प्राकृतिक जीवन जिएं और सदैव स्वास्थ्य रहे Prakritik Jivan Jiye Aur Sadev Swasth Rahe

संसार और प्रकृति में सर्वत्र हमें एक अजीव सौंदर्य दिखता है. प्रकृति की शोभा नवीनता से परिपूर्ण दिखती है. जवानी में हमारे भाव फूलों की तरह खिल उठते हैं. जैसे अपने कोमल पत्तों के मध्य में गुलाब खिल उठता है. जवानी एक विशेष मनस्थिति का नाम है. जिसमें कार्य शक्ति तीव्रतम रहती है. जवानी बसंत है. संसार में एक अजीव आकर्षण प्रतीत होता है. वह अपने आप में नहीं समा सकता(Prakritik Roop se Swasth Manusya ki Pahchan hai)

शक्ति को संग्रह करना जवानी है उसे नष्ट कर देना या जल्दी लुटा देना बुढापा है. जो अपनी शक्ति को देर तक संचित रख सकेगा वह देर तक उतना ही सुख प्राप्त कर सकेगा जो अपनी शक्ति जितनी जल्दी खर्च करेगा वह उतना ही स्वस्थ जीवन कम जी पावेगा. शक्ति का ज्यादा खर्च करना ही वृद्धावस्था की निशानी है(Prakritik Aur Dirgh Jivan)

प्रायः देखा जाता है कि वृद्ध माता या पिता स्वस्थ रहते हैं किंतु उनके कम आयु के बच्चे उनके सामने अस्वस्थ और बूढ़े से दिखाई देने लगते हैं. इसका यथार्थ उत्तर यह है कि उनके बच्चों के अपने स्वास्थ्य की ओर यथेष्ट ध्यान न देकर समय से पूर्व ही अधिक खर्च कर डाला है. गंदी आदतों का शिकार होकर गलत रास्ते पर चलकर अपने इस सुंदर शरीर को घृणित रोगों का शिकार बना डाला(Prakriti Ka Anusarn Kare)

प्रकृति की तरह प्राकृतिक बनो Prakriti Ki Tarah Prakritik Bano

अब पछताए होत क्या, जब चिड़िया चुग गई खेत. इसके लिए अपनी शरीर रूपी मशीन को शुरू से ही संभालकर व्यवहार में लाना ही बुद्धिमानी है. वे लोग भाग्यशाली हैं, जो अधिक आयु होने पर भी मोटापे या दुबलेपन का शिकार नहीं होते. अपने आज के ध्यान में भविष्य को मत भूल जाइए. नहीं तो बाद में पछताना पड़ेगा. अपनी मानसिक तथा शारीरिक पूंजी का ध्यान रखें तो यह पूंजी अंत तक आपका साथ निभाएगी और आप सारी उम्र आराम से जी सकेंगे. मन में पवित्र विचारधारा रखने से शक्ति संतुलित रहती है. आप सब शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य के नियमों का दृढ़ता से पालन करें. स्मरण रखिए, अपनी शक्ति को संचित रखना मानो जवानी को रोकना है. शरीर का सार वीर्य है, इसको संचित रखकर ही हम सुंदर स्वास्थ्य और दीर्घ जीवन प्राप्त कर सकते हैं. अधिक चाय और कॉफी पीना भी हानिकारक है इससे रक्त दूषित हो जाता है. बदहजमी की शिकायत प्रारंभ हो जाती है. शरीर के स्नायु कमजोर हो जाते हैं. मानसिक कमजोरी बढ़ जाती है. जल भी बड़े महत्व का भोजन है. जल को धीरे-धीरे चूस कर पीने और उसमें विचार शक्ति द्वारा पोषण प्रदान करने से बहुत लाभ मिलता है. जल का प्रयोग अधिक कीजिए जिसमें मूत्र और पसीने के द्वार विजातीय द्रव्य और संचित विष निकल सके जल पचे हुए भोजन के अवशिष्ट अंश मल को जल्दी से नीचे की ओर धकेल देने की क्रिया के लिए आवश्यक है. दिन भर में कम से कम 6 गिलास जल सेवन करना चाहिए. कभी कभी इसमें नींबू की बूंदे भी मिला लेनी चाहिए.

प्राकृतिक जीवन का मूल मंत्र है Prakritik Jiwan Ka Mul Mantr Hai

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प्राकृतिक चिकित्सा व्यायाम, शुद्ध वायु, हल्का व सुपाच्य भोजन आदि रोगों को अच्छा करने के अतिरिक्त शरीर के दूसरे विकारों को भी नष्ट कर देती है क्योंकि प्राकृतिक चिकित्सा द्वारा रोग को बलपूर्वक जहां का तहां दबाया नहीं जाता बल्कि इसका कारण दूर किया जाता है. स्वयं प्रकृति रोगों को अच्छा करती है. प्राकृतिक जीवन जीने वाले जंगल के प्राणी कई प्रकार के रोगों से मुक्त रहते हैं. दिन को सोना रात को जागना यह प्राकृतिक विरुद्ध कार्य है ऐसे व्यक्ति का स्वस्थ रहना मुश्किल है. प्रकृति की आज्ञा अनुसार चलकर ही हम जीवनदान प्राप्त कर सकते हैं. सादगी भरा, सरल और निर्दोष जीवन बिताने में ही हमारा कल्याण है. याद रखो कि बढ़िया खाद्य पदार्थों में इतना बल नहीं है जो पाचन शक्ति में बल है. मुख, आमाशय, जिगर, आंत आदि से जो पाचक रस निकलते हैं वे अच्छी पाचन शक्ति द्वारा भोजन के साथ मिलकर वे उसे अपनी आवश्यकता पूरी करने वाला बना लेते हैं. पाचन शक्ति ठीक न हो तो कीमती से कीमती ताकतवर कहे जाने वाले पदार्थ भी कुछ लाभ न पहुंचा सकेंगे. पाचन शक्ति ठीक न होने से यदि उससे रस रक्त ही न बना तो उसके द्वारा पोषण कैसे मिलेगा. यदि पाचन ठीक हो तो साधारण सा भोजन भी खूब बल प्रदान कर सकता है. किसान साधारण रोटी, चने के साग से खाकर खूब बलवान बना रहता है और सारा दिन खेतों मे काम करके रात को मीठी नींद सोता है. यह सब प्राकृतिक जीवन जीने का ही कमाल है. आप भी प्राकृतिक जीवन अपनाइए और उत्तम स्वास्थ्य पाईये(Prakriti Upchar Apnaye Aur Jivan Ko Badhaye).

पाचन शक्ति बढ़ाने एक सरल प्रयोग Pachan Shakti Badhane ka Ek saral Prayog

  1. महाशंख वटी 2 वटी तथा पेट दर्द के लिए भी लाभकारी है.
  2. शूलवर्जिणी वटी 1 गोली
  3. अग्नितुंडी वटी 1  गोली

यह एक मात्रा है ऐसी एक मात्रा दोपहर और एक मात्रा रात को भोजन के 15 मिनट बाद ताजा पानी से 10 दिन तक सेवन करें. हल्का सुपाच्य भोजन करें. पाचन शक्ति के लिए उत्तम योग है.

सेब का जूस करे अस्थमा से बचाव Apple Jus Kare Asthma Se Bachav

अगर आप दमा के खतरे से बचना चाहते हैं, तो सेब का जूस रोजाना पीये. रोजाना एक केला खाने से भी दमा होने का खतरा एक तिहाई कम हो जाता है. विशेषज्ञों ने इस नतीजे तक पहुंचने के लिए प्राइमरी स्कूल के 2700 बच्चों का अध्ययन किया. अध्ययन में उन्होंने पाया कि जो बच्चे रोजाना कम से कम एक बार सेब का जूस पीते थे, उनमें दमा की शिकायत होने की आशंका 50 फीसदी कम थी यह देखकर दंग रह गए कि साबुत सेब खाने की अपेक्षा सेब का जूस पीने से ज्यादा सुरक्षा मिलती है. यानी कि सेब खाने की बजाय इसका जूस पीना ज्यादा हितकारी है.

जब आंख फड़कने लगे तो हो जाएं सावधान ! Jab Aankh Fadkane Lage To Ho Jaye Sawdhan !

आंखों की थकान और सामान्य तनाव से आंखों की पलकें फड़कती है. कंप्यूटर पर काम करते या कुछ पढ़ते वक़्त बीच बीच में चंद सेकंड के लिए अगर आप किसी चीज पर आंखों को फोकस करते रहे, तो हो सकता है. पलकें न फड़के! इसके अलावा आंखों पर ‘वार्म कंप्रेस’ (गर्म सेक) रखने या आंखों की मालिश करने से भी फडकती पलकों से आराम मिल सकता है. क्योंकि कैफीन का सेवन कम करने से भी फायदा हो सकता है, क्योंकि कैफीन से पेशियों में फड़कना पैदा हो सकती है. बहरहाल, 3-4 हफ्ते से ज्यादा अरसे तक अगर पलकों की फड़कन जारी रहे, तो नेत्र रोग विशेषज्ञ से मिले. हो सकता है, आपकी पलकें इसलिए फड़क रही हो कि आंखे कमजोर होने के कारण ठीक से देख पाने की कोशिश में वे टेढ़ी हो रही हो. पलकों की फड़कन किसी न्यूरोलॉजिकल परेशानी का संकेत भी हो सकती है. पलकों की फड़कन अगर बद से बदतर होने लगे, तो हल्के ट्रैक्विलाइजर्स या बोटयुलियम टॉक्सिन (बोटाँक्स) के इंजेक्शन की भी जरूरत पड़ सकती है.

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