नेचुरोपैथी से मातृत्व हो जाए आसान Naturopathy Can Make Pregnancy Easier

Naturopathy Can Make Pregnancy Easier नेचुरोपैथी से मातृत्व हो जाए आसान Tips In Hindi

नेचुरोपैथी से मातृत्व हो जाए आसान Naturopathy Can Make Pregnancy Easier – किसी औरत के लिए उसकी जिंदगी का सबसे खूबसूरत पल है मातृत्व की अनुभूति | यही वह सुख है जिसे हासिल करने के बाद स्त्री खुद को पूर्ण मानने लगती है | गर्भधारण के साथ ही मां और बच्चा एक अनोखे और प्यारे से बंधन में बंध जाते हैं | मां की हर गतिविधि का असर उस अजन्मे बच्चे पर पड़ने लगता है | ऐसे में कोई अनहोनी न हो जाए, यह आशंका मां को प्रतिपल घेरे रहती है |

आजकल की भाग-दौड़ भरी जिंदगी में स्त्रियों में गर्भधारण को लेकर इतने सारे भय और आशंकाएं व्याप्त हैं कि ज्यादातर औरतें सामान्य डिलिवरी से कतराती हैं | शायद यही वजह है कि इन दिनों सिजेरियन डिलिवरी का चलन जोरों पर है | गर्भवती स्त्री चाहे गांव की हो या फिर शहर की उन्हें प्रसव बस सिजेरियन ही चाहिए, भले ही इसकी कोई जरूरत न हो | ज्यादातर स्त्रियां प्रेग्नेंसी के दौरान बेवजह दवा आदि खाना नहीं चाहतीं, लेकिन प्रसव पीड़ा के भय तथा अपने और अपने होने वाले बच्चे की जान बचाने की फिक्र उन्हें ऑपरेशन द्वारा बच्चे को जन्म देने के लिए प्रेरित करती है | आजकल देश में सर्जरी द्वारा बच्चों के जन्म का प्रतिशत बढ़ने की एक बड़ी वजह नेचुरोपैथी जैसे विकल्पों की अनभिज्ञता और अज्ञानता भी है |

यदि आप नेचुरोपैथी से इलाज व उसके तरीकों के बारे में जान जाएं तो आप भी उसे अपनाए बिना नहीं रह पाएंगी |

क्या है नेचुरोपैथी What Is Naturopathy?

नेचुरोपैथी का सामान्य अर्थ है प्राकृतिक तत्वों से सेहत की देखभाल और इलाज की विद्या | दूसरे शब्दों में हम नेचुरोपैथी को इस प्रकार समझ सकते हैं कि यदि आप बीमार हैं तो आपका इलाज दवाओं के बजाय आपके खान-पान और दिनचर्या में सुधार लाकर किया जाए | उपचार के लिए प्राकृतिक तरीकों जैसे- योग, प्राणायाम और प्राकृतिक जड़ी-बूटी एवं विभिन्न लेपों का प्रयोग किया जाता है | नेचुरोपैथी किसी भी व्यक्ति की रोग से लड़ने की क्षमता को बढ़ाने पर जोर देता है | वास्तव में यदि यह कहा जाए कि नेचुरोपैथी जीवन जीने की एक शैली है तो गलत नहीं होगा | नेचुरोपैथी स्वास्थ्य की देखभाल का प्राथमिक हिस्सा या रूप है |

तेज दवाओं की जगह पौष्टिक आहार और योग आसन न सिर्फ गर्भधारण के समय बल्कि गर्भधारण के बाद भी आपके लिए ज्यादा लाभकारी सिद्ध होंगे | यदि इतिहास पर नजर डालें तो भारत में प्राकृतिक साधनों से स्वास्थ्यलाभ का इतिहास वेदों जितना ही पुराना है, क्योंकि आयुर्वेद और योग का उल्लेख वेदों में भी मिलता है | हमारे देश में शुरू से ही आयुर्वेद का ही चलन रहा है | लेकिन योग की तरह आयुर्वेद भी अपने देश में अब पराया हो गया है | विदेशों में आयुर्वेद वे योग के साझा प्रयोग को नेचुरोपैथी या नेचर केयर के नाम से अपनाया गया |

कैसे करें उपयोग How To Use Naturopathy For Better Pregnancy

किसी गर्भवती स्त्री के लिए नेचुरोपैथी बहुत उपयोगी है | डॉक्टर्स के अनुसार गर्भवती स्त्रियों को इन बातों का ख्याल रखना चाहिए-

1. नेचुरोपैथी की सबसे बड़ी विशिष्टता यह है कि यह गर्भधारण के खतरों से लेकर बच्चे के जन्म तक जो भी समस्याएं होती हैं उन सब से उबरने में मदद करती है |

2. गर्भवती के अच्छे खान-पान पर विशेष ध्यान दिया जाता है | होने वाली मां के खाने में फल, सैलेड और रेशेदार (फाइबर फूड) खाद्य समाग्री किए प्रचुरता होनी चाहिए लेकिन गर्भवती को ओवरईटिंग यानी जरुरत से ज्यादा खाने की नेचुरोपैथी में मनाही है |

3. नेचुरोपैथी में प्रेग्नेंसी के दौरान स्त्री को शारीरिक और मानसिक रूप से मजबूत बनाया जाता है ताकि गर्भवती स्त्री न सिर्फ स्वयं में आ रहे शारीरिक बदलावों के अनुरूप व्यवहार करे बल्कि प्रसव को लेकर किसी भी तरह की आशंका से ग्रस्त न रहे |

4. नेचुरोपैथी गर्भवती को दूसरी स्त्रियों से उनके प्रसव के अनुभव जानने के लिए प्रेरित करता है ताकि प्रेग्नेंट स्त्री उस पूरी स्थिति को सोचें और अपने मन को डिलिवरी के लिए तैयार करती रहे |

5. नेचुरोपैथी में शारीरिक फिटनेस पर बहुत ध्यान दिया जाता है | इसीलिए प्रेग्नेंट स्त्रियों को बहुत से आसन और एक्सरसाइज सिखाई जाती है | कई योग तो इतने प्रभावी होते हैं कि डिलिवरी के समय न केवल आसानी से बच्चे का जन्म हो जाता है बल्कि डिलिवरी के वक्त होने वाले दर्द को भी कम किया जा सकता है |

6. नियमित रूप से प्राणायाम करने की सलाह भी गर्भवती को दी जाती है | दरअसल प्राणायाम सांसों पर नियंत्रण रखना सिखाता है | कहते हैं जिसने सांस पर नियंत्रण पा लिया उसने दिमाग भी जीत लिया | डिलिवरी के समय प्रेग्नेंट स्त्रियों की काफी ऊर्जा सांस लेने और छोड़ने में खर्च होती है | नियमित प्राणायाम इस समस्या से निजात दिलाता है |

7. पश्चिमी देशों से अलग भारतीय नेचुरोपैथी शाकाहारी खाने और योग को अपनाने पर ज्यादा जोर देता है |

8. बॉडी मसाज और मनोरंजन को भी प्रेग्नेंसी में जरूरी समझा जाता है लेकिन बॉडी मसाज के समय बहुत सतर्कता बरती जानी चाहिए |

9. गर्भवती स्त्री को अच्छा संगीत सुनने, उन लोगों के बीच रहने जिन्हें वह पसंद करती है और अच्छा एंव सकारात्मक सोचने की सलाह दी जाती है |

10. गर्भवती स्त्रियों को अपने गर्भस्थ शिशु के साथ संवाद कायम करने की सलाह दी जाती है, क्योंकि ऐसा माना जाता है कि बच्चा अपनी मां के विचारों से प्रेग्नेंसी के दौर से ही प्रभावित होना शुरू हो जाता है |

11. आजकल बड़े शहरों में प्रेग्नेंसी के समय नेचुरोपैथी की सहायता लेने का ट्रेंड काफी बढ़ा है | अब कई संस्थाएं नेचुरोपैथी को बढ़ावा दे रही हैं | आप चाहे छोटे से कस्बे में रहती हों या किसी मेट्रोपॉलिटन शहर में नेचुरोपैथ आपको आसानी से मिल जाएंगे | जो प्रेग्नेंसी के मुश्किल सफर को अपने मार्गदर्शन में निहायत आसान बना देंगे |

स्वेच्छा से हो गर्भधारण Pregnancy When You Want

ध्यान रखें, एक स्वस्थ मां ही स्वस्थ शिशु को जन्म दे सकती है | इसीलिए नेचुरोपैथी की यह मान्यता है कि गर्भधारण आपकी इच्छा से होना चाहिए गलती से नहीं | क्योंकि गर्भधारण और शिशु को जन्म देने के लिए मानसिक और शारीरिक रूप से तैयार होना बहुत ही जरूरी है | स्त्री रोग विशेषज्ञों का कहना है, गर्भवती स्त्री को जिन चीजों की जरूरत सबसे ज्यादा होती है, वे हैं प्यार, अपनापन, मानसिक दृढ़ता और रिलेक्सेशन | नेचुरोपैथी में आपको यह सब दिया जाता है |

क्या आपने कभी ध्यान दिया है कि क्यों कोई रोता हुआ बच्चा अपनी मां के सीने से लगते ही चुप हो जाता है | दरअसल बच्चे को प्रेग्नेंसी के दौरान से जो आवाज सबसे पहले सुनाई देती है, वह है उसकी मां की धड़कनें | इसलिए जब बच्चा पैदा हो पैदा हो जाता है तब भी अपनी मां की धड़कनों को ही सबसे अधिक पहचानता है | नेचुरोपैथी इसी तरह के तर्कों और भावात्मक चिकित्सा की वकालत करती है |

नेचुरोपैथी का जो सबसे बड़ा फायदा स्त्रियों को है, वह यह है कि ये न सिर्फ प्रेग्नेंसी के दौरान बल्कि प्रेग्नेंसी के बाद भी प्रत्यक्ष और परोक्ष रूप से आपकी सहायता करता है |

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