Ashtak Rog Ke Baare Me Batayen

Hello asked 2 years ago

आतशक का कारण इस रोग को गरमी के नाम से भी जाना जाता है। वेश्याएं अक्सर इस रोग से ग्रस्त रहती हैं जिनके साथ संभोग करने या इस तरह के व्यक्ति के संपर्क में रहने, उसका जूठा भोजन करने या उसके अधोवस्त्र पहनने से यह रोग होता है। इस रोग के लक्षण आमतौर पर 4-5 सप्ताह में प्रकट होते हैं।

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Ghar Ka Vaidya Staff answered 2 years ago

 
आतशक का लक्षण
पुरुष की जननेन्द्रिय के अग्रभाग पर चारों तरफ फुंसी उठ आती है जो तीन-चार दिन बाद फूट जाती है तथा घाव हो जाता है। रोग के 3-4 सप्ताह बाद जांघों के जोड़ों में गांठ उठ आती है। प्रारंभिक स्थिति के बाद 3-4 माह में सारे शरीर पर छोटे-बड़े दाने और लाल चकते उठ आते हैं, होंठों पर घाव हो जाते हैं, हड्डियों में दर्द, गठिया आदि शिकायतें पैदा हो जाती हैं और अंतत: पीड़ित व्यक्ति अपाहिज हो जाता है।
आतशक का उपचार
नीबूः पानी में नीम के पत्ते उबालकर पोटेशियम परमेगनेट का एक दाना घोल दें। इस पानी से घावों को 2-3 बार धोएं। इसके पश्चात अरीठे का छिलका 50 ग्राम, 25 ग्राम सफेद कत्था, 15 ग्राम कलमी शोरा तथा तवे पर फुलाया छह ग्राम नीला थोथा लेकर नीबू के रस में मिलाकर चने के आकार की छोटी-छोटी गोलियां बना लें। सुबह-शाम 1-1 गोली पानी के साथ लें। एक-दो माह तक इस उपचार को अपनाने से काफी लाभ होता है।
पथ्य-अपथ्यः रोगी को संभोग बिल्कुल नहीं करना चाहिए। तले हुए, तेज मसालेदार पदार्थ, लाल मिर्च तथा गर्म प्रकृति के पदार्थों का सेवन नहीं करना चाहिए।

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