पीलिया (Jaundice) होने का कारण व लक्षण पीलिया यकृत की क्रिया बिगड़ जाने से होता है। इस रोग में पित्त भलीभांति अवशोषित नहीं होता। यकृत की क्रिया में उत्पन्न विकारों से अनेक लक्षण उत्पन्न होते हैं जिनमें आंखों का दुखना, कमजोरी, प्यास लगना, आंख की गोलकों पर सूजन, पसीना रुक जाना, भोजन न पचना, ज्वर, कान Read More →

हिचकियां (Hiccups) आने का कारण व लक्षण हिचकियां आने का वास्तविक कारण है आहार नलिका में आई रुकावट। वैसे हिचकियां आना नुकसानदायक नहीं है, किंतु यदि हिचकियां तेज आएं तथा रुकें नहीं तो इसमें रोगी की जान भी जा सकती है या बेहद चिंताजनक स्थिति उत्पन्न हो सकती है। हिचकियां (Hiccups) आने पर उपचा 1. Read More →

दस्त होने का कारण जब कोई व्यक्ति बार-बार मल त्याग करे तो उस अवस्था को दस्त लगना कहा जाता है। दस्त लगने का सबसे प्रमुख कारण बैक्टीरिया या वायरस का संक्रमण है। इसके अलावा आतों में विकार, पेट में कीड़े होना, अधिक भोजन, गरिष्ठ या विषाक्त भोजन के सेवन व आहार में परिवर्तन होने के Read More →

पेट में गैस की अधिकता का कारण व लक्षण यह हानिरहित समस्या है, जो ज्यादातर मामलों में प्याज, अंडे, बेसन, रेशेदार पदार्थ, अधिक प्रोटीन व वसायुक्त भोजन के सेवन से उत्पन्न होती है। कभी-कभी पेट के अल्सर, अपच, पेट में संक्रमण, हर्निया तथा अन्य कारणों से भी यह समस्या हो जाती है। इस रोग में Read More →

गला बैठने का कारण व लक्षण ज्यादा तेज बोलना, गले का जरूरत से ज्यादा उपयोग, सर्दी लगने, वनस्पति घी व खराब तेल से बनी वस्तुओं का सेवन व अन्य शारीरिक विकारों की वजह से गला बैठ जाता है। गला बैठने या जमने से आवाज स्पष्ट नहीं निकलती या रोग की गंभीर अवस्था में आवाज निकलती Read More →

यह ज्वर काफी कष्ट देता है और इसके होने पर अन्य कई समस्याएं भी उत्पन्न हो जाती हैं | इसे मोतीझरा या मियादी बुखार भी कहते हैं | यह आंतों के विकार से उत्पन्न होने वाला ज्वर है | टायफाइड के जीवाणु दूषित पानी द्वारा फैलते हैं | कारण इसे छूत का बुखार कहा जाता है Read More →

मलेरिया को आयुर्वेद में विषम ज्वर भी कहते हैं | यह एनॉफिलीज नामक मच्छर के काटने से होता है | यह मच्छर दूसरों का रक्त चूस कर जीवित रहता है | इस ज्वर में रोगी इतना कमजोर हो जाता है कि उसके शरीर की रोगरोधक क्षमता पूर्णतया समाप्त हो जाती है | वह अन्य रोगों Read More →

गठिया रोग में प्रायः घुटनों के जोड़ वाले स्थान पर झिल्ली में सूजन अथवा जमाव के कारण दर्द रहने लगता है | यह रोग अधिकतर 30 से 50 वर्ष की आयु में होता है | स्त्रियां इस रोग से अधिक प्रभावित होती हैं | रोगी चलने-फिरने में असमर्थ हो जाता है | जोड़ों का स्वरूप Read More →

गले में दर्द का कारण सर्दी, जुकाम, गला बैठने व गले की अन्य बीमारियों के कारण गले में दर्द होने लग जाता है, जिसका उपचार फलों के द्वारा किया जा सकता है। गले में दर्द होने पर उपचार शहतूतः शहतूत कफनाशक होता है तथा रक्त शुद्ध करता है। गले के दर्द में भी यह संजीवनी का Read More →

दमे का दौरा पड़ने पर श्वास नली प्रभावित होती है और सांस लेने में कठिनाई होती है | दौरे पड़ने से श्वास नली में तनाव हो जाता है | श्वास नली की मांसपेशियां सिकुड़ जाती हैं और नली तंग हो जाती है | इस कारण वायु फेफड़ों से निकलने या उसमें प्रवेश के समय कष्ट Read More →