पेट दर्द का घरेलु उपचार Pet Dard Ka Gharelu Upchar

यह मेरु चक्रिका का रोग अनुवांशिक भी होता है, अतएव जांच करते समय चिकित्सक यह पूछते हैं कि परिवार के अन्य सदस्यों को या माता पिता को या यह रोग तो नहीं था. चक्रिका के खिसकने के बारे में डॉक्टर बताते हैं जेलीनुमा पदार्थ बाहर आने पर नितंब व पैरों में दर्द होने लगता है(Pet Ka Dard Aur Iska Upchar).

वर्तमान समय में व्यक्ति सबसे अधिक सामान्य व असामान्य व्याधियों के शिकंजे में फंसता चला जा रहा है. इसके कई कारण हो सकते हैं. तनाव, प्रदूषण, अस्तव्यस्त सी भोजन प्रवृत्ति, प्रकृतिविरुद्ध आहा विहार, मादक पदार्थों का बढ़ता शौक. कई और भी कारण है भौतिकता के प्रति बढ़ती चाह, अधिक भाग दौड़, मार्ग दुर्घटनाएं, हाडतोड़ मेहनत, पेशियों, उत्तकों व अंत: स्राव ग्रंथियों पर अनावश्यक दबाव, रक्ताल्पता, तपेदिक आदि. जिसके कारण अक्सर पुरुष स्त्री पीठ दर्द से पीड़ित होते हैं. विशेषज्ञों के मुताबिक यह पीड़ा पहले शरीर के किसी भाग में स्थित होती है. इसके बाद यदि इसकी उपेक्षा की जाए तो दर्द का प्रभाव क्षेत्र बढ़ाने लगता है ऐसी दशा में जरा सा हिलना-डुलना भी कष्टदायक होता है. प्रारंभिक दशा में दर्द से पीड़ित व्यक्ति ज्यादा सामान नहीं उठा सकता. अधिक झुकने में खासी परेशानी होती है(Pet ka Dard kai Prakar ka hota hai)यह बीमारी जब स्त्रियों में होती है, तो पेशियों में खिंचाव होता है, जड़कन पाई जाती है. गर्भावस्था और बाद की स्थितियों में रक्त व हार्मोन की कमी के कारण प्रायः स्त्री की कमर एवं टांगों में दर्द उभरता है. देखा गया है कि प्रायः मांसपेशियों में खिंचाव, मेरुदंड की वक्रिका मे बढ़ता गठिया हड्डी का उभार और मेरुदंड की असामान्यता कारण दर्द उभरता है. कभी रीढ़ की हड्डी में डिस्क खिसकने के कारण भी दर्द होता है(Pet Ke Pain ka karan Haddi me Chot Lagna bhi Ho Sakta hai).

पेट दर्द को गंभीरता से लेना चाहिए? Pet Dard Ko Gambhirta se Lena Chahiye

चिकित्सको के मुताबिक उठने-बैठने, काम करने, बोझ उठाने और अधिक विषय वासनाओं में प्रवृत्त होने के कारण कार्य के गलत तौर-तरीके से हमारी पेशियां प्रभावित होती है. अनियमित खाना खाने वालों, व्यायाम करने वालों, अधिक बोझ उठाने वालों को ज्यादा पीठ दर्द होता है. शरीर ठीक ठाक हो और किसी बीमारी के अचानक धावा बोलने के कारण भी यह बीमारी होती है. पीठ दर्द को वास्तव में एक अवसर की तलाश रहती है. पेशियों को झटका बराबर मिलने से वह दर्द तेजी से उभरता है. जो व्यक्ति जरूरत से ज्यादा बोझ उठाते हैं और फिर बोझ उठाना बंद कर देते हैं तो पीठ का दर्द उभरता है. इससे पेशियों और कंदराओं पर काफी दबाव पड़ता है.

पीठ की हड्डी या मेरुदंड का लचीला होना जरूरी है. यह पीठ दर्द वहां आक्रमण करता है. जहां लचीलापन कम होता है. 24 कशेरुकाओं में प्रत्येक दो के बीच करीब 25 मि.ली. की जगह होती है. इन गोल हड्डियों के बीच का स्थान खाली होता है जिससे होकर स्नायुजाल पूरे शरीर में फैलता है. शरीर के भार का ज्यादातर प्रभाव पांच कटि कशेरुकाओं पर पड़ता है. यह वह स्थान है जहां दर्द धावा बोलता है.

कभी-कभी इस दर्द का निशान कंधे व ग्रीवा प्रदेश पर पड़ता है. जब कशेरुका की चक्रिका पर हमला होता है तो लिगामेट्स यानी लचीले स्नायु प्रभावित होते हैं. चक्रिका का आकार मौत की तरह होता है. इसका मध्य भाग नरम जैली जैसा होता है. यह मेरुदंड को नरम और लचीला बनाता है. यही बाहरी आघात या चोट लगने पर उस को सहन करता है.

आपकी चक्रिका घिसनी नहीं चाहिए क्योंकि इससे दरार पड़ती है और सूजन आने लगती है. चक्रिका के क्षतिग्रस्त होने के कारण दर्द होता है.

ज्ञान है तो जहान है Gyan HaiTo Jahan Hai

नवीनतम अध्ययनों के अनुसार पीठ दर्द में दो दिन तक बिस्तर पर लेटे रहने से उतना आराम मिलता है. जितना सात आठ दिनों तक लेटे रहने या एस्प्रिन जैसी गोली लेने से. जिन्हें पेट दर्द हो वे आराम के साथ-साथ अपने संपूर्ण शरीर की जांच कराएं यह मेरु चक्रिका का रोग अनुवांशिक भी होता है. अतएव जांच करते समय चिकित्सक यह पूछते हैं कि परिवार के अन्य सदस्यों को या माता पिता को यह रोग तो नहीं था. चक्रिका के खिसकने के बारे में डॉक्टर बताते हैं. जेलीनुमा पदार्थ बहार आने पर नितंब व पैरों में दर्द होने लगता है. चक्रिका अपने स्थान से अधिक खिसक जाती है तो ऐसा भी हो सकता है कि पैर चलने फिरने लायक ही नहीं रह जाए. मेरु से पैरों की ओर जाने वाले तंत्रिका मूल पर जोर पड़ने से व्यक्ति लकवे का शिकार हो सकता है(Pet Dard Aur Paralysis).

आपातकालीन स्थिति में शल्य क्रिया की सहायता लेनी पड़ती है. शल्य क्रिया से चक्रिका केंद्र एवं उसके चारों ओर बिखरे देशों से इसे निकाल दिया जाता है. डॉक्टरों ने एक नई पद्धति भी विकसित की है जिसके तहत एक चूषक सुई की मदद से साइफन क्रिया के जरिए क्षतिग्रस्त भागो को निकाल दिया जाता है इसके लिए चीरा लगाना पड़ता है. चोट की प्रतिक्रिया का जायजा भी लिया जाता है प्रतिक्रिया कम होने पर यह पता चल जाता है कि चक्रिका की गड़बड़ी है. जब मांसपेशियां क्षतिग्रस्त हो जाती है तो सामान्य सीमा से अधिक खिंचाव होता है. इसके फलस्वरुपो अनियंत्रित पेशी का संकुचन होता है. तो पेशी कठोर पड़ जाती है. सूजन कम करने के लिए बिजली उद्दीपन का इस्तेमाल किया जाता है. डॉक्टर संबद्ध स्थान पर चकती लगाकर छोटे-छोटे इलैक्टाड़ो को प्लग में डालता है. एक बार में यह क्रिया 30 मिनट तक चलती है इससे ऐंठन कम होती है.

स्‍वास्‍थ्‍य फायदों से भरपूर है पेट की मसाज Swasthya Faydo Se Bharpur Hai Pet Ki Masaj

मालिश और व्यायाम भी काफी हद तक पीठ का दर्द दूर करते हैं इससे पेशियों में तनाव कम होता है. इसके साथ ही दर्द कम करने के लिए बराबर तख्त और समतल फर्श पर सोना लाभदायक है. रीढ़ की हड्डी की वक्रता को बनाए रखने के लिए यह जरूरी है( Pet Dard ka Achuk Upay).

पेशियों की मजबूती के लिए पीठ के बल लेटकर आप दोनों घुटनों को ऊपर की तरफ ले जाए उन्हें छाती पर दवाएं. इसी दशा में पांच सेकंड तक रहने के बाद एक एक कर अपने पैरों को पूर्व दशा में ले आएं.

नितंब उत्तान के अंतर्गत पहले आसन के तहत पैरों को घुटनों के ऊपर व पंजे को फर्श पर रख आप नितंब को धीरे धीरे जमीन से ऊपर उठाएं. एक मिनट तक इसी अवस्था में रहे. और फिर पूर्व दशा में लौटे. एक दफा यह क्रिया पांच बार करें.

पैर मोड़ कर बैठे. पूर्व के आसनों की तरह इस बार भी पीठ के बल लेटकर घुटनों को ऊपर ही रखें. हाथों को सिर के पीछे लेकर कंधों को ऊपर उठाए. अब आप धीरे-धीरे उठकर बैठने के बाद धीरे-धीरे पूर्व दशा में लौट जाये. इससे पीठ पर दबाव पड़ता है, पेशियां मजबूत होती है. आराम मिलता है.

पेट दर्द में व्यायाम से उपचार Pet Dard Me vyayam Se Upchar

कमर को लचीला बनाएं पेट के बल लेटकर हथेलियों को कंधों पर रखकर फर्श से लगाकर रखें. फिर इस आसन को करते समय पेडू फर्श से लगा रहे. इस अवस्था में केवल 5 सैकेंड बैठे रहे.

घुटनों के पीछे की बड़ी कंदरा में खिंचाव लाएं. पीठ के बल लेटे और घुटनों को जोड़ने के बाद दोनों हाथों को एक जांघ के नीचे रखें एवं घुटनों को छाती की ओर लाएं घुटनों के पीछे की बड़ी कंदरा में जब तनाव महसूस होने लगे तो पैर सीधा करें. दूसरे पैर के साथ भी यही क्रिया दोहराएं. इससे पीठ व पैरों की मांसपेशियों को लचीला बनाया जा सकता है. एरोबिक एक्सरसाइज भी लाभप्रद है. रक्त संचार बढ़ाने के लिए, पेशियों को सुदृढ़ करने के लिए जरूरी है. अगर पीठ में दर्द हो तो आप नियमित रूप से उक्त आसन जारी रखें. यह जरूर जान ले कि पीठ दर्द का कोई शर्तिया इलाज नहीं है, जो आप को लाभ पहुंचाए, वही प्रक्रिया प्रयोग में लाएं(Pet Dard Se Bachna hai to Kre regularly Exercise).

पेट दर्द में सावधानियाँ Pet Dard Me Savdhaniya

किसी भी प्रकार का आसन अपनाने से पूर्व किसी भी योग्य चिकित्सक या व्यायाम निर्देशक की सलाह जरूर ले. कई बार उल्टे सीधे और आधी अधूरी जानकारी के बल पर किए गए व्यायाम पीठ दर्द को ही बढ़ा देते हैं(Savdhaan Pet dard Ho Sakta hai khatarnak).

जो व्यक्ति नियमित रूप से व्यायाम करते हैं उन्हें तो कोई परेशानी होती नहीं है पर जो व्यक्ति अनियमित होते हैं वे परेशान होते हैं व्यायत केंद्रों पर समुचित जानकारी भी ले. पीठ दर्द की चिकित्सा की दृष्टि से प्राकृतिक चिकित्सा लाभकारी है. बराबर प्रोटीन युक्त आहार लें. शारीरिक श्रम के साथ मानसिक श्रम करें. पर हाडतोड़ मेहनत करें. तो आवश्यक दशा में आराम करें. कार्य क्षमता से ज्यादा नहीं करें तो अच्छा. श्रम का संतुलन बनाए रखें.

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