मासिक धर्म भी बताता है आपकी सेहत का हाल Precautions During Periods In Hindi

Precautions During Periods In Hind Language

Precautions During Periods In Hindi मासिक धर्म भी बताता है आपकी सेहत का हाल

पीरियड्स (माहवारी) के समय हर महिला थोड़ी असहज अवश्य महसूस करती है, पर यदि पीरियड्स नॉर्मल व दर्दरहित होते हैं तो वे पांच दिन और दिनों की तरह ही गुज़र जाते हैं | लेकिन आप पीरियडस के दौरान यदि बेहद असहज महसूस करती हैं तो आपको डॉक्टर के पास जाने की ज़रूरत है, क्योंकि पीरियड्स के दौरान आप कैसा महसूस करती हैं, उससे आपकी सेहत के बारे में जाना जा सकता है | आइए, जाने इसके बारे में डिटेल में और कौन कौन सी सावधानियां ऐसे समय में रखनी चाहिए जिससे कम से कम समस्या हो |

पीरियड्स समय पर होना Periods Ka Samay Par Nahi Hona

इसका मतलब है कि आपको कोई परेशानी नहीं है | आपके पीरियड्स हर महीने नियमित समय पर होते हैं, तीन या पांच दिन तक नॉर्मल ब्लीडिंग होती है, दर्दरहित होते हैं, रक्त के थक्के नहीं बनते और आपको पूरे दिन में केवल दो या तीन बार ही पैड बदलने पड़ते हैं, तो आपके पीरियड्स नॉर्मल माने जाएंगे |

आपकी सेहत कैसी है – यदि आपकी पीरियड्स समय पर आते हैं, तो इसका मतलब यह हुआ कि आपके शरीर के महत्वपूर्ण फंक्शन नॉर्मल हैं और ठीक से कार्य कर रहे हैं | नियमित पीरियड्स अच्छी सेहत की निशानी होते हैं (Regular Periods Are Sign Of Good Health For Women)| डॉक्टरों के अनुसार, पिट्यूटरी ग्लैंड ओवरीज़ तक रासायनिक संदेश भेज रहे हैं और ओवरीज़ नियत समय पर हार्मोंस उत्पन्न कर रही है तो आपकी डॉक्टर के पास जाने की ज़रूरत नहीं है |

समस्या होने पर जानकारी और उपचार जरूरी है – पीरियड्स से पहले व्हाइट डिस्चार्ज गाढ़ा या अधिक हो तो घबराएं नहीं, क्योंकि यह नार्मल है | यदि पीरियड्स किसी महीने एक दिन कम या ज़्यादा दिन तक होते हैं तो भी इस बात से परेशान न हो, पर यदि यह स्थिति एक या दो दिन से अधिक समय तक बनी रहती है तो चेकअप जरुर करवाएं | जिन महिलाओं के पीरियड्स हमेशा नियमित रहते हों, उन्हें अचानक इस दौरान बहुत तेज़ दर्द होने लगे, रक्त के थक्के निकलें तो इस स्थिति में भी तुरंत डॉक्टर से मिलें |

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पीरियड्स के दौरान असहनीय दर्द हो Period Time Pain In Hindi

यदि पीरियड्स के दौरान आपको असहनीय दर्द होता है, रोज़मर्रा के काम करने में भी परेशानी महसूस होती है, अधिकतर समय बिस्तर पर लेटकर गुजारना पड़ता है और गरम पानी यानि हॉट वाटर बैग के बिना रह नहीं पातीं, तो संभवता: आप डिस्मेनोरिया (कष्टातर्व) से पीड़ित हैं |

आपकी सेहत कैसी है – पीरियड्स के दौरान अधिकांश महिलाओं को दर्द होता है | यह दर्द पीरियड्स से 1 या 2 दिन पहले या पीरियड्स के दौरान शुरू होता है, तब से लेकर तीन दिनों तक बरकरार रहता है | गायनाकोलॉजिस्ट के अनुसार, “ ऐसा दर्द युवा लड़कियों में ज़्यादा होता है | यदि यह दर्द लगातार बढ़ता रहता है तो इसका मतलब है कि शरीर में कहीं कोई कमी है | ऐसा पीरियडूस के दौरान अत्यधिक इंफ़्लेमेटरी केमिकल्स (प्रोस्टाग्लैंडिंस) के स्राव के कारण होता है | यह दर्द इंफ़ेक्शन की वजह से भी होता है, जिसे हम पेल्विक इंफ़्लेमेटरी डिसीज़ (पीआईडी) कहते हैं और इसकी वजह ओवरी में सिस्ट बनना भी होता है | इससे यूटेरस की नलियां भी खराब हो जाती हैं | ओवरी के आसपास के हिस्सों व यूटेरस के बाहर का हिस्सा भी इससे प्रभावित होता है |

समस्या होने पर जानकारी और उपचार जरूरी है ओवरी में सिस्ट है कि नहीं, यह जानने के लिए अल्ट्रासाउंड कराना चाहिए | “डाक्टर से परामर्श के बाद, दिन में 3 बार मेफ्टाल-स्पास ली जा सकती है या दर्द एक-दो दिन तक ही रहता हो तो एनासिन या पैरासिटामॉल भी ली जा सकती है | हीटिंग पैड्स का प्रयोग भी किया जा सकता है | इसमें बहुत आराम मिलता है |

यदि पीरियड्स अनियमित हो Irregular Period Problem Solution In Hindi

यदि आपके पीरियड्स के बीच का अंतर 21 दिन से कम या 35 दिनों से अधिक होता है, तो इसका मतलब है कि आपकी माहवारी अनियमित है |

आपकी सेहत कैसी है – पीरियड्स असमय आने का अर्थ है उन हार्मोस में असंतुलन, जो माहवारी को संतुलित व नियमित रखते हैं | हार्मोनल असंतुलन से पीड़ित महिला के साथ ही ऐसा होता है | ऐसा होने की मुख्य वजहों में मोटापा, पॉलीसिस्टिक ओवेरियन डिसीज़ (पीसीओडी), अव्यवस्थित जीवनशैली व पोषण की कमी होना होता है | हार्मोनल सिस्टम बिगड़ जाने से इंसुलिन भी बढ़ जाता है और चेहरे पर मुंहासे भी निकल आते हैं | शारीरिक व मानसिक तनाव भी इसकी एक वजह है |

समस्या होने पर जानकारी और उपचार जरूरी है ओवरी संबंधी किसी भी तरह की प्रॉब्लम तो नहीं है, यह जानने के लिए पेल्विक सोनोग्राफ़ी करानी चाहिए | ऐसी अवस्था में लाइफ़ स्टाइल मैनेजमेंट व मरीज़ की डायटीशियन के पास जाना चाहिए | वैसे इसमें ब्रीदिंग एक्सरसाइज सबसे उत्तम विकल्प है | मरीज़ को निर्धारित काम और आराम की भी सलाह दी जाती है | यदि इसका समय पर इलाज नहीं कराया जाए तो भविष्य में गर्भधारण करने में भी दिक्कत आ सकती है | ऐसे में हेल्दी डायट लेना बेहद ज़रूरी है |

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पीरियड्स के दौरान अधिक ब्लीडिंग होना Heavy Bleeding During Periods In Hindi

यदि पीरियड्स नियमित हों, पर साथ ही इतनी हैवी ब्लीडिंग होती हो कि एक साथ दो पैड इस्तेमाल करने की नौबत आ जाए । तो इसे मेनोरेजिया कहा जाता है | इसमें रक्त अधिक मात्रा में निकलता है, रक्त के थक्के निकलते हैं और बार-बार पैड बदलने पड़ते हैं |

आपकी सेहत कैसी है – हैवी ब्लीडिंग इस बात का संकेत है कि आपके हार्मोस असंतुलित हो गए हैं | एस्ट्रोजन व प्रोजेस्टेरॉन नामक हार्मोंस पीरियड्स को प्रभावित करते हैं, क्योंकि ओवेल्यूशन के दौरान वे उस प्रक्रिया को संतुलित रखते हैं | “यदि इन हार्मोस का बैलेंस बिगड़ जाता है तो ठीक ढंग से ओवेल्यूशन नहीं होता है | इसकी एक और वजह यूटेरस में फायब्रॉइड होना भी है | ऐसा होने पर यूटेरस या सर्विक्स कैंसर होने का खतरा भी काफ़ी बढ़ जाता है |

समस्या होने पर जानकारी और उपचार जरूरी है हैवी ब्लीडिंग होने से महिलाओं के लिए काम करना तो कठिन हो ही जाता है, साथ ही चलने में भी दिक्क़त महसूस होती है | अक्सर हैवी ब्लीडिंग होने पर औरतें घर से निकलना ही बंद कर देती हैं | इसके लिए बायोप्सी कराने की सलाह दी जाती है | इसे जीवनशैली व डायट में परिवर्तन कर ठीक किया जा सकता है | यदि मेनोपॉज़ के समय ऐसा हो तो चिंता की बात नहीं है |

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पीरियड्स मिस होना Periods Missed Problem And Solution

नियमित व दर्दरहित पीरियड्स के बाद अचानक आपकी पीरियड्स न हो तो आप सोच सकती हैं कि आप प्रेग्नेंट हैं | आप गर्भनिरोधक का प्रयोग कर रही हों, तब भी | पर यदि प्रेग्नेंसी रिपोर्ट निगेटिव आती है तो इसका अर्थ है कि कहीं कुछ गड़बड़ है |

आपकी सेहत कैसी है – प्री-मैच्योर मेनोपॉज़ के अतिरिक्त पीरियड्स मिस होने की कई वजहें हो सकती हैं, जैसे- तनाव, हार्मोनल असंतुलन, थायरॉइड या जीवनशैली में बदलाव या काम के घंटों में बढ़ोत्तरी होना | प्रोलेक्टिव हार्मोन बढ़ने से भी पीरियड्स मिस होने की संभावना रहती है | कुछ गर्भनिरोधक गोलियों के सेवन से भी कभी-कभी पीरियड्स नहीं आते हैं |

समस्या होने पर जानकारी और उपचार जरूरी है इसे दवाई देकर ठीक किया जा सकता है | इसके अलावा अपनी जीवनशैली में बदलाव लाकर, तनाव को कम करके भी इसे ठीक किया जा सकता है | लेकिन यह परेशानी यदि लंबे समय तक बरकरार रहे तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें |

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