प्याज खाने के फायदे Pyaz Khane Ke Fayde In Hindi

प्याज खाने के फायदे Pyaz Khane Ke Fayde In Hindi Language

प्याज खाने के फायदे (Pyaz Khane Ke Fayde In Hindi Language)

प्याज़ एक वनस्पति है जिसको सब्ज़ी के रूप में प्रयोग किया जाता है । भारत में महाराष्ट्र में प्याज़ की खेती सबसे ज्यादा होती है । प्याज का उपयोग सब्जी, सलाद, मसाले तथा अचार तैयार करने के लिए किया जाता है । प्याज के द्वारा अनेक बिमारियों को दूर किया जाता है क्योंकि प्याज में विटामिन सी, आयरन, तांबा, गंधक आदि शरीर को शक्ति देने वाले पदार्थ रहते है | यहाँ हम कुछ रोगों का इलाज प्याज द्वारा कैसे करें उस पर चर्चा कर रहें है |

रतौंधी – सुबह-सायं, दिन में दो बार प्याज का रस अंजन करने से रतौंधी ठीक हो जाती है | धुन्ध, जाला, गुबार तथा नाखूना आदि रोग भी ठीक हो जाते हैं | नियमित प्रयोग करना चाहिए |

शहद में प्याज का रस मिलाकर आँखों में लगाने से आँखों के अनेक रोग- धुंधलापन, पानी आना, करकराहट, चिपचिपाना व नजला का रोग ठीक हो जाता है |

कान का दर्द – प्याज का हल्का गर्म रस कान में डालें | 2-3 दिन ऐसा करने से ही दर्द ठीक हो जायेगा |

पौरुष शक्ति की वृद्धि – 1. यदि आधिक मैथुनरत रहने, हस्तमैथुन, अप्राकृतिक मैथुन, स्वप्नदोषों की अधिकता आदि के कारण ‘सैक्स-पावर’ में कमी आ गयी हो तो अदरक व प्याज का रस तथा शहद समान मात्रा में मिलाकर सुबह-सायं 40 दिन तक लें | पौरुषशक्ति बढ़ जायेगी, वीर्य गाढ़ा हो जायेगा और उसमें विर्याणुओं की वृद्धि होगी |

2. लाल प्याज के बारीक टुकड़े 50 ग्राम, शुद्ध घी 50 ग्राम, गाय का दूध 250 ग्राम को गाढ़ा हो जाने तक धीमी आग पर औंटाकर पिसी हुई मिश्री मिलायें और ठण्डा करके प्रातकाल प्रतिदिन सेवन करें | केवल दो सप्ताह में ही समस्त यौन संबंधी दुर्बलता दूर हो जायेगी |

दमा, श्वास रोग – सफ़ेद प्याज का रस, गवारपाठे के गूदे का रस, अदरक का रस तथा शहद समान मात्रा में मिलाकर किसी कांच की शीशी में भरकर ढक्कन लगाकर तीन दिनों के लिए साफ़-सुथरी (जमीन) में गाड़ दें | चौथे दिन निकालकर इस औषध को दिन में तीन बार (सुबह-दोपहर-सायं) 5 ग्राम की मात्रा में दें, रोग जाता रहेगा |

परहेज – मिठाई, उड़द की दाल, तले हुए पदार्थ, मिर्च, तेज मसालों का सेवन, बासी व गरिष्ठ भोजन, नया अनाज, ठंडा या बासी पानी, नमी, धूल व धुंए वाले स्थानों पर निवास से परहेज करना चाहिए |

गठिया – सरसों का तेल व प्याज का रस मिलाकर मालिश करने से गठिया में आराम हो जाता है |

फोड़ा – फोड़ा पककर वेदना पैदा कर रहा हो तो प्याज कूट कर उसमें हल्दी, घी, गेहूँ का आटा व पानी मिलाकर पोटली बनायें और हल्का गर्म-गर्म ही फोड़े पर बाँध दें, फोड़ा फूटकर मवाद निकल जायेगा |

मधुमक्खी, बर्र आदि काट लेने पर – प्याज पीस कर दंशित स्थान पर लेप करें |

कुत्ता या सियार द्वारा काट लेने पर – प्याज पीस कर शहद में मिलायें, इसका दंशित स्थान पर लेप करें व प्याज का रस पीयें, विष उतर जायेगा |

बिच्छू का डंक लगने पर – दंशित स्थान पर प्याज का रस मलें एंव थोड़ा सा गुड़ खायें | काले दागों पर प्याज का रस लगायें | मस्सों पर प्याज का रस लगायें |

जी मिचलाना – प्याज का नमक के साथ सेवन करें |

बिवाईयां – कच्चा प्याज पीस लें उसे बिवाईयों पर बांधें |

हिस्टीरिया – प्याज का रस सुंघाने से मूर्च्छा समाप्त हो जाती है |

दांतों का क्षय – कच्चा प्याज खाने से दंतक्षय, साँस की दुर्गन्ध नष्ट हो जाती है |

लकवे में प्याज का सेवन करें |

सर्पदंश – प्याज को कूटकर उसका रस निकाल लें | उक्त रस एंव सरसों का तेल 15-15 ग्राम लेकर भलीभांति मिला लें, यह रोगी की एक खुराक है | रोगी को आधा-आधा घंटे के अंतर से 3 खुराक देने से सर्पविष उतर जायेगा |

नकसीर, नाक से खून आना – प्याज का रस नाक में डालें |

दिल का दौरा पड़ना (Heart Attack) – एक पलेट प्याज के टुकड़े तल लें | उन्हें प्रतिदिन सुबह के समय उचित मात्रा में, नाश्ते के रूप में लेने से दिल के दौरे नहीं पड़ेंगें |

स्वप्नदोष – सफ़ेद प्याज का रस 10 ग्राम, अदरक का रस 8 ग्राम एंव 5 ग्राम शहद- पहले तीनों पदार्थ आपस में मिला लें | इस मिश्रण में 3 ग्राम घी डालकर भलीभांति मिलायें | प्रतिदिन इसे रात को सोते समय पीयें |

प्रतिदिन भोजन करते समय कम-से-कम एक कच्चा प्याज खाने से ह्रदय की धड़कन सामान्य हो जाती है, ह्रदय को शक्ति मिलती है |

लू से बचाव – के लिए गर्मी के दिनों में भोजन के साथ कच्ची प्याज का सेवन करना चाहिए |

हैजा से बचाव – प्याज, नींबू व अदरक का रस, पानी, सेंधानमक व पिसी कालीमिर्च मिलाकर दिन में 3-4 बार पीते रहने से हैजा नहीं हो पायेगा |

हैजा हो जाना – 1. प्याज का रस गुनगुना करके पिलावें | 2. प्याज के रस में पोदीने का रस मिलाकर प्रति 10 मिनट बाद पिलाते रहें |

पथरी – प्याज के रस में पिसी हुई मिश्री डालकर शर्बत बनायें और पी जायें, कुछ ही दिनों में पथरी चुरा होकर निकल जायेगी |

जलोदर – कच्चे प्याज के बार-बार खाने से पेशाब खुलकर होता है और पेट में हल्कापन आ जाता है |

प्याज का अधिक सेवन रक्ताल्पता को दूर करता है क्योंकि प्याज में विटामिन सी, आयरन, तांबा, गंधक आदि शरीर को शक्ति देने वाले पदार्थ रहते है |

बवासीर – प्याज के रस में घी व देशी खांड मिलाकर खाना चाहिए |

कान का दर्द – प्याज का रस किंचित गर्म करके कान में टपकायें, बहरापन, दर्द व पीप निकलना बन्द हो जायेगा |

गंजापन – गंजी जगह प्याज का रस मलते रहने से पुनः बाल उगने लगते हैं तथा उनका झड़ना रुक जाता है |

दस्त व मरोड़ – 1. दो चम्मच प्याज के रस में सरसों के दाने के बराबर अफीम मिलाकर रोगी को दे दें, मरोड़ व दस्त रुक जायेगा | 2. प्याज के रस को नाभि में लेप करने से दस्त बन्द हो जायेंगे | 3. यदि दस्तों में खून या आंव भी आ रहा हो तो प्याज के टुकड़े दही के साथ खाने चाहिये |

नशा – नशा कम करने के लिए रोगी व्यक्ति को एक कप प्याज का रस पिला दें |

टी.बी.– कच्चे प्याज का सेवन करने से टी.बी. के कीटाणु नष्ट हो जाते हैं |

मासिक धर्म की गड़बड़ी – दोनों समय भोजन के एक घंटे बाद लाल प्याज के 25 ग्राम रस में 5 ग्राम रसौत घोल कर रोगिणी को पिला दें, यह एक मात्रा है | ऐसा कुछ दिनों तक करने से मासिक-धर्म समय से होने लगेगा और संबंधित विकार- मन्दाग्नि, कमर में दर्द, आँखों में जलन आदि भी मिट जायेंगे |

दांत-दर्द – 1. प्याज का टुकड़ा दर्द के स्थान पर रखें और मसूढ़े फूलने पर प्याज का रस मसूढ़ों पर रगड़ें | 2. प्याज के टुकड़ों के साथ मंगरैला (कलौंजी) चिलम में भरकर हुक्का भरकर पीने से मसूढ़ों की सूजन व दांतों का दर्द ठीक हो जाता है |

आँखों में जाला पड़ना – प्याज के रस में रुई की बत्ती भिगोकर छाया में सुखा लें और टिल के तेल के दीपक में डालकर काजल बनाकर प्रति रात सोते समय लगायें, पुतली पर फैला सफ़ेद जाला हट जायेगा |

मिर्गी आना – रोगी को प्याज सुंघाने से चेतना जल्दी ही आ जाती है | प्याज के रस में पानी मिलाकर रोगावस्थानुसार पिलाते रहने से मिर्गी के दौरे पड़ना सदैव के लिए समाप्त हो जाता है |

विविध उदर-रोग – प्याज के सेवन से अफारा, मन्दाग्नि, अजीर्ण, भोजन के प्रति अरुचि, पित्ताशय की गड़बड़ी दूर होती है और भोजन के प्रति रूचि बढ़ती है |

ज्ञातव्य – 1. प्याज का औषधि के रूप में सेवन करना अधिक लाभप्रद रहता है, भोजन के रूप में इसके प्रयोग से बचना चाहिए क्योंकि प्याज के सेवन से मानसिक उत्तेजना, तामसिक वृत्तियाँ, अकारण क्रोध पैदा होना आदि दुर्गुण बढ़ जाते हैं | “ मूत्रव्याधियों से संबंधित मरीजों के लिए प्याज का सेवन हानिकारक सिद्ध हो सकता है | 2. मानसिक दुर्बलता, पेट फूलना, सिर-दर्द, वात वेदना आदि व्याधि भी प्याज के अधिक सेवन से लग सकती है | 3. प्याज को प्रयोग में लाने से पूर्व नमक के पानी में धो लेने से इसके अनेक दुर्गुणों से बचा जा सकता है |

Be the first to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published.


*