प्रसव पूर्व जरूरी रक्त परीक्षण Blood Tests During Pregnancy In Hindi

Blood Tests During Pregnancy Third Trimester Hindi

प्रसव पूर्व जरूरी रक्त परीक्षण Blood Tests During Pregnancy In Hindi

प्रसव  पूर्व निम्नलिखित रक्त की जांच करानी आवश्यक है –

1. रक्त की किस्म (जैसे बी +, बी – , एबी +) blood test during pregnancy

2. एक प्रोटीन जिसे आरएच फैक्टर कहा जाता है। इस रक्त परीक्षण के द्वारा यह जाँच होगी की आपका आरएच पाजटिव है या नेगटिव। Protein test during pregnancy

3. लौह स्तर Iron test during pregnancy

4. हेपेटाइटिस बी (Hepatitis blood test during pregnancy)

5. रोग-प्रतिकारक, आपको यह दिखाने के लिए कि आप जर्मन खसरा (रूबेला) से प्रतिरक्षित है (Immunity blood test during pregnancy)

6. रोग-प्रतिकारक, आपको यह दिखाने के लिए कि आप चेचक (वैरिसेल) से प्रतिरक्षित है

7. सिस्टिक फाइब्रोसिस (Cystic fibrosis test during pregnancy)

8. सिकल सेल एनीमिया (Sickle Cell test during pregnancy)

9. सिफलिस  (Syphilis test during pregnancy)

10. आपके बच्चे में कुछ प्रकार के जन्म दोश (Genetic test during pregnancy)। इस परीक्षण को क्वाड स्क्रीन कहा जाता है। इस परीक्षण द्वारा आपके बच्चे में कुछ प्रकार के जन्मजात दोशों संबंधी बढ़ते खतरे की जाँच की जाती है। इस परीक्षण में एल्फा फिटोप्रोटीन (एएफपी) परीक्षण षामिल हैं। क्वाड स्क्रीन गर्भावस्था के 15-20 सप्ताहों के बीच किया जाता है।

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11. गर्भकालीन मधुमेह (Diabetes test during pregnancy)। इस परीक्षण को ग्लूकोज सहनषीलता परीक्षण (जीटीटी) या ग्लूकोज स्क्रीनिंग परीक्षण कहा जाता है। यह गर्भावस्था के 24 और 28 सप्ताह के बीच गर्भावस्था में उच्च रक्त शर्करा की जांच करने के लिए किया जाता है। आपको पीने के लिए एक मीठा सोडा दिया जाता है और फिर आपके रक्त के नमूने लिए जाते हैं।

12. एचआईवी (HIV test during pregnancy)। गर्भावस्था में जन्म देने अथवा स्तनपान कराने के दौरान यह संक्रमण माताओं से उनके बच्चों को हो सकता है। सभी महिलाओं को इस संबंध में रक्त परीक्षण हेतु विचार करना चाहिए। आपको परीक्षण से पहले एक सहमति फार्म पर हस्ताक्षर करने के लिए कहा जा सकता है। इस परीक्षण के परिणाम गोपनीय रखे जाते हैं।

13. ऐमन्यिोसैंटेसिसः यह परीक्षण जैनेटिक रोगों की जाँच के लिए होता है तथा गर्भावस्था के 15 से 20 सप्ताह के बीच किया जाता है। चिकित्सक महिला के पेट में सुई डाल कर एमनियोटिक द्रव की थोड़ी सी मात्रा निकालता है। यह द्रव परीक्षण हेतु प्रयोगषाला में भेजा जाता है।

14. कोरीओनिक विलस नमूनाकरण (सीवीएस): यह परीक्षण ऐमन्यिोसैंटेसिस परीक्षण करने का एक विकल्प है। आनुवंषिक रोगों की जांच करने के लिए कोषिकाओं के एक नमूने को गर्भनाल से हटा दिया जाता है। यह परीक्षण गर्भावस्था में पहले ही (10 से 12 सप्ताह में) किया जा सकता है, लेकिन इस परीक्षण में जोखिम काफी अधिक होता है।

15. ग्रुप बी स्ट्रैपटोकोकस (जीबीएस): जीबीएस महिलाओं की योनि में पाया जाने वाला एक आम बैक्टीरिया है। यह बच्चे में संक्रमण पैदा कर सकता है। इस परीक्षण में आमतौर पर गर्भावस्था के 35 और 37 सप्ताह के बीच योनि और मलाषय से स्वाबिंग (फाहे से नमूने लेना) शामिल होता है।

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