मोटापा मधुमेह और आहार Motapa Madhumeh Aur Bhojan

madhumeh ke lakshan symptoms of diabetes in hindi

मोटापा मधुमेह आधुनिक सभ्यता की देन माना जाता है. यह ऐसे रोगों का रोग है, जिनके जीवन में परिश्रम का कोई स्थान नहीं है. भौतिक सुख-सुविधाओं के जाल में उलझकर लोग खान पान, रहन सहन और आचार विचार की गलत आदतों के कारण मोटापे व मधुमेह से ग्रस्त हो जाते हैं.

मोटापे व मधुमेह के रोगियों की तेजी से बढ़ती संख्या इस बात को दर्शाती है कि हम प्रकृति से दूर होते जा रहे हैं, हमारी जीवनशैली पर नकारात्मक परिवर्तनों का प्रभाव पड़ रहा है.

आज बच्चे, युवक महिलाएं तथा प्रौढ़ सभी मोटापे व मधुमेह से ग्रस्त नजर आते हैं. मोटापे का मधुमेह के साथ एक अटूट रिश्ता है, यद्यपि आज तो मधुमेह रोग के शिकार शहरी ग्रामीण, अमीर, गरीब, मोटे, पतले सभी तरह के व्यक्ति होने लगे हैं. आज इस रोग से समाज के प्रत्येक वर्ग के पीड़ित होने का प्रमुख कारण हमारे रहन सहन, कार्य प्रणाली एवं खान पान में बदलाव को माना जा सकता है. इसके बावजूद भी मोटापा और मधुमेह का संबंध सुविदित और चोली दामन के समान हैं.

अनेक अध्ययनों द्वारा यह साबित हो चुका है, कि इस स्थूल व्यक्ति मधुमेह के शिकंजे में शीघ्रता से जकड़ लिए जाते हैं. मधुमेह के मरीजों पर किए गए एक और अध्ययन के मुताबिक 40 साल की उम्र वाले मरीजों 60 प्रतिशत रोगी ऐसे थे, जिनका वजन सामान्य की अपेक्षा 20 प्रतिशत अधिक था. उनमें मधुमेह की शुरुआत हो चुकी थी. जबकि 25 प्रतिशत मरीजों का वजन सामान्य की अपेक्षा 10-12 प्रतिशत ज्यादा था. इस तरह मधुमेह से पीड़ित रोगियों में से 85 प्रतिशत रोगी मोटापे की श्रेणी के थे.

यह भी सत्य है कि मोटापा कोई कठिन रोग नहीं है परंतु इस को अनदेखा भी नहीं कर सकते क्योंकि मोटापे के कारण ही कई बीमारियों का जन्म होता है.

मोटापे के कारण हृदय रोग, ब्लड प्रेशर मधुमेह (डायबिटीज), पथरी, सूजन, गठिया, बवासीर, जोड़ों का दर्द, अस्थमा, लीवर व गुर्दे का रोग, स्त्रियों में श्वेत प्रदर व मासिक धर्म में अनियमितता बांझपन एवं स्त्री पुरुषों में यौन विकार आदि रोग हो जाते हैं.

मोटापे के कारण Motapa Hone Ka Karan

मोटापा कई कारणों से होता है. शरीर में ज्यादा वसा का जमा होना, शरीर में हारमोंस की दशा में असंतुलितता, पाचन क्रिया में गड़बड़, गरिष्ठ भोजन करना यकृत (लीवर) का कमजोर होना, मधुमेह व हृदय रोग का बढ़ना, शरीर में पानी की मात्रा बढ़ जाना, पैदल कम चलना आदि कई कारणों में मोटापा बढ़ता है. किसी व्यक्ति की ऊंचाई व आयु को ध्यान हुए जब उसका वजन उसके आदर्श वजन से दस प्रतिशत ज्यादा हो तो व मोटापे की श्रेणी में आता है. आज भारत वर्ष में मधुमेह एक महामारी की तरह फैलता जा रहा है.

भारतीय समाज में पारस्परिक खानपान के स्थान परित्याग डिब्बाबंद फास्ट फूड का प्रचलन बढ़ रहा है. आजकल घी, तेल, वसा युक्त खाद्य पदार्थ, कड़ाही में तले भुने व्यंजनों छैना, मावा, पनीर, बेसन इत्यादि से बनी चीजों की मिठाइयां जैसे- जैम, जैली, केक, कुल्फी, आइसक्रीम, चॉकलेट, टॉफी, कोल्ड ड्रिंक्स, शहद, मांस, मछली, अंडे इत्यादि का प्रचलन बढ़ता जा रहा है.

हरी साग सब्जियों को आज की युवा पीढ़ी कम पसंद करती है. इन खाद्य पेयों के अधिक मात्रा में सेवन करते रहने से शरीर में धीरे धीरे वसा का अतिरिक्त मात्रा में संचय होने लग जाता है तथा व्यक्ति मोटा होने लगता है.

मोटापे के कारण अंतः स्त्रावी ग्रंथियों का कामकाज भी अस्त व्यस्त हो जाता है. मधुमेह रोग से ग्लूकोज (शर्करा) की मेटाबॉलिज्म क्रिया गड़बड़ा जाती है. ग्लुकोज या शर्करा के चयापचय के लिए इंसुलिन की आवश्यकता पड़ती है. जब आंतों से सोख कर या अवशोषित होकर रक्त में अग्नाश्य (पैंक्रियाज) को इंसुलिन का उत्पादन करने वाली बीटा कोशिकाओं पर अधिक मात्रा में इंसुलिन को पैदा करने की क्षमता घट जाती है. इसे इंसुलिन प्रतिरोध भी कहा जाता है. जब शरीर इंसुलिन को रोकता है तो ग्लूकोज रक्त में एकत्रित हो जाता है.

मोटापा कई प्रकार का होता है. जब चर्बी शरीर के निचले भाग की अपेक्षा शरीर के ऊपरी हिस्से में जमा होती है. तब डायबिटीज होने की ज्यादा संभावना रहती है. शरीर के ऊपरी हिस्से में मोटापे के कारण इंसुलिन प्रतिरोधक वसा की बड़ी कोशिकाएं हो सकती है. जिन लोगों का शरीर का निचला हिस्सा मोटा होता है, उनकी वसा वाली कोशिकाएं छोटी होती है और इंसुलिन से उनकी प्रतिक्रिया आम होती है. शरीर के ऊपरी भाग का मोटापा पुरुषों में अधिक पाया जाता है.

डायबिटीज और मोटापा स्त्रियों की अपेक्षा पुरुषों में ज्यादा पाया जाता है. इसका मुख्य कारण संपन्न व मध्यम वर्गीय लोगों का शारीरिक श्रम नहीं करना है.

चिकित्सक प्रायः आमतौर पर मधुमेह के रोगियों को यही सलाह देते हैं कि अपना वजन कम करें. मोटापा घटाएं इसके लिए प्रातः व सायंकाल कम से कम 45 मिनट तक भ्रमण करना मोटापा घटाने के लिए जरूरी है. यही मधुमेह रोगियों के लिए जरूरी है.

भ्रमण व व्यायाम से शरीर में इंसुलिन बनने में मदद मिलती है. भोजन के बाद हर्गिज नहीं सोना चाहिए. अगर सोना है तो भोजन करने के एक घंटे बाद सोए.

मोटापा और मधुमेह के खतरे Motapa Aur Madhumeh

मोटापा अपने आप में ही खतरनाक स्थिति है. यदि साथ साथ व्यक्ति मधुमेह के चुंगल में भी जकड़ जाए तो स्थिति और भी घातक हो जाती है. यह तो करेला और वह भी नीम चढ़ा वाली कहावत को चरितार्थ करने वाली बात हो जाती है.

मोटापे के साथ साथ मधुमेह रोग के कारण उत्पन्न विषमताओं में रक्त की धमनियों का काठिन्यीकरण की प्रमुख समस्या है. इसके कारण हृदय घात (हार्ट अटैक) होकर व्यक्ति अचानक अकाल मौत का ग्रास बन जाता है.

इसी प्रकार वृक्क संबंधी रोग जैसे- डायबिटीज नेफ्रोपेथी फेफड़ों की टी.बी. डायबिटिक न्यूरोपैथी गेंगरीन कार्बकत्स (फुंसिया एवं घाव, जो भरने में ठीक होने में नहीं आते हैं) हृदय रोग उच्च रक्तचाप, टी.बी., कोमा जैसे घातक व जानलेवा रोग मोटापे एवं मधुमेह की उदज हो सकते हैं. मोटा (स्थूल) व्यक्ति जब मधुमेह का रोगी हो जाता है, उसके कारण मृत्यु दर में भी अत्याधिक इजाफा हो जाता है.

मोटापा और डायबिटीज में उचित आहार ले

मोटापे और मधुमेह रोग में इन पदार्थों का सेवन नहीं करना चाहिए. तले हुए पदार्थ, आलू, शकरकंद, गन्ना, आम, केला, अंगूर, शरबत, ठंडे पेय, मीठे बिस्कुट, आइसक्रीम, मिठाइयां, अमरुद, पेस्टीन बोर्नविटा, चावल की ज्यादा मात्रा मधुमेह रोगियों के लिए उपयोगी वस्तुओं का इस्तेमाल करना लाभदायक होता है जो शर्करा को नियंत्रित करते हैं.

चोकर सहित आटा, फीका दूध, दही, छाछ, मोटा बेसन अंकुरित चना व मूंग, सेब, जामुन, मौसमी, मेथीदाना, रेशेदार व हरी पत्तियों वाली सब्जियां (मूली मेथी पत्ता गोभी, पालक, धनिया, ककड़ी, करेला आदि).

भोजन के समय सलाद का प्रयोग अवश्य करें. भोजन भी दिन में 3-4 बार टुकड़ों टुकड़ों में करना चाहिए. एक बार में 2-4 तक चपाती काफी रहती है. चावल की मात्रा कम होनी चाहिए. नमक, मिर्च, मसालों का काफी कम प्रयोग किया जाए. आहार में एक समय दाल अवश्य लें.

मोटापे को दूर करने की सबसे अच्छी चिकित्सा है भोजन कम करें व्यायाम ज्यादा. इस सिद्धांत के अनुसार ही मोटापे के रोगियों को अपनी दिनचर्या का निर्धारण करना चाहिए. मोटापे के रोगी को अपनी चिकित्सा रसाहार से प्रारंभ करनी चाहिए. रसाहार में एक गिलास पानी में आधा नींबू का रस मिलाकर दिन में तीन चार बार पीना चाहिए. रसाहार के पश्चात फल, दलिया एवं सब्जी लेनी चाहिए, मोटे चोकर सहित आटे की रोटी, उबली हरी सब्जियां को अपने आहार में लेना चाहिए.

मोटे रोगियों को अपने आहार में फल, सब्जियां, सलाद अंकुरित अन्न, मूंग, मेथी आदि को प्राथमिकता देकर मिठाई और गरिष्ठ एवं तैलीय चीजों का प्रयोग सीमित कर देना चाहिए. इन्हें यदि छोड़ा जा सके तो अति उत्तम होगा. मोटापा घटाने के इच्छुक व्यक्ति की आहार तालिका निम्नानुसार बनाई जा सकती है. मोटापे के एक रोगी की दैनिक आहार तालिका.

प्रातः :- नींबू + एक गिलास पानी गुनगुना, 1 चम्मच शहद डालकर पीना चाहिए.

नाश्ता :- अमृताहार (अंकुरित मूंग + मेथी) या मौसम का कोई एक फल या फल का रस एक गिलास.

दोपहर का भोजन :- मोटे चोकर सहित आटे की रोटी एक या दो, उबली हरी सब्जी (लौकी, तोरई, परवल टिंडा आदि) बिना मिर्च मसाले की सलाद, छाछ का एक गिलास.

सायंकाल :- नींबू + एक गिलास गुनगुना पानी + 2 चम्मच शहद या सब्जी का सूप गिलास. रात्रि का भोजन, दोपहर की तरह का समय पर भोजन ग्रहण करें सुबह व शाम के भोजन में कम से कम 8 घंटे का समय हो हरी व ताजा सब्जियां काम में ले. फास्ट फूड से दूर रहे क्योंकि इससे कई प्रकार के उदर रोग हो सकते हैं, जिसमें का कैंसर व अल्सर मुख्य है.

व्यायाम मोटापा घटाने के लिए जरूरी है प्रातः कालीन भ्रमण भी एक प्रकार का व्यायाम है, जिसमें शरीर के सभी अंग संचालित होते हैं. मोटापा घटाने के लिए 3-4 किलोमीटर नित्य एक पैदल घूमना चाहिए. योगासन भी मोटापा कम करता है. शवासन तथा पादवृत्तासन इनमें मुख्य है. आधुनिक संस्कृति मोटापा बढ़ाती है.

मोटापा भागमभाग की जिंदगी में व्यक्ति न तो ढंग से खा पी सकता है और न ही अध्यात्म चिंतन कर पाता है, जिससे हमेशा मानसिक तनाव में रहता है, जो मोटापा बढ़ाता है.

रात्रि को ज्यादा भोजन करना व फिर टी.वी. धारावाहिक देखना शरीर को मोटापे की ओर ले जाता है. रात्रि में भोजन के बाद टहलना अत्यंत जरुरी है. जो मनुष्य अपनी दिनचर्या को व्यवस्थित नहीं रखते इसलिए वे मोटापे के शिकार होते हैं.

अब जरूरत इस बात की है कि हम अपना जीवन सहेज ढंग से जिए, प्रकृति का सामीप्य प्राप्त करें, व्यर्थ की चिंताओं से दूर रहे, प्रतिस्पर्धा की भावना नहीं रखें. एक समान व पौष्टिक आहार लें. नित्य पैदल भ्रमण करे तो हम जरूर मधुमेह व मोटापे से दूर रहेंगे. मन को नियंत्रण में रखें.

कहा भी है मन चंगा तो कठौती में गंगा. दीर्घ जीवन की प्राप्ति के लिए मोटापा घटाना भी होगा.

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