प्रेग्नेंसी प्री काउंसलिंग है बहुत जरूरी Why Pre-Counseling Is Necessary Before Pregnancy

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प्रेग्नेंसी प्री काउंसलिंग है बहुत जरूरी Why Pre Counseling Is Necessary Before Pregnancy – गर्भावस्था के दौरान प्रायः सभी स्त्रियां अपने खानपान का ध्यान रखती हैं लेकिन उन्हें इस बात की जानकारी नहीं होती कि स्वस्थ शिशु के जन्म के लिए यह बहुत जरूरी है कि गर्भधारण के पहले से ही अपनी सेहत का पूरा ध्यान रखा जाए | अगर आप भी अपना परिवार बढ़ाने की योजना बना रही हैं तो इन बातों का ध्यान जरूर रखें :

1. आप जिस माह में कंसीव (conceive) करना चाहती हैं, कम से कम उसके तीन माह पहले से आपको अपने खानपान के प्रति सतर्क हो जाना चाहिए | अपने रोजाना के भोजन में कैल्शियम, आयरन और प्रोटीन की मात्रा बढाएं | इसके लिए हरी पत्तेदार सब्जियां, मिल्क प्रोडक्ट्स और फलों का पर्याप्त मात्रा में सेवन करें |

2. प्री प्रेग्नेंसी काउंसलिंग (Pre Counseling) के लिए पति-पत्नी दोनों को स्त्री रोग विशेषज्ञ से सलाह जरूर लेनी चाहिए | वहां डॉक्टर द्वारा इस बात की पूरी जानकारी हासिल की जाती कि पति-पत्नी को बचपन में लगाए जाने वाले सारे टीके लग चुके हैं या नहीं ? अगर किसी स्त्री को रुबेला का वैक्सीन नहीं लगा हो तो कंसीव करने से पहले उसे यह टीका लगवाना बहुत जरूरी होता है | लेकिन यह वैक्सीन लगवाने के बाद कम से कम 3 महीने तक कंसीव नहीं करना चाहिए |

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3. गर्भधारण से पहले स्त्री के लिए डायबिटीज (diabetes) की जांच बहुत जरूरी है क्योंकि अगर मां को यह समस्या हो तो बच्चे को भी डायबिटीज होने की आशंका रहती है | यही नहीं बच्चे की आंखों पर भी इसका साइड इफेक्ट हो सकता है |

4. अगर कोई स्त्री गर्भनिरोधक गोलियों का सेवन करती है तो उसे कंसीव करने से कम से कम 3 महीने पहले से इन गोलियों का सेवन बंद कर देना चाहिए |

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5. कंसीव करने के कम से कम 3 महीने पहले से डॉक्टर की सलाह के अनुसार फॉलिक एसिड (folic acid) का सेवन शुरू कर देना चाहिए | क्योंकि सबसे पहले बच्चे का मस्तिष्क और उसकी रीढ़ की हड्डी का निर्माण शुरु होता है और इसे बनाने में फॉलिक एसिड की महत्वपूर्ण भूमिका होती है | यह बच्चे के विकास के लिए ऐसा आवश्यक तत्व है कि इसकी कमी से बच्चे को नर्वस सिस्टम (Nervous System) से संबंधित समस्याएं हो सकती हैं |

6. ज्यादातर भारतीय स्त्रियों को एनीमिया (Anemia) की समस्या होती है और हीमोग्लोबिन की कमी के कारण मां और बच्चे दोनों की जान को खतरा हो सकता है | इसलिए गर्भधारण से पहले स्त्री के लिए फुल ब्लड काउंट टेस्ट बहुत जरूरी होता है |

7. गर्भधारण से पहले पति-पत्नी दोनों को थैलेसीमिया (Thalassemia) की जांच जरुर करवानी चाहिए | यह आनुवंशिक बीमारी है | अगर पति-पत्नी दोनों को थैलेसीमिया माइनर हो तो इससे बच्चे को मेजर थैलेसीमिय होने का खतरा होता है, जो कि एक गंभीर बीमारी है और रोगी को हर तीन महीने के अंतराल पर ब्लड टांसफ्यूजन की आवश्यकता होती है |

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8. पति-पत्नी दोनों के लिए एचआईवी टेस्ट (HIV Test) करवाना बहुत जरूरी होता है | क्योंकि अगर मां एचआईवी पॉजिटिव हो तो बच्चा भी इसका शिकार हो सकता है (If mother is HIV positive then child can also be HIV Positive) |

9. हेपेटाइटिस-बी यौन संक्रमण से फैलने वाला रोग है (Hepatitis – B is also a sexually contagious disease) | इसलिए पति-पत्नी दोनों को इसकी जांच करवानी चाहिए और इसके टीके भी जरूर लगवा लेना चाहिए |

10. कंसीव करने से पहले स्त्री के लिए सिफलिस की जांच भी जरुरी है | क्योंकि इससे डिलिवरी के समय कई तरह की समस्याएं आ सकती हैं |

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11. बच्चे के लिए प्लानिंग करते समय पति-पत्नी दोनों ही एल्कोहल और सिगरेट से दूर रहें | स्त्री को इस मामले में जरुर सतर्क रहना चाहिए, क्योंकि इससे शारीरिक और मानसिक रूप से विकृत शिशु के जन्म या मिसकैरेज की आशंका रहती है |

12. अगर आपके या पति के परिवार में किसी खास बीमारी की फैमिली हिस्ट्री रही है तो उसके बारे में डॉक्टर को जरूर बताएं |

13. अगर आप अपनी किसी भी स्वास्थ्य समस्या के लिए नियमित रुप से किसी दवा का सेवन करती हैं तो उसके बारे में भी अपनी डॉक्टर को जरूर बताएं |

14. मां बनने से पहले हर स्त्री को अपने वजन पर ध्यान देना चाहिए | वजन बीएमएस (बॉडी मास इंडेक्स) के अनुसार पूरी तरह संतुलित होना चाहिए | ओवरवेट या अत्यधिक दुबलापन ये दोनों ही स्थितियां गर्भधारण के लिए नुकसानदेह मानी जाती हैं | अगर स्त्री का वजन बहुत ज्यादा हो तो इससे प्रीमैच्योर डिलिवरी की आशंका बनी रहती है, वहीं कम वजन के कारण भी गर्भावस्था के दौरान उसे कई तरह की स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है |

15. अगर पति-पत्नी दोनों में से किसी को भी डिप्रेशन, हाईपरटेंशन या किसी भी तरह की कोई मनोवैज्ञानिक समस्या हो तो आप उसके बारे में भी डॉक्टर को जरूर बताएं | क्योंकि ऐसी समस्याओं के कारण बच्चे के जन्म के बाद उसकी सही परवरिश में दिक्कतें आ सकती हैं | इसलिए जब आप प्री प्रेग्नेंसी काउंसलिंग से पूरी तरह संतुष्ट हो जाएं तभी अपने पारिवारिक जीवन की शुरुआत करें |

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