लक्षण Type 2 Diabetes ke Lakshan

  1. प्यास अधिक लगना। 
  2. बार-बार पेशाब आना। 
  3. तेजी से वजन घटना या बढ़ना।
  4. खाने के बाद भी भूख लगना। 
  5. थकान महसूस करना।

लक्षणों की अनदेखी करने का परिणाम Lakshano Ki Andekhi Karne Ka Parinam


डाइबिटीज की सबसे गंभीर बात यह है कि यह बीमारी नहीं, बल्कि मेटाबॉलिक सिंड्रोम है, जो कई बीमारियों का घर है। इससे शरीर का हर अंग प्रभावित होता है। अगर समय रहते इसका पता नहीं चल पाए और इसे नियंत्रित नहीं किया जाए तो किडनी फेल होने, ब्रेन स्ट्रोक, रेटिनोपैथी, हार्ट अटैक का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।

रोकथाम के उपाय Roktham Ke Upay

  1. डाइबिटीज जीवनशैली से जुड़ी एक लाइलाज बीमारी है। इसे पूरी तरह ठीक नहीं किया जा सकता।
  2. खनपान को नियंत्रित कर, नियमित रूप से एक्सरसाइज और उचित दवाओं के सेवन से नियंत्रित किया जा सकता है। 
  3. रोजाना नियत समय पर खाना खाएं। दिन में तीन बार मेगा मील खाने की बजाय छह बार मिनी मील खाएं। इससे रक्त में शुगर के स्तर में अत्यधिक उतार-चढ़ाव नहीं होगा। 

उच्च रक्तदाब का खतरा High Blood Pressure Ka Khatra


हाइपरटेंशन या हाई ब्लड प्रेशर में धमनियों में रक्तदाब बढ़ जाता है, जिससे हृदय को रक्त नलिकाओं में रक्त के संचरण के लिए सामान्य से अधिक परिश्रम करना पड़ता है। हृदय जितना ज्यादा रक्त पंप करेगा और धमनियां जितनी संकरी होंगी, ब्लड प्रेशर उतना ही ज्यादा होगा। एक सर्वे के अनुसार भारत के महानगरों के लगभग 25 प्रतिशत लोग हाइपरटेंशन से ग्रस्त हैं। तनाव, मोटापा, खानपान की गलत आदतें उच्च रक्तदाब के प्रमुख रिस्क फैक्टर्स माने जाते हैं।

उच्च रक्तदाब लक्षण High Blood Pressur Ke Lakshan

  1. तेज सिरदर्द। 
  2. सिर में भारीपन। 
  3. कमजोरी महसूस होना। 
  4. चिड़चिड़ापन। 
  5. नींद न आना।

लक्षणों की अनदेखी करने का परिणाम Lakshano Ki Andekhi Karne Ka Parinam  

उच्च रक्तदाब का स्थायी उपचार संभव नहीं है, लेकिन इसे नियंत्रित रखना बहुत जरूरी है। रक्त का दाब बढ़ने से हार्ट अटैक, ब्रेन स्ट्रोक, किडनी और हृदय रोगों का खतरा बढ़ जाता है।

रोकथाम के उपाय Roktham Ke Upay

  1. शारीरिक रूप से सक्रिय रहें। Physically Active rahe
  2. संतुलित और पोषक भोजन का सेवन करें।
  3. घर का बना सादा खाना खाएं, जंक फूड और बाहर के खाने से बचें।
  4. अपने भोजन में नमक की मात्रा कम रखें।
  5. अधिक से अधिक फल और सब्जियों का सेवन करें।

अवसाद होने का खतरा Depression Hone ka Khatra

तेज रफ्तार जिंदगी में हर कोई काम, सफलता, पैसे और पद के पीछे भाग रहा है। संबंधों में भी अब पहले जैसी मधुरता नहीं रही। लोग आत्मकेंद्रित हो गये हैं, जिससे अकेलापन बढ़ा है। खानपान की आदतें बदल गई हैं। स्लीप पैटर्न भी गड़बड़ा गया है। इनके कारण मस्तिष्क पर हमेशा एक दबाव बना रहता है। इससे मानसिक स्वास्थ्य प्रभावित हो रहा है। पूरे विश्व में अवसाद और दूसरे मानसिक रोगों के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। आंकड़ों के मुताबिक हमारे देश में 20-25 फीसदी युवा डिप्रेशन के शिकार हैं।

अवसाद होने के लक्षण Depression Hone Ke Lakshan

  1. लोगों से कटे-कटे रहना। Logo se Doori banana
  2. नींद न आना। Neend Na Aana
  3. चिड़चिड़ा और आक्रामक व्यवहार।
  4. आत्मविश्वास की कमी। Confidence me Kami
  5. किसी काम में मन न लगना। Kisi Kaam Me Man Na Lagna

लक्षणों को नजरअंदाज करने का परिणाम Lakshano Ko Nazar Andaz Karne Ka Parinam

लक्षणों को नजरअंदाज करने से अवसाद की समस्या गहरी हो सकती है, जिससे जीवन की गुणवत्ता प्रभावित होती है। हिंसक प्रवृत्ति और आत्महत्या की प्रवृत्ति बढ़ सकती है। नेशनल क्राइम रिकॉड्र्स ब्यूरो के अनुसार युवा लोगों में मौत की सबसे बड़ी वजह आत्महत्या है और आत्महत्या की सबसे बड़ी वजह डिप्रेशन है।

रोकथाम के उपाय Roktham Ke Upay

  1. स्वस्थ जीवनशैली अपनाएं, जिसमें एक्सरसाइज, पोषक भोजन, पर्याप्त नींद शामिल हो तथा शराब, धूम्रपान और दूसरी नशीली चीजों के लिए कोई स्थान न हो।
  2. प्राथमिकताएं तय करें। अपनी क्षमता से अधिक कार्य न करें और नियमित रूप से ब्रेक लेने का निर्णय लें।
  3. गैजेट्स के साथ कम से कम समय बिताएं। 
  4. सामाजिक रूप से सक्रिय रहें। Social Activity se Jude
  5. मानसिक शांति के लिए ध्यान करें। Yoga Kare

कैंसर का खतरा Cancer Ka Khatra

  1. प्रारंभिक/ शुरुआती लक्षण
  2. जब हमारे शरीर के किसी भी भाग में कैंसर पनपता है तो कुछ लक्षण दिखाई देते हैं। ये लक्षण इस बात पर निर्भर करते हैं कि कैंसर कहां है, किस आकार का है और इसके कारण उस अंग या ऊतकों को कितना नुकसान पहुंचा है।
  3. शरीर में कहीं भी उभार दिखाई दे।
  4. लंबे समय तक खांसी-गले में खराश। Gale Me Kharash
  5. मल त्यागने की आदतों में बदलाव। Change Bad Habits
  6. शरीर और सिर में तेज दर्द।  Body me Pain

लक्षणों की अनदेखी का परिणाम Lakshano Ki Andekhi Ka Parinam

कैंसर केवल एक बीमारी नहीं है, बल्कि कई बीमारियों की चेतावनी है। कैंसर की शुरुआत शरीर के एक भाग या अंग से होती है, लेकिन अगर समय रहते उपचार न किया जाये तो यह शरीर के अन्य भागों और अंगों में भी फैल जाता है। इसके परिणामस्वरूप एक गंभीर स्थिति उत्पन्न हो जाती है, जिसका उपचार मुश्किल हो जाता है।    

रोकथाम के उपाय Roktham Ke Upay

  1. अपना भार औसत बनाए रखें। Body weight Mentain Rakhe
  2. शारीरिक रूप से सक्रिय रहें। Psychically Active rahe
  3. धूम्रपान और तंबाकू का सेवन न करें। 
  4. अत्यधिक वसायुक्त भोजन का सेवन न करें और मीठे ड्रिंक्स से बचें।
  5. पादप उत्पाद को अपने भोजन में अधिक से अधिक शामिल करें।

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