रूमेटाइड आर्थ्राइटिस क्या है और घरेलु उपचार Rheumatoid Arthritis Kya Hai Aur Gharelu Upchar

हमारा प्रतिरोधी तंत्र न्यू तो बाहरी व्याधियों से हमारे शरीर की रक्षा के लिए बना है, लेकिन अगर कोई ऐसा रोग शरीर को घेर ले जिसमें यह रक्षा तंत्र ही शरीर का दुश्मन बन जाए तो स्थिति असामान्य हो जाती है. ऐसा ही एक रोग है रूमेटाइड आर्थ्राइटिस (Rheumatoid Arthritis Jodo Se sambandhit Rog Hai ).

आधुनिक समय में जहां प्रगति और विकास के नाम पर व्यक्ति ने जीवन में सुख सुविधा के साधन जुटा लिए हैं वही इन साधनों को जुटाने के एवज में वह यह भूलता जा रहा है कि अच्छा स्वास्थ्य जीवन के समस्त सुखों का आधार है. आज की जटिल जीवनशैली व खान पान की बदलती आदतों के कारण स्वास्थ्य की ओर ध्यान देना जिम्मेदार ही नहीं है, जरूरत भी बन गई है.

रूमेटाइड आर्थ्राइटिस क्या है ? Rheumatoid Arthritis Kya Hai?

रूमेटाइड आर्थ्राइटिस एक ऐसी प्रतिरोधी प्रतिक्रिया है जिसके कारण कोशिकाओं में सूजन आने लगती है और शरीर के जोड़ एवं अन्य अंग भी प्रभावित होने लगते हैं. यह बढ़ती उम्र में होने वाली समस्याओं में से एक है किंतु रूमेटाइड आर्थ्राइटिस ने आज की 25-35 वर्ष की युवा पीढ़ी को भी अपनी चपेट में ले लिया है. इसके मुख्य कारण असंतुलित आहार विहार और जीवनशैली में बदलाव हो सकते हैं. सामान्य भाषा में रूमेटाइड आर्थ्राइटिस को ‘संधि शोथ’ के नाम से जाना जाता है. चिकित्सकीय भाषा में इसे ‘ऑटोइम्यून रोग’ या ‘रुमेटी गठिया’ कहते हैं. उम्र बढ़ने के साथ शरीर के अंगों के जोड़ घिसने लगते हैं. ऐसा हर इंसान के जोड़ों में होता है. रूमेटाइड आर्थ्राइटिस में रोगी की कार्टिलेजों यानी हड्डियों के सिरों को ढकने वाले सुरक्षा सेल्स में विकार आ जाता है, इससे एक या कई जोड़ों में दर्द, अकड़न या सूजन आ जाती है. आर्थ्राइटिस रोग में जोड़ों में गांठे बन जाती है और शूल चुभने जैसी पीड़ा होती है(Ish Rog Me Jodo Me Ganthe Ban Jati Hai). यही कारण है कि इसे गठिया भी कहा जाता है.

रूमेटाइड आर्थ्राइटिस होने का कारण Rheumatoid ArthritisHone Ka Karan

रूमेटाइड आर्थ्राइटिस इम्यून सिस्टम यानी प्रतिरोधी तंत्र की असामान्य प्रतिक्रिया के कारण होने वाला रोग है. आर्थ्राइटिस होने पर जोड़ों में थोड़े थोड़े अंतराल में यह निरंतर दर्द होता है. प्रभावित जोड़ों में हड्डियों के परस्पर रगड़ खाने से, चलने पर जोड़ों में से आवाज आने जैसा प्रतीत होने लगता है. मुख्यतः आनुवांशिक (जैनेटिक) कारणों, हार्मोन में असंतुलन और प्रतिरक्षा प्रणाली में दोष रूमेटाइड आर्थ्राइटिस के लिए जिम्मेदार माने जाते हैं. तैलीय व मसालेदार भोजन, मांस, घी, कब्ज, शारीरिक एवं मानसिक कार्य न करना, क्रोध, चिंता शराब का सेवन आदि कारणों से जोड़ों में सोडियम यूरेट जमा होने से असहनीय पीड़ा होती है और व्यक्ति में रूमेटाइड आर्थ्राइटिस होने की संभावना बढ़ जाती है. यदि समय रहते रूमेटाइड आर्थ्राइटिस होने का पता लगा लिया जाए तो इसका उपचार पूर्णतः मुमकिन है, लंबे समय तक के इलाज में लापरवाही जोड़ों में स्थायी क्षति का कारण बन सकती है तथा कई मामलों में रोगी ताउम्र विकलांग भी हो जाता है(Rheumatoid Arthritis Ko Ek parkar Ka Gathiya bhi Kaha Ja Sakta Hai)

किसे है रूमेटाइड होने का खतरा ? Kise Hai Rheumatoid Hone Ka Khatra

आमतौर पर बच्चे बाहर के जंग फूड, कोल्ड्रिंक और अन्य खाद्य वस्तुओं के सेवन करने के आदि होते हैं, किंतु अनियमित  आहार क्रिया बच्चों में रूमेटाइड आर्थ्राइटिस होने का खतरा पैदा कर सकती है. इसलिए आवश्यक है कि बच्चों के खानपान का विशिष्ट ध्यान रखा जाए(Rheumatoid Arthritis Bachho Ko Bhi Ho Sakta Hai)

पुरुषों की तुलना में महिलाओं में रूमेटाइड आर्थ्राइटिस होने की आशंका ज्यादा रहती है. आर्थ्राइटिस फाउंडेशन के आंकड़ों के अनुसार 30-60 वर्ष की उम्र की महिलाओं में इसकी शुरुआत हो सकती है. पुरुषों में यह 50 की उम्र के बाद होता है. गर्भावस्था के दौरान महिलाओं में प्राकृतिक रूप से रूमेटाइड आर्थ्राइटिस में सुधार होने लगता है और इससे जुड़ी समस्याएं भी कम हो जाती है. इसके अतिरिक्त 60-65 वर्ष की आयु से ज्यादा वाले वृद्धो और मधुमेह से पीड़ित व्यक्तियों को आमतौर पर रूमेटाइड आर्थ्राइटिस की शिकायत रहती है.

रूमेटाइड आर्थ्राइटिस के लक्षण Rheumatoid Arthritis Ke Lakshan

सामान्यतः रूमेटाइड आर्थ्राइटिस का प्रभाव उंगलियों, पैर के पंजो, कलाइयों, कोहनियों और घुटनों में देखा जाता है. रूमेटाइड आर्थ्राइटिस के लक्षणों की पहचान होना अत्यंत महत्वपूर्ण है.

  • जोड़ों में दर्द या अकड़न Jodio Me Dard
  • जोड़ों में सूजन Jodo Me Sujan
  • दर्द वाले स्थान पर लालिमा आना Lalima Aana
  • जोड़ों के लचीलेपन में कमी Jodo Me flexibility Me Kami
  • वजन घटना और थकान Vajan ghatana
  • बुखार आना Fever Aana
  • चलने पर शरीर के जोड़ों में दरार पड़ने जैसा प्रतीत होना Chalne me Takleef
  • त्वचा पर गांठे पड़ना Skin Me Ganthe Padna
  • भूख न लगना Bhuk Na Lagna

आयुर्वेद में रूमेटाइड आर्थ्राइटिस की परिभाषा Ayurved Me Rheumatoid Arthritis Ki Paribhasha

आयुर्वेद के अनुसार सही समय पर वैकल्पिक उपचार पद्धतियों की मदद से जीवन की सामान्य गति को बनाए रखने में सहायता मिलती है. सही समय पर उपचार की शुरुआत महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है. आयुर्वेदिक उपचारो को अपनाने से रूमेटाइड आर्थ्राइटिस से शीघ्र ही निजात मिल सकता है.

जीवन शैली में करें जरूरी बदलाव Jeevan shaili Me Kare Jaruri Badlav

एक अंग्रेजी कथन के अनुसार “स्वस्थ और दुरुस्त रहना एक प्रवृत्ति नहीं है अपितु यह आदर्श जीवन शैली भी है”. असंतुलित जीवन शैली और आहार विहार की गलत आदतों के कारण व्यक्ति कई बीमारियों से ग्रस्त होने लगा है. रूमेटाइड आर्थ्राइटिस से बचने के लिए सबसे कारगर उपाय यही है कि नियमित दिनचर्या का पालन करें. अनियमित आहार व मानसिक तनाव रखने से वजन में वृद्धि होती है जो रूमेटाइड आर्थ्राइटिस की समस्या को और बढ़ा देता है.

आयुर्वेद के अनुसार हड्डियों और जोड़ों में संतुलित वायु का निवास होता है, अतः शरीर में वायु के असंतुलन से जोड़ों की रचना में विकृति पैदा हो जाती है. उचित समय पर सोना, उठना और खाना वात दोष को कम करता है. इससे रोग को बढ़ने से रोकने में सहायता मिलती है.  रूमेटाइट आर्थ्राइटिस के रोगियों के लिए योग और व्यायाम करना काफी लाभदायक सिद्ध होता है. प्रातः नियमित रूप से व्यायाम आर्थ्राइटिस रोगियों में मांसपेशियों की ताकत और लचीलेपन को बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण है.

रूमेटाइड आर्थ्राइटिस के घरेलु उपचार Rheumatoid Arthritis Ke Gharelu Upchar

अरंडी का तेल से उपचार Arandi Ka Tel Se Upchar रूमेटाइड आर्थ्राइटिस के लिए आयुर्वेद में सबसे प्रबल उपचार है अरंडी का तेल. रोजाना दो बार जोड़ों पर अरंडी के तेल से मालिश करने से दर्द कम होता है.

आलू से इलाज Aalu Se Ilaj आलू में पर्याप्त मात्रा में स्टार्च और प्रोटीन पाया जाता है. इसका नियमित सेवन करने से जोड़ों से संबंधित समस्याएं दूर होती है. यह गठिया में लाभदायक होता है.

गाजर और शकरकंद है फायदेमंद Gajar Aur Shakarkand Hai Faydemand गाजर और शकरकंद में विटामिन सी पाया जाता है जो शरीर की प्रतिरोधी क्षमता को बढ़ाने में सहायक सिद्ध होता है. गाजर और शकरकंद में थोड़ा सा नमक, जीरा और शक्कर मिलाकर सूप बना लें. इसका सेवन करने से जोड़ों में मजबूती बनी रहती है और दर्द से राहत मिलती है.

सौंठ से उपचार Sonth Se Upchar सौंठ मे अजवाइन मिलाकर इसका चूर्ण बना लें. भोजन करने के पश्चात इस चूर्ण का सेवन गठिया के उपचार के लिए परम हितकारी है. इसके अतिरिक्त सौंठ और काली मिर्च का काढ़ा बनाकर भी उपयोग में ले सकते हैं.

लहसुन के लाभ Lahsun Ke Labh लहसुन की कलियां 50 ग्राम, 2 ग्राम सेंधा नमक, जीरा, हींग, पीपल, काली मिर्च व सौंठ एक साथ पीसकर अरंडी के तेल में भून लें. इस दवा का दिन में 2-3 बार सेवन करने से रूमेटाइड आर्थ्राइटिस में सुधार आता है. Read More – लहसुन खाने के फायदे

शहद और बादाम है गुणकारी Shahad Aur Badam hai Gunkari बादाम कैल्शियम का सुलभ स्त्रोत है. शहद और बादाम के तेल का प्रातः सेवन करने से जोड़ों में मजबूती आती है.

नियमित योग के फायदे Niymit Yog Ke Fayde योग विज्ञान में व्यायाम और प्राणायाम को जीवन में ऊर्जा का निर्माण और संचार करने की महत्वपूर्ण प्रणाली माना गया है. नियमित व्यायाम शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने और मानसिक व शारीरिक रूप से दुरुस्त रखने में मदद करता है. जोड़ों के दर्द के लिए ताड़ासन, पवनमुक्तासन, त्रिकोणासन व्यायाम और अनुलोम विलोम करने से शरीर के अंगों में स्थिरता आती है और जोड़ों के दर्द से निजात मिलता है. Read More – योग : मन-मस्तिष्क को करें शांत

परहेज करे Parhej Kare सूजन बढ़ाने वाले पदार्थ जैसे नमक, चीनी, अल्कोहल, कैफीन, तेल, दूध व दुग्ध उत्पादों, ट्रांसफैट और लाल मांस का सेवन कम करें.

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