मधुमेह कितने प्रकार का होता है, कारण और उपचार Madhumeh (Diabetes) Ka Gharelu Upchar

मधुमेह का घरेलू उपचार diabetes ayurvedic treatment in hindi

मधुमेह के प्रकार Madhumeh Ke Prakar-Type of Diabetes In Hindi

मधुमेह दो प्रकार का होता है |

पहला टाईप- 1 मधुमेह है, जिसमें अग्नाशय (Pancreas) इन्स्यूलिन (Insulin) पैदा करना बंद कर देता है, ऐसी स्थिति में सिंथेटिक इन्स्यूलिन का इंजेक्शन देना पड़ता है, जिससे शरीर को शर्करा मिलती रहे | टाइप- 1 मधुमेह रोगी का अस्तित्व इन्स्यूलिन इंजेक्शन पर ही निर्भर रहता है |

दूसरा टाईप- 2 मधुमेह हुआ जिसमें हमारा शरीर इन्स्यूलिन प्रतिरोधक बन जाता है | ऐसे में अग्नाशय (Pancreas) इन्स्यूलिन या तो कम पैदा करता है या खून में शर्करा का स्तर नियंत्रित करने का काम इन्स्यूलिन नही कर पाता | जीवन शैली में परिवर्तन, भोजन में परिवर्तन कर, शारीरिक गतिविधियां बढ़ाकर, योगासन, अनुलोम-विलोम करके और आवश्यक औषधियों के सेवन से टाईप- 2 मधुमेह का उपचार संभव है |

अधिकांशतः देखा गया है कि विकसित देशों में टाईप- 2 मधुमेह का प्रकोप ज्यादा है, परन्तु विकासशील देशों में टाईप- 1 मधुमेह का प्रकोप ज्यादा है |


मधुमेह होने के कारण Diabetes Madhumeh Rog Hone Ke Karan

इस रोग में किसी अज्ञात कारण से कार्बोज (CHO) के मेटाबालिज्म में विकृति आ जाती है, जो इन्स्यूलिन (Insulin) के प्रयोग से ठीक हो जाती है, परन्तु इसके कारणों में इन्स्यूलिन की कमी के अतिरिक्त और भी अन्य कई कारण होते है जैसे- चिंता, तनाव, उपसर्ग Infection, कार्बोज व वसा प्रधान आहार, विश्राम प्रियता, आधुनिक जीवन शैली, मोटापा, हेरेडिटी (Heredity), वातरक्त (Gout), सिफपिस (Syphilis), अग्न्याशय के रोग व विटामिन ‘बी’ की कमी आदि का इस बीमारी में प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष संबंध प्रतीत होता है |

मधुमेह किसी भी आयु में हो सकता है, परंतु महिलाओं में इसका प्रकोप मासिक-चक्र बन्द हो जाने (मीनोपाज) के बाद ही अधिकतर होता है | आयुर्वेद विशेषज्ञों के अनुसार स्त्रियों को प्रतिमास ऋतुस्त्राव होने से उनका शरीर शोधन हो जाता है, इसलिए ऋतुकाल तक उनको मधुमेह होने की कम सम्भावना होती है, क्योंकि मधुमेह और ऋतुस्त्राव का सम्बन्ध पूरे शरीर से है |

मधुमेह और इन्स्यूलिन (Insulin)

इन्स्यूलिन दरअसल अग्नाशय Pancreas के Islet of Langerhan’s के बीटा Cell से निकलने वाला ऐसा पदार्थ है, जो हमारे शरीर में ग्लूकोस का स्तर को लगातार नियमित करता रहता है | ग्लूकोज खून में मौजूद हुआ शर्करा है, जो हमारे शरीर को ऊर्जा प्रदान करती है | यह शर्करा हमें भोजन से प्राप्त होती है | जब शरीर में ग्लूकोस का स्तर ज्यादा हो जाता है, तब इन्स्यूलिन इसे इकट्ठा करके यकृत व शरीर की मांस-पेशियों में संचित रखता है |

इसी तरह जब रक्त में शर्करा का स्तर कम रहता है, तब यह इन्स्यूलिन संचित किए हुए ग्लूकोस को रक्त में मिलाने का काम करता है, ताकि शरीर को ऊर्जा मिलती रहे | एक स्वस्थ शरीर में इन्स्यूलिन बिना रुके हुए यह काम अनवरत करता रहता है, लेकिन इन्स्यूलिन की गड़बड़ी के साथ ही समस्याएं प्रारम्भ हो जाती हैं |

अनियमित खान-पान, रहन-सहन, तनाव के कारण कुछ नये लोग अचानक मधुमेह के शिकार बन जाते है, वहीं कुछ लोग अनुवांशिक क्रम में इसके शिकार बनते हैं, अर्थात जिस परिवार में मधुमेह के रोगी पहले से हैं, वहां इनके नये रोगियों की भी आशंका अत्यधिक रहती है |


मधुमेह का आयुर्वेदिक इलाज Madhumeh Ka Ayurvedic Gharelu Upchar Ilaj

मधुमेह की चिकित्सा में आहार का विशेष महत्व है अतः रोगी को उतना ही भोजन लेना चाहिए, जितना कि वह आसानी से पचा सके |

आहार में अपथ्य- आहार में निम्न पदार्थ नहीं लेने चाहिए |

  • मिठाई, चीनी, मिश्री, गुड व अन्य मीठे सभी पदार्थ |
  • चावल, आलू, मांस, अंडा, धूम्रपान, तंबाकू व मदिरा सेवन आदि |
  • आर्टिफिशियल स्वीटनर जिसे शुगर-फ्री के नाम से जाना जाता है |
  • जंक फूड व शीतल पेय, नया अनाज, दही, गन्ने का रस, मौसमी, केला, अनार, अंजीर, चीकू, मीठा सेब, मीठा अंगूर, चुकंदर, शलजम, मीठा आम आदि |

आहार में पथ्य- आहार में निम्न पदार्थों को लेना लाभदायक है-

  • मिक्स चोकर युक्त आटे की रोटी (गेंहूँ+चना+जौ+सोयाबीन), मडुवे के आटे की रोटी |
  • चरक सहिंता में बताया गया है कि गाय को गेहूं, जौ, कौदौ, सोयाबीन साबूत खिलाया जाए, जब ये उसके गोबर से बाहर आ जायं तो उन्हें चुनकर, सुखाकर, पिसवाकर रोटी या आहार बनाकर स्वयं खाया जाय, इससे डायबिटीज में लाभ होता है |
  • विजयसार की लकड़ी से बने बर्तन में 8-10 घंटे पूर्व रखे गये पानी का प्रयोग करें |
  • ‘स्टीविया’ एक पौधा है वह नेचुरल शुगर फ्री है, उसकी पत्तियों को पीसकर, सुखाकर, पाउडर बनाकर या गोलियां बनाकर सेवन किया जा सकता है | इसकी बनी हुई गोलियां बाजार में भी उपलब्ध हैं |
  • मूंग, अरहर, चने की दाल लें |
  • करेला, परवल. लौकी, तोरई, टमाटर, कद्दू, खीरा, ककड़ी, हरी मिर्च, पालक, बथुआ, प्याज, लहसुन, भिंडी, मेथी, मूली, सहजिन आदि की सब्जियां |
  • नींबू, आंवला, जामुन, अमरुद, पपीता, खट्टा सेब, तरबूज आदि, कषाय रस प्रधान वाले सभी फलों का सेवन किया जा सकता है |
  • हरिद्रा, दारु हरिद्रा, नीम, मेथी के दानों का प्रयोग करें |
  • फीका दूध, छाछ व लस्सी का प्रयोग करें |
  • गुड़हल सत्व (Extract of Hibiscus) तथा हिंसालू (Rubus) के सेवन से डायबिटीज का खात्मा हो सकता है |

भोजन के पश्चात क्या करें

  • भोजन के पश्चात 15 से 20 मिनट तक टहलना चाहिए |
  • प्रातःकाल 2-3 कि.मी. तेजी से चलना चाहिए |
  • अधिक समय तक एक ही स्थान पर बैठकर कार्य नहीं करना चाहिए |
  • भोजन के पश्चात दिन में सोना नहीं चाहिए |
  • तनाव व मोटापे से दूर रहना चाहिए |
  • रात्रि में देर तक कार्य नहीं करना चाहिए |
  • रात्रि में देर से सोना व प्रातःकाल देर तक सोते रहने की आदत नहीं होनी चाहिए |
  • सकारात्मक सोच रखनी चाहिए |
  • निश्चित समय में भोजन लें, अधिक भोजन न लें |
  • नित्य योगाभ्यास, मंडूकासन व अनुलोम-विलोम, सूक्ष्म प्राणायाम सहित अनेक योगासन इसमें रामबाण साबित होते हैं |

मधुमेह की आयुर्वेदिक औषधि व यौगिक चिकित्सा (Madhumeh Ki Ayurvedic Chikitsa)

यद्यपि चिकित्सीय परामर्श लेने के पश्चात ही औषधि सेवन करें |

औषध द्रव्य: शिलाजीत, च्न्द्रप्रभावटी, सुवर्ण मालसी रस, गुग्गुल, हरिद्रा, नीम, आमलकी पेय आदि चिकित्सीय परामर्श से लें व आयुर्वेदिक औषधियों में, जैसे-दिव्य फार्मेसी की मधुनाशनी वटी (Madhunasni Vati), मधुकल्प वटी सहित अनेक औषधियों का सेवन कर सकते हैं |

पर सर्वाधिक महत्वपूर्ण है स्वस्थ आहार-विहार फिर औषधि चिकित्सा, तभी मधुमेह रोग का उपचार संभव है |

सोर्स : योग सन्देश

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