जौ के फायदे और औषधीय गुण Jau Ke Fayde Hindi Me – Barley Medicinal Benefits

barley benefits jau ke fayde

जौ के फायदे और औषधीय गुण Jau Ke Fayde Hindi Me – Barley Medicinal Benefits

जौ एक  उपयोगी अन्न है और इसका उपयोग औषधि के रूप  मे किया जा सकता है । जौ के निम्न औषधीय  गुण  है :

सूजन– यदि शोध के कारण कफ दोष हो तो जौ के बारीक पिसे आटे में अंजीर का रस मिलाकर लगाना चाहिये।

कंठ माला– जौ के आटे में धनिये की हरी पत्तियों का रस मिलाकर रोगी स्थान पर लगाने से कंठ माला ठीक हो जाती है।

मधुमेह (डायबटीज)– छिलका रहित जौ को भून पीसकर शहद व जल के साथ सत्तू बनाकर खायें अथवा दूध व घी के साथ दलिया का सेवन पथ्यपूर्वक कुछ दिनों तक लगातार करते करते रहने से मधूमेह की व्याधि से छूटकारा पाया जा सकता है।

[इसे भी पढ़ें –  मधुमेह (डायबिटीज़) का घरेलू इलाज Sugar Ka Gharelu Upchar]

जलन– गर्मी के कारण शरीर में जलन हो रही हो, आग सी निकलती हो तो जौ का सत्तू खाने चाहिये। यह गर्मी को शान्त करके ठंडक पहूचाता है और शरीर को शक्ति प्रदान करता है।

मूत्रावरोध– जौ का दलिया दूध के साथ सेवन करने से मूत्राशय सम्बन्धि अनेक विकार समाप्त हो जाते है।

गले की सूजन– थोड़ा सा जौ कूट कर पानी में भिगो दें। कुछ समय के बाद पानी निथर जाने पर उसे गरम करके उसके कूल्ले करे। इससे शीघ्र ही गले की सूजन दूर हो जायेगी।

ज्वर– अधपके या कच्चे जौ (खेत में पूर्णतः न पके ) को कूटकर दूध में पकाकर उसमें जौ का सत्तू मिश्री, घी शहद तथा थोड़ा सा दूघ और मिलाकर पीने से ज्वर की गर्मी त हो जाती है।

मस्तिष्क का प्रहार– जौ का आटा पानी में घोलकर मस्तक पर लेप करने से मस्तिष्क की पित्त के कारण हूई पीड़ा शांत हो जाती है।

अतिसार– जौ तथा मूग का सूप लेते रहने से आंतों की गर्मी शांत हो जाती है। यह सूप लघू, पाचक एंव संग्राही होने से उरःक्षत में होने वाले अतिसार (पतले दस्त) या राजयक्ष्मा (टी. बी.) में हितकर होता है।

मोटापा बढ़ाने के लिये– जौ को पानी भीगोकर, कूटकर, छिलका रहित करके उसे दूध में खीर की भांति पकाकर सेवन करने से शरीर पर्यात हूष्ट पुष्ट और मोटा हो जाता है।

धातु-पुष्टिकर योग– छिलके रहित जौ, गेहू और उड़द समान मात्रा में लेकर महीन पीस लें। इस चूर्ण में चार गुना गाय का दूध लेकर उसमे इस लुगदी को डालकर धीमी अग्नि पर पकायें। गाढ़ा हो जाने पर देशी घी डालकर भून लें। तत्पश्चात् चीनी मिलाकर लड्डू या चीनी की चाशनी मिलाकर पाक जमा लें। मात्रा 10 से 50 ग्राम। यह पाक चीनी व पीतल-चूर्ण मिलाकर गरम गाय के दूध के साथ प्रातःकाल कुछ दिनों तक नियमित लेने से वीर्य सम्बन्धी अनेक दोष समाप्त हो जाते हैं और पतला वीर्य गाढ़ा हो जाता है।

पथरी– जौ का पानी पीने से पथरी निकल जायेगी। पथरी के रोगी जौ से बने पदार्थ लें।

गर्भपात– जौ का छना आटा, तिल तथा चीनी-तीनों सममात्रा में लेकर महीन पीस लें। उसमें शहद मिलाकर चाटें।

कर्ण शोध व पित्त– पित्त की सूजन अथवा कान की सूजन होने पर जौ के आटे में ईसबगोल की भूसी व सिरका मिलाकर लेप करना लाभप्रद रहता है।

आग से जलना– तिल के तेल में जौ के दानों को भूनकर जला लें। तत्पश्चात् पीसकर जलने से उत्पन्न हुए घाव या छालों पर इसे लगायें, आराम हो जायेगा। अथवा जौ के दाने अग्नि में जलाकर पीस लें। वह भस्म तिल के तेल में मिलाकर रोगी स्थान पर लगानी चाहियें।

3 Comments

  1. जौ के फायदेँ बताने के लिए धन्यवाद,
    लेकिध क्या यह सच मेँ जैसा आप बता रहे हैँ वैसा काम करेगा?

Leave a Reply

Your email address will not be published.


*