तुलसी खाने के फायदे Tulsi Khane Ke Fayde In Hindi

Tulsi Ke Fayde Hindi Me

तुलसी खाने के फायदे (Tulsi Khane Ke Fayde In Hindi Language)

तुलसी एक पूजनीय और औषधीय पौधा है । इसकी कई किस्म होती है | लोग तुलसी का पौधा घर के दरवाजे पर या आंगन में लगाते हैं | तुलसी में अनेक जैव सक्रिय रसायन पाए जाते हैं | इसके सेवन से मनुष्य सदा स्वस्थ रहता है | तुलसी का पौधा ऐसी औषधि है जो ज्यादातर बीमारियों में काम आता है । आइये जानते हैं कि तुलसी का उपयोग किन बीमारियों में होता है-

बांझपन – मासिक-धर्म के दिनों में तुलसी के बीजों का काढ़ा बनाकर कुछ दिनों तक सेवन करने से गर्भाशय विकार रहित होकर गर्भाधान के योग्य हो जायेगा |

मासिक-धर्म-विकार – 1. तुलसी के बीज पीसकर पानी के साथ लेने से रुका हुआ मासिक धर्म पुनः समय पर होने लगता है | 2. मासिक धर्म का रक्त अधिक परिमाण में होता हो तो तुलसी के पौधे की जड़ बारीक चूर्ण करके मात्रा 2 ग्राम को पान में रखकर चबाना चाहिए |

पेशाब में जलन – तुलसीदल चबायें, जलन मिट जायेगी |

प्रदर (ल्यूकोरिया) – 1. तुलसी का रस निकालकर इसमें जीरा मिलायें और गाय के दूध के साथ दें अथवा तुलसी के रस में सम मात्रा में शुद्ध शहद मिलाकर रोगिणी महिला को चटायें | 2. तुलसी के पत्ते के रस में, शुद्ध शहद न हो तो, मिश्री पीसकर मिलायी जा सकती है | श्वेत व रक्त दोनों प्रकार के प्रदर रोग में आराम हो जायेगा |

आधासीसी – छाया में सुखाये गये तुलसी के पत्तों के चूर्ण में शहद मिलाकर दिन में तीन बार सुबह, दोपहर व सायं चटाना चाहिए |

सामान्य सिर दर्द में – 1. छाया में सूखे पत्ते पीसकर रोगी को सुंघाये | 2. तुलसी के ताजा पत्तों के रस में नींबू का रस सम मात्रा में मिलाकर पिलायें |

मिर्गी आना – रोगी के पूरे शरीर पर तुलसी के ताजा पत्तों की पिसी लुगदी से मालिश करनी चाहिए |

पेट दर्द – तुलसी व अदरक के रस को समान अनुपात में मिला, गर्म करके पीने से सभी प्रकार के पेट दर्द में लाभ होता है | मरोड़, ऐठन, पेट में कीड़े होना, कब्ज, अफारा, अजीर्ण, उल्टी होना या वमन, सामान्य दस्त कारण कोई भी क्यों न हो |

कान का दर्द – कान बहता हो अथवा मैल, फुंसी आदि के कारण सूखा दर्द हो तो तुलसी के पत्तों का रस गुनगुना करके लगातार कुछ दिनों तक डालने से दर्द ठीक हो जाता है |

बिजली गिरना – तार या प्राकृतिक आकाशीय बिजली गिर जाने से बेहोश हुए व्यक्ति के चेहरे व सिर पर तुलसीदल के रस की मालिश करनी चाहिए |

आग से जल जाने पर – तुलसी के रस को नारियल के तेल में मिलाकर लगाने से घाव, दाग ठीक होते हैं व जलन शांत हो जाती है |

बवासीर – तुलसी के पत्तों का सेवन तथा पीसकर रोगी स्थान पर लेप कर देना चाहिए |

चेचक का बुखार – तुलसी के पत्तों में समान भाग अजवायन मिलाकर पीस लें और इसे पानी के साथ लें, ज्वर शांत हो जायेगा |

चेचक से बचाव – आस-पास के क्षेत्र में चेचक का प्रकोप हो तो प्रतिदिन प्रातःकाल तुलसी 5 नग घर के सभी सदस्यों को चबा लेने चाहिए | चेचक से बचाव हो जायेगा | मलेरिया बुखार भी नहीं आयेगा |

यदि मलेरिया बुखार आ रहा हो तो – 25 पत्ते तुलसी, 15 नग काली मिर्च व थोड़ी सी देसी खांड का काढ़ा बनाकर पीना चाहिए |

नाक की दुर्गन्ध – तुलसी के सूखे पत्ते या ताजा पत्तों का रस सूंघने से नाक के कीड़े मर जाते हैं और दुर्गन्ध भी समाप्त हो जाती है |

बालों की सफेदी – असमय बालों में रूखापन, झड़ने लगना या सफ़ेद हो जाने की दशा में तुलसी के पत्ते व आंवले का चूर्ण मिलाकर सिर पर मलें और 15-20 मिनट बाद सिर धो डालें | ऐसा कुछ दिनों तक करते रहने से ही बालों की जड़ें मजबूत हो जायेंगी और उनका झड़ना रुक जायेगा तथा पुनः काले बाल उगने लगेंगे |

ज्ञातव्य – लगाते या सिर धोते समय पानी आँखों में नहीं जाना चाहिए, सावधान रहें |

शीघ्रपतन व वीर्यदोष – 1. तुलसी की जड़ का बारीक चूर्ण या तुलसी के बीज पान में रखकर खायें 2. तुलसी के बीज में पुराना गुड़ मिलाकर गाय के दूध के साथ लें 3. युलसी के साथ मिश्री मिलाकर ऊपर से दूध पीने से धातु संबंधी समस्त विकार मिट जाते हैं | वीर्य गाढ़ा हो जाता है, स्तम्भन शक्ति (सैक्स पावर) बढ़ जाता है | वीर्य की मात्रा बढ़ती है, पतलापन दूर होता है और उसमें सजीव जीवाणु पैदा हो जाने से वीर्य शुद्ध होकर गर्भाधान के योग बनता है | शरीर की गर्मी शान्त होकर वह बलिष्ठ बनता है |

स्वप्नदोष – दूर करने के लिए तुलसी की जड़ के बारीक चूर्ण को ताजा पानी में पीसकर पिलावें, स्वप्नदोष से मुक्ति मिल जायेगी |

चर्मरोग – 1. वर्ष ऋतु में होने वाले फोड़े-फुंसियों में तुलसी के पौधों की लकड़ी घिस कर लगायें 2. मुंहासे धब्बे व झाइयों पर तुलसी के पत्ते का बारीक चूर्ण मक्खन में मिलाकर चेहरे पर मलें | 3. फोड़ा बड़ा हो तो तुलसी के पत्ते पानी में उबालकर इससे फोड़े को धोवें तथा ताजा पत्तों को पीसकर लेप करें |

जुकाम – 1. तुलसीदल, कालीमिर्च व सोंठ का काढ़ा बनाकर पीयें | 2. तुलसीदल, काली मिर्च, सेंधा नमक,गुड़ या शक्कर, दूध व चाय की पत्ती डालकर चाय बनाकर पीयें 3. छाया में सूखी तुलसी की पत्ती सूंघने से तीव्रता से बहता हुआ भी जुकाम ठीक हो जाता है |

विशेष – यदि छोटे बच्चों और शिशुओं को कफ, खांसी, फेफड़ों में कफ की घड़घड़ाहट हो रही हो या जुकाम तेज हो तो तुलसी के पत्तों में शहद मिलाकर रोगी बच्चों को देना चाहिए |

मुखपाक – चमेली तथा तुलसी के पत्ते चबायें |

रतौंधी – शहद तथा तुलसी का रस दोनों 5-5 ग्राम, कालीमिर्चों के ऊपर का छिलका कपड़छन कर 1 चुटकी, तीनों आपस में मिलाकर भलीभांति घोंटे | रात में सोते समय प्रतिदिन एक बार उक्त पदार्थ नेत्रों में आंजें |

नकसीर चलना – 4 बूंदें तुलसी के रस की नाक में टपकाना लाभकारी है |

बर्र या काले भौरों के काटने पर – दंशित स्थान पर तुलसी के पत्तों के रस में एक चुटकी सेंधा नमक मिलाकर लेप करें, साथ ही तुलसी की कुछ पत्तियां चबायें |

हिचकी – तुलसी का रस 10 ग्राम व शहद 5 ग्राम मिला लें, इसे पीने से हिचकी बंद हो जायेगी |

बिच्छू द्वारा काटने पर – तुलसी की जड़ तथा तुलसी के पत्ते पीसकर दंशित स्थान पर लेप करें और 7-8 दाने कालीमिर्च तथा लगभग एक मुट्ठी काली तुलसी की पत्तियां पीस लें |

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