त्वचा के लिए घातक है रिंगवर्म Ringworm Ka Gharelu Upchar

ग्रीष्म ऋतु के अंत के साथ वर्षा ऋतु का आगमन हो जाता है. मौसम के बदलाव के कारण नमी और गर्मी में हर प्रकार के जीवाणुओं के फैलने का खतरा रहता है. यह जीवाणु आपको कई तरह के संक्रमणों से ग्रसित कर सकते हैं. ऐसा ही एक संक्रमण है रिंग वर्म, जो आपकी कोमल त्वचा के लिए घातक साबित हो सकता है (Ringworm kaise Hota hai).

मौसम में बदलाव के साथ ही कई जीवाणु भी पनपते हैं. इन जीवाणुओं के संक्रमण से आपकी त्वचा प्रभावित हो सकती है. बारिश के मौसम में हम कई बार दाद की समस्या से परेशान हो जाते हैं (Daad Ki Samasya Aur Iska Upchar). यह किसी भी वर्ग के व्यक्ति को पीड़ित कर सकता है. आम भाषा में इसे रिंगवर्म या दाद कहा जाता है (Ring worm ko daad ke naam se jaana jata hai) . नाम से प्रतीत होता है कि यह संक्रमण किसी वर्म अर्थात् कीड़े से होता है (Ringworm ke Hone Karan). परंतु ऐसा नहीं है. इस संक्रमण के होने का मुख्य कारण होता है फंगस या यीस्ट. रिंगवर्म के लिए जिम्मेदार फंगस में ट्राइकोफाइटन रूब्रम, टोन्सूरन्स, इन्टरडिजिटेलिस, मेंटाग्रोफ्राइट्स, माइक्रोस्पोरम केनिस और एपीडर्मोफाइटन प्रमुखता से होते हैं.

हमारी त्वचा से अनेकों जीवो के लिए आश्रय का कार्य करती है. अनेकानेक कीटाणुओं, वायरस, फंगस और वनस्पतिक पदार्थों के साथ सतत संपर्क में आने के बावजूद भी या अपना स्वास्थ्य बनाए रखने के विविध कार्यों का संपादन करती रहती है. जब हमारी त्वचा पर आश्रित फंगस धीरे धीरे अपना विकास या फैलाव करने लगते हैं तब हम रिंगवर्म की समस्या से पीड़ित हो जाते हैं. यह एक ऐसा सक्रमण है जो एक व्यक्ति से दूसरे को फैल सकता है. स्वस्थ व्यक्ति द्वारा संक्रमित व्यक्ति की वस्तुएं इस्तेमाल करने से भी यह फैल सकता है(Ringworm Sankraman se Failta hai).

ringworm daad ka upchar

रिंगवर्म त्वचा में होने वाला एक सामान्य किंतु चिरकालिक संक्रमण है. विशेषकर बच्चों को प्रभावित करने वाला यह संक्रमण, बड़ी उम्र के लोगों को भी हो सकता है. इस रोग में त्वचा पर घेरेनुमा आकार के चकत्ते बन जाते हैं. जब वातावरण में अत्यधिक गर्मी हो और साथ में उमस और गीलापन हो तब रिंगवर्म का संक्रमण का खतरा रहता है. ऐसा वातावरण फंगस के क्षेत्र की वृद्धि में एक महत्वपूर्ण कारक होता है.

जानवरों से प्रेम तो हर किसी को होता है, पर इस प्रेम में हमें यह बात याद रखना जरूरी है कि यह जानवर हमें संक्रमित भी कर सकते हैं. पालतू जानवरों को हम साफ सफाई से रखते हैं पर फिर भी इनसे हमेंशा एक निश्चित दूरी बनाए रखना जरूरी है. रिंगवर्म जानवरों को छूने से या दूसरे स्थानों पर जाने से हो सकता है.

रिंगवर्म को टिनिया और डर्मैफाइटोसिस नाम से भी जाना जाता है (Ringworm ko Tinia Bhi kahte hai). इसका लैटिन अर्थ है विस्तृत होने वाला कृमि. यह जांघों के जोड़ों, अंडकोषों के आसपास, सिर से लेकर नाखूनों तक में होती हैं. त्वचा पर लाल रंग के घेरेनुमा चकत्ते बनने के कारण इसे रिंग और कीड़े के समान चारों ओर प्रसारणशील होने के कारण ही रिंगवर्म कहा जाता है. इस रोग में चकत्तो का आकार हर दिन बढ़ता जाता है व रोगी को बहुत खुजली भी होती हैं. समय पर इलाज करने से इस संक्रमण को अन्य अंगों पर फैलने से रोका जा सकता है (Ringworm ka samay pe Ilaj) .

रिंगवर्म के लक्षण Ringworm ke lakshan 

  • त्वचा पर लाल रंग का गोल घेरेनुमा चकत्ते हो जाना (Skin rash)
  • दाद पर अत्यधिक खुजली होना (Extreme itching on ringworm)
  • संक्रमित भाग पर जलन होना व उभार महसूस होना (Burning sensation on the infected area)
  • बालों की जड़ों में खुजली होना (Balon ki Jaddon me Khujli Hona)
  • त्वचा की ऊपरी सतह का निकलना (Exudation)
  • दाद का तेजी से फैलना (Daad ka teji se Failna)
  • बालों का झड़ना (Hair fall)
  • प्रभावित स्थान पर सूजन आना (Swelling of affected area)
  • तवचा पर छोटी-छोटी फुंसियां हो जाना जिनसे स्त्राव होता हो
  • त्वचा में दरारें पड़ना (Skin cracks)

रिंगवर्म के उपचार के 9 घरेलू उपाय Ringworm ke Upchar ke Gharelu Upaay

रिंगवर्म शीघ्र प्रसारणशील त्वचा का संक्रमण है जो कि एक दूसरे के संपर्क में आने से तेजी से फैलने लगता है. रिंगवर्म से संक्रमित होने पर उचित उपचार लेना अनिवार्य है यद्यपि यह संक्रमण आपकी त्वचा को पूर्णतः चपेट में ले सकता है.

  1. रिंगवर्म को लहसुन से करें ठीक Ringworm ko Lahsun se Thik Kare

लहसुन प्राकृतिक एंटी फंगल तत्वों से भरपूर होता है. इसके सेवन से फंगस को नष्ट करने में सहायता मिलती हैं. सबसे पहले लहसुन की 3-4 कलियों को छीलकर उनका पेस्ट बना लें. इसमें जैतून के तेल की कुछ बूंदें और शहद मिलाएं. इस लेप को दाद पर लगाने से पीड़ित को जल्द आराम मिलता है. Read More – लहसुन खाने के फायदे

2. रिंगवर्म में नारियल के तेल के फायदे Ringworm me Nariyal k Tail k Fayde

नारियल का तेल दाद को ठीक करने में प्रभावी होता है. इसमें मौजूद लॉरिक एसिड सिर में हो रहे संक्रमण को खत्म करने में मददगार होता है. प्रभावित स्थान पर दिन में 3-4 बार नारियल का तेल लगाकर मसाज करें. सिर की जड़ों में रिंग के इंफेक्शन से निजात पाने के लिए यह रामबाण इलाज है.

3. नींबू से रिंगवर्म का इलाज Nimbu se Ringworm Ka Ilaj

सिट्रिक एसिड से भरपूर नींबू एक एंटीसेप्टिक की तरह कार्य करता है. 1-2 नींबू का रस निकाल कर एक रूई की मदद से इसे संक्रमित स्थान पर लगाएं. फिर कुछ देर बाद इसे ठंडे पानी से धो लें. रोजाना दिन में 2 बार ऐसा करने से खुजली बंद होती है. इसके अतिरिक्त आप नींबू के रस में अलसी का तेल मिलाकर भी प्रयोग कर सकते हैं. Read More – नींबू खाने के फायदे

4. पपीता से रिंगवर्म का उपचार Papita se Ringworm ka Upchar

कच्चे या हरे पपीते में पैपेन नामक एंजाइम पाया जाता है. यह त्वचा की ऊपरी सतह से मृत कोशिकाओं को नष्ट करने में मदद करता है. पपीते के छोटे टुकड़े पर उसे दाद पर लगाने से आपको जल्द ही संक्रमण से निजात मिल सकता है. Read More – पपीता खाने के फायदे

5. हल्दी के फायदे Haldi Se Daad Ka Upchar

हल्दी एक प्राकृतिक एंटीबायोटिक की तरह कार्य करती है Haldi me antibiotic property hoti hai. जीवाणुओं को नष्ट करने में हल्दी सहायक होती है. हल्दी को पानी के साथ मिलाए. इसे दाद पर लगाने से जल्द राहत मिलती है. Read More – जाने हल्दी के 10 आश्चर्यजनक फायदे

6. बेकिंग सोडे से रिंगवर्म का इलाज Baking Sode se Ringworm ka Ilaj

खुजली दूर करने का एक सामान्य तरीका है बेकिंग सोडा का इस्तेमाल करना. 3 चम्मच बेकिंग सोडा में 1 चम्मच पानी मिलाकर लेप बना ले. इसे प्रभावित स्थान पर लगाकर 10 मिनट तक छोड़ दें. फिर साफ पानी से धो लें. नियमित ऐसा करने से संक्रमण खत्म होता है.

7. मंजीठ के फायदे रिंगवर्म में Majheeth ke Fayde

प्राचीन समय से आयुर्वेद का प्रयोग कई समस्याओं के निवारण में किया जा रहा है. आयुर्वेद की औषधियों में मंजीठ का नाम भी शामिल है. यह रक्तशोधक और ज्वरनाशक के रूप में प्रयोग की जाती है. मंजीठ की जड़ को शहद के साथ मिलाकर लेप तैयार कर ले. इस ले को दाद पर लगाने से कुछ ही दिनों में दाद समाप्त हो जाते हैं.

8. इमली से रिंगवर्म का उपचार Imli se Ringworm ka Ilaaj

इमली के बीज को पीसकर उसमें नींबू का रस मिला लें. इस मिश्रण को 4-5 दिनों तक लगाने से रिंगवर्म का घाव ठीक हो जाता है. Read More – इमली के औषधीय गुण और फायदे

9. कपूर लाभकारी होती है रिंगवर्म में

पूजा में प्रयोग होने के साथ ही कपूर में कई औषधीय गुण भी होते हैं. इसकी प्रकृति शीतल होती है. संक्रमित स्थान पर कपूर का तेल लगाने से घाव पर हो रही खुजली और जलन से राहत मिलती है.

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