सर्दियों के मौसम में बच्चों की सेहत का कैसे ख्याल रखें Newborn Baby Care In Winter In Hindi

सर्दियों के मौसम में बच्चों की सेहत का कैसे ख्याल रखें Newborn Baby Care In Winter In Hindi

शिशु और छोटे बच्चों में मौजूदा मौसम में ऊपरी सांस नली में वायरल संक्रमण और रोटावायरस दस्त के मामले कुछ ज्यादा ही सामने आते हैं जिनकी रोकथाम की जा सकती है और इनका इलाज भी संभव है.

बच्चों के मां बाप यदि कुछ सावधानियां बरतें तो उत्तर भारत में मौजूदा सर्दियों के मौसम में उनके बच्चों को स्वास्थ्य संबंधी कुछ समस्याओं से छुटकारा मिल सकता है. जिसके बारे में हम कुछ बातें यहां आपसे Share कर रहे हैं

ऊपरी सांस नली में संक्रमण की समस्या

सामान्यत: ऊपरी सांस नली का वायरल संक्रमण बुख़ार, नाक बहना और खांसी के लक्षणों के रूप में सामने आता है. पांच से सात दिनों में वायरल संक्रमण अपने आप ही ठीक हो जाता है. ऊपरी सांस नली के वायरल संक्रमण को Paracetamol और बंद नाक को खोलने वाले नाक के सलाइन Drop के इस्तेमाल से शीघ्र ही नियंत्रित किया जा सकता है.

सामान्यत: शिशुओं के लिए खांसी और सर्दी से संबंधित दवाओं की सिफारिश नहीं की जाती. बड़े बच्चों में खांसी की समस्या से राहत देने के लिए खांसी दबाने वाली दवाओं का इस्तेमाल किया जा सकता है. आमतौर पर ऊपरी सांस नली में वायरल संक्रमण के लिए एंटीबायोटिक दवाओं की जरूरत नहीं होती है और इनके प्रयोग से बचना चाहिए.

तीन से चार दिनों से अधिक समय तक बच्चों में लगातार बुखार रहने, कान में दर्द और सांस लेने में कठिनाई होने जैसे गंभीर लक्षणों पर माता-पिता को नजर रखना चाहिए. यह सभी लक्षण बड़ा रोग होने की पूर्व सूचना देते हैं और इन पर तुरंत चिकित्सीय ध्यान देने की जरूरत होती है.

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कैसे करें इन सब बीमारियों से बचाव

1. सांस संबंधी संक्रमण को रोकने के लिए बच्चों के हाथों को अच्छी तरह से स्वच्छ रखें. माता-पिता बच्चे का हाथ साफ रखने के लिए हैंड सैनिटाइजर का इस्तेमाल कर सकते हैं.

2. घर के अंदर धूम्रपान करने से बचे. वैसे तो धूम्रपान नहीं करना चाहिए लेकिन जो पेरेंट्स धूम्रपान करते है, वे घर के अन्दर न करे और ऐसी बुरी आदते बच्चों की नजर में न आने दें | वायु प्रदूषण से भी बच्चे को बचाएं.

3. बाल रोग विशेषज्ञ से परामर्श ले कर बच्चे को पौष्टिक भोजन ही दें और उसे अच्छी नींद आए ऐसा माहौल बनाए.

4. घर के अंदर धूप आने की और हवा के आवागमन की अच्छी व्यवस्था करें. धूप और हवा सभी के स्वास्थ्य के बहुत जरूरी है लेकिन जिसके घरों में धूप नहीं आती है वे कोशिश करें कि कुछ देर धूप में जरूर बैठें.

5. माता-पिता को बच्चों की उम्र के अनुसार टीकाकरण जरूर करवाना चाहिए.

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रोटावायरस दस्त से बचाव के उपाय

शिशु और छोटे बच्चों को प्रभावित करने वाली एक अन्य बीमारी है रोटावायरस है. ऐसे वक्त में सामान्यता बुखार और उल्टी आना आदि लक्षण सामने आते हैं. कुछ बच्चों में बीमारी तीव्र होकर डीहाइड्रेशन पैदा कर सकती है.

रोटावायरस दस्त का इलाज

रोटावायरस दस्त का उपचार बुखार होने पर पेरासिटामोल देना और उल्टी रोकने की दवाई देना है. इसके अलावा मुंह से पिलाया जाने वाला Re-hydration घोल (ORS) और समुचित आहार देना भी जरूरी है. स्वच्छता पर ध्यान दे और स्वच्छ पानी का प्रयोग करने से रोटावायरस दत्त की रोकथाम की जा सकती है. लेकिन एक दिन ज्यादा होने पर या हालत खराब होंने पर तुरन्त डाक्टर से सम्पर्क करें.

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